जादवपुर यूनिवर्सिटी में आजादी के नारों पर भड़के सुवेंदु अधिकारी, कहा- क्या गांजा फूंकने की आजादी मांग रहे हो? राष्ट्रीय राजनीति 41 मिनट पहले 2
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने जादवपुर यूनिवर्सिटी में कथित देशविरोधी नारेबाजी और नशीले पदार्थों के सेवन को लेकर सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने यूनिवर्सिटी कैंपस में पूर्व छात्रों के अवैध कब्जे और विचारधारा के नाम पर चल रही गतिविधियों को खत्म करने का संकल्प लिया है।

जादवपुर यूनिवर्सिटी में बढ़ता राजनीतिक विवाद

पश्चिम बंगाल की राजनीति में जादवपुर यूनिवर्सिटी एक बार फिर से चर्चा का विषय बनी हुई है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर में कथित तौर पर लगाए जा रहे आजादी के नारों और देशविरोधी गतिविधियों को लेकर बेहद तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि पहले वामपंथी शासन और बाद में तृणमूल कांग्रेस के दौर में यूनिवर्सिटी कैंपस के भीतर एक ऐसी सोच को पनपने दिया गया, जो राष्ट्रहित के खिलाफ है।

रक्षा बंधन के एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जादवपुर यूनिवर्सिटी कभी अपनी शैक्षिक उत्कृष्टता के लिए जानी जाती थी, लेकिन वक्त के साथ यहां का माहौल बदल दिया गया। उन्होंने दावा किया कि कैंपस में राष्ट्रवादी कार्यक्रमों के खिलाफ एक सुनियोजित ढंग से माहौल तैयार किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप अब यहां देशविरोधी विचारधाराओं को पनाह मिल रही है।

आजादी के नारों पर मुख्यमंत्री का कड़ा सवाल

जादवपुर यूनिवर्सिटी में छात्रों द्वारा लगाए जा रहे आजादी के नारों पर सवाल उठाते हुए सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि आखिर ये छात्र किस तरह की आजादी की मांग कर रहे हैं। उन्होंने टिप्पणी की कि जब देश में शिक्षा, रोजगार और अन्य सामाजिक सुधारों से जुड़े गंभीर मुद्दे मौजूद हैं, तब कुछ खास समूह इन पर ध्यान देने के बजाय आजादी का शोर मचा रहे हैं। उन्होंने तीखे लहजे में पूछा कि क्या वे लोग गांजा और हेरोइन जैसे नशीले पदार्थों के सेवन की आजादी की मांग कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने छात्रों को धमकाने और रैली में जबरन शामिल करने के गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि छात्रों को हॉस्टल से जबरन निकालकर चे ग्वेरा के नाम पर आयोजित रैलियों में जाने के लिए मजबूर किया जाता है और जो छात्र इसमें शामिल नहीं होते, उन्हें भुगतने की धमकी दी जाती है।

आतंकवाद और ऑपरेशन सिंदूर का संदर्भ

सुवेंदु अधिकारी ने आतंकवाद के मुद्दे पर भी आजादी समर्थकों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जब आतंकवादी हमारे भारतीय सैनिकों पर हमला करते हैं या पहलगाम जैसी दर्दनाक घटनाएं होती हैं, तब ये समूह विरोध प्रदर्शन नहीं करते। उन्होंने दावा किया कि इन लोगों ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद ही शांति मार्च की शुरुआत की थी। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि कश्मीर मांगे आजादी जैसे नारे लगाने वालों को भारतीय सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए करारा जवाब दिया है।

किशनजी के महिमामंडन पर नाराजगी

जादवपुर यूनिवर्सिटी की दीवारों पर माओवादी नेता कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी के समर्थन में लिखे गए नारों पर भी मुख्यमंत्री ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि किशनजी वह व्यक्ति था जिसका भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में रत्ती भर भी विश्वास नहीं था। अधिकारी ने संकल्प लिया कि वे जादवपुर यूनिवर्सिटी कैंपस से इस तरह की विध्वंसक विचारधाराओं को जड़ से मिटाने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे।

हॉस्टल और ड्रग्स के खिलाफ सख्त रुख

विश्वविद्यालय की व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री ने दो टूक बात कही। उन्होंने कहा कि लंबे समय से चली आ रही पूर्व छात्रों के हॉस्टल पर कब्जे की परंपरा को अब समाप्त किया जाएगा। यह सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है कि जो छात्र अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके हैं, वे किसी भी स्थिति में हॉस्टल में बने न रहें। इसके साथ ही उन्होंने नशीले पदार्थों के सेवन को कैंपस से पूरी तरह खत्म करने की बात दोहराई। उन्होंने साफ किया कि शिक्षण संस्थान को ऐसी असामाजिक गतिविधियों से मुक्त करना उनकी सरकार का मुख्य लक्ष्य है।

राष्ट्रवादी लहर और भविष्य की राह

सुवेंदु अधिकारी ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में अब एक राष्ट्रवादी लहर चल पड़ी है और इसका असर जादवपुर यूनिवर्सिटी पर भी साफ तौर पर दिखेगा। उन्होंने दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी और हैदराबाद की उस्मानिया यूनिवर्सिटी का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां जिस तरह देशविरोधी ताकतों के खिलाफ कार्रवाई हुई है, उसी तर्ज पर जादवपुर यूनिवर्सिटी को भी इन तत्वों से आजाद कराया जाएगा। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राज्य में विचारधारा, कैंपस की स्वायत्तता और राष्ट्रवाद को लेकर नए राजनीतिक विवाद के कयास लगाए जा रहे हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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