पेपर लीक कानून पर संसद में गरजे ओवैसी, सरकार को दी चेतावनी भारत एक घंटा पहले 2
असदुद्दीन ओवैसी ने एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और युवाओं के भविष्य को लेकर चेतावनी दी।

सरकार को ओवैसी की तीखी चेतावनी

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को एंटी पेपर लीक बिल पर बहस के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सरकार को सचेत करते हुए कहा कि वे समय रहते संभल जाएं, वरना कुशासन की वजह से देश में ऐसे हालात पैदा हो सकते हैं जैसे पड़ोसी मुल्कों में देखने को मिले हैं। उन्होंने इस स्थिति को एक बड़ी मुसीबत को दावत देने वाला बताया। ओवैसी ने साफ लहजे में कहा कि यदि सरकार को लगता है कि वह देश के युवाओं से दूरी बनाकर और उनके हितों को नजरअंदाज करके लंबे समय तक शासन कर पाएगी, तो यह उनकी बहुत बड़ी गलतफहमी है।

साल 2024 में नीट का विवाद

बहस को आगे बढ़ाते हुए ओवैसी ने याद दिलाया कि वर्ष 2024 में नीट परीक्षा का पेपर लीक हुआ था। उस दौरान सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया, लेकिन आज तक उस समिति की रिपोर्ट के नतीजों का कोई पता नहीं चला है। उन्होंने कहा कि आज का युवा वर्ग पूरी तरह से हताश हो चुका है और उन्हें नौकरियों की कोई उम्मीद नजर नहीं आती। ओवैसी ने अपना समर्थन उन सभी युवाओं को दिया जिनकी मेहनत और भविष्य पेपर लीक जैसे घोटालों की भेंट चढ़ गए। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या कड़े कानूनों, सोशल मीडिया पर सेल्फी वीडियो बनाने, अधिकारियों के इस्तीफे लेने या स्पेशल टास्क फोर्स बनाने से उन छात्रों की जान वापस आ सकती है, जिन्होंने इस तनाव में आकर आत्महत्या कर ली?

सड़क बनाम संसद की बहस

ओवैसी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि नया कानून लाकर सरकार युवाओं को यह संदेश दे रही है कि जब तक वे सड़कों पर उतरकर विरोध नहीं करेंगे, तब तक सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देगी। उन्होंने चिंता जताई कि यदि आम जनता में यह धारणा घर कर गई कि केवल सड़कों पर उतरकर ही न्याय मिल सकता है, तो फिर संसद की उपयोगिता और महत्व पर सवाल खड़े होने लगेंगे। यह एक अत्यंत गंभीर मसला है जिस पर सरकार को विचार करना चाहिए।

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और अन्य प्रतिक्रियाएं

इससे पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के संदर्भ में ओवैसी ने इसे युवाओं के संघर्ष और न्याय की बड़ी जीत बताया था। उन्होंने कहा कि यह उन तमाम छात्रों की मेहनत का फल है जो भ्रष्टाचार के खिलाफ संविधान के दायरे में रहकर आवाज उठा रहे थे। वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी सरकार को घेरा और प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर कड़े सवाल किए। प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का काम किया है। उन्होंने दावा किया कि NTA के केंद्रीयकरण और शिक्षा बजट में निरंतर कटौती ने पूरी शिक्षण प्रणाली को उलझा कर रख दिया है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप