नौकरी छोड़ शुरू किया अपना व्यवसाय: सुबह के 5 घंटों में ही बिक जाती हैं 300 से अधिक प्लेटें, जानिए रवि की सफलता की कहानी छत्तीसगढ़ एक घंटा पहले 3
रायपुर में रवि नाइक ने निजी कंपनी की सीमित वेतन वाली नौकरी छोड़कर दाल पकवान का स्टॉल शुरू किया। आज उनके स्वाद के दीवाने सुबह की भीड़ में घंटों कतार लगाकर नाश्ता करते हैं और वे लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बने हैं।

नौकरी की बंदिशें तोड़ रवि ने चुनी नई राह

आज के दौर में हर कोई ऐसी नौकरी की तलाश में है जो सुरक्षित हो और अच्छा वेतन दे सके, लेकिन रायपुर के रवि नाइक ने लीक से हटकर कदम उठाया। एक निजी कंपनी में कार्यरत रवि को वहां मिलने वाला 10 से 12 हजार रुपये का मासिक वेतन भविष्य के लिहाज से पर्याप्त नहीं लगा। अपने सपनों को उड़ान देने और स्वावलंबी बनने की जिद ने उन्हें नौकरी छोड़ने के लिए प्रेरित किया। आज उनका अपना नाश्ते का स्टॉल न केवल उन्हें पहचान दिला रहा है, बल्कि वे अपनी मेहनत के दम पर एक सफल उद्यमी के रूप में भी स्थापित हो चुके हैं।

जय स्तंभ चौक पर स्वाद की धूम

रायपुर के व्यस्त इलाके जय स्तंभ चौक पर रवि नाइक का नाश्ता स्टॉल किसी ब्रांड से कम नहीं है। सुबह होते ही यहां खाने वालों का तांता लग जाता है। रवि पिछले छह वर्षों से अपने स्टॉल के माध्यम से लोगों को स्वादिष्ट और गरमागरम नाश्ता परोस रहे हैं। उनके स्टॉल की सबसे बड़ी खासियत उनका दाल पकवान है। लोग दूर-दूर से इस स्वाद का आनंद लेने यहां पहुंचते हैं और कई नियमित ग्राहक तो ऐसे हैं जो बिना तकादा किए रोजाना यहीं नाश्ता करना पसंद करते हैं।

क्या है रवि के दाल पकवान का सीक्रेट

रवि के दाल पकवान के इतने लोकप्रिय होने के पीछे एक खास वजह है। वे बताते हैं कि पकवान को कुरकुरा और दाल को जायकेदार बनाने के लिए वे विशेष सामग्रियों का उपयोग करते हैं। इसमें हरी चटनी, इमली की चटनी और उनका बनाया हुआ सीक्रेट मसाला चार चांद लगा देता है। यह सीक्रेट मसाला ही उनके दाल पकवान को शहर के अन्य स्टॉल्स से बिल्कुल अलग और स्वादिष्ट बनाता है। ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने के लिए वे गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं करते, जो उनके स्टॉल को एक लोकप्रिय नाश्ता अड्डा बनाता है।

किफायती दाम और भरपूर स्वाद

रवि के स्टॉल की एक और खूबी यहां का किफायती दाम है। उनका मानना है कि स्वाद के साथ-साथ भोजन पेट भरने वाला भी होना चाहिए। उनके यहां दाल पकवान 60 रुपये प्रति प्लेट की दर से मिलता है, जो कि एक व्यक्ति का पेट भरने के लिए काफी है। इसके अलावा, उनके मेनू में पोहा और चना तरी भी शामिल है, जिसकी कीमत 20 रुपये प्रति प्लेट रखी गई है। यही कारण है कि आम आदमी से लेकर कामकाजी लोग तक सभी यहां बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।

पांच घंटे की मेहनत और शानदार कमाई

रवि के काम करने का तरीका और समय प्रबंधन भी सीखने लायक है। उनका स्टॉल केवल सुबह 5 बजे से 10 बजे तक ही संचालित होता है। इन महज पांच घंटों में ही वे ग्राहकों को सैकड़ों प्लेट नाश्ता परोस देते हैं। रवि के आंकड़ों के अनुसार, उनके स्टॉल पर रोजाना 200 से अधिक प्लेट पोहा और चना तरी बिक जाती है, जबकि दाल पकवान की भी रोजाना करीब 100 प्लेट की बिक्री आसानी से हो जाती है। यानी सुबह की शुरुआत में ही वे 300 से ज्यादा प्लेट नाश्ता बेचकर अपनी मेहनत को सफल कर लेते हैं।

बदलाव की प्रेरणादायक शुरुआत

रवि ने बताया कि उन्होंने दाल पकवान बनाने की कला अपने एक बड़े भाई से सीखी थी। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ खुद का व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत में ग्राहकों की संख्या सीमित थी, लेकिन जैसे-जैसे लोगों को उनके हाथ के स्वाद के बारे में पता चला, ग्राहकों की संख्या बढ़ती गई। आज रवि न केवल अपनी कमाई से खुश हैं, बल्कि वे एक ऐसे स्वावलंबी जीवन का नेतृत्व कर रहे हैं जहां वे खुद के मालिक हैं। उनकी यह कहानी उन युवाओं के लिए एक बड़ा उदाहरण है जो नौकरी के दबाव से बाहर निकलकर खुद का कुछ नया शुरू करना चाहते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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