छत्तीसगढ़
2 महीने पहले
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विचारों
छत्तीसगढ़ में UCC की दिशा में बड़ा कदम
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लागू करने की प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत कर दी है। इस दिशा में एक बड़ा निर्णय लेते हुए सरकार ने पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति राज्य में मौजूद विभिन्न कानूनों का सूक्ष्मता से अध्ययन करेगी और सभी संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श करने के बाद अपना प्रारूप तैयार कर सरकार को सौंपेगी।
समिति की रूपरेखा और सदस्य
राज्य सरकार द्वारा गठित इस समिति की कमान सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को सौंपी गई है, जो इस कमेटी की अध्यक्ष होंगी। समिति में अन्य सदस्यों के रूप में शत्रुघ्न सिंह, एम.के. राउत, मोहन पवार और ज्योति रानी सिंह को शामिल किया गया है। सरकार ने इस समिति को न केवल यूसीसी का प्रारूप तैयार करने का दायित्व दिया है, बल्कि इसे कानूनी ढांचे से संबंधित जरूरी सुझाव और प्रशासनिक सिफारिशें देने का निर्देश भी दिया है।
कमेटी का कार्यक्षेत्र और अध्ययन की प्रक्रिया
समिति का प्राथमिक कार्य छत्तीसगढ़ की वर्तमान कानूनी व्यवस्था का गहन अध्ययन करना है। इसके बाद, यह टीम विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण, गोद लेने की प्रक्रिया और परिवार से जुड़े अन्य नागरिक कानूनों पर एक समान कानून लागू करने की संभावनाओं का आकलन करेगी। अपनी कार्यप्रणाली के तहत, समिति निम्नलिखित कदम उठाएगी:
- प्रदेश के आम नागरिकों, विभिन्न सामाजिक संगठनों और कानून के विशेषज्ञों से सुझाव आमंत्रित करना।
- संबंधित सभी पक्षों के साथ विस्तृत चर्चा और विचार-विमर्श करना।
- उन राज्यों का दौरा और अध्ययन करना जहां पहले से ही समान नागरिक संहिता लागू है।
- सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद एक विस्तृत मसौदा या प्रारूप तैयार कर उसे राज्य सरकार के समक्ष प्रस्तुत करना।
सरकार का दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता को लागू करने की प्रक्रिया अब शुरू हो चुकी है और इसके लिए समिति अपना काम करेगी। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने इस संदर्भ में जानकारी देते हुए कहा कि रिपोर्ट तैयार करने से पहले समाज के हर वर्ग की राय ली जाएगी। सरकार का कहना है कि यह एक संवेदनशील विषय है, इसलिए सभी पक्षों के सुझावों को ध्यान में रखा जाएगा ताकि भविष्य में लिया गया निर्णय व्यापक हितों को सुरक्षित कर सके। इस पूरी कवायद का उद्देश्य राज्य में नागरिक कानूनों में एकरूपता लाना है, जिसे लेकर प्रदेश में अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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