शराब और डीएमएफ घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, ढेबर-टुटेजा की 1400 करोड़ से ज्यादा संपत्ति कुर्क छत्तीसगढ़ 3 महीने पहले 49
छत्तीसगढ़ शराब और डीएमएफ घोटाले में ED ने अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा की 1400 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क कर ली है, जबकि चार घोटालों से करीब 4000 करोड़ रुपये की अवैध कमाई का आरोप है।

छत्तीसगढ़ की सियासत और प्रशासनिक तंत्र को झकझोर देने वाला शराब-डीएमएफ घोटाला अब और बड़े खुलासों की ओर बढ़ता दिख रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा ने कारोबारी अनवर ढेबर और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा पर शिकंजा कसते हुए उनकी तथा उनसे जुड़े लोगों की 1400 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्तियां कुर्क कर ली हैं।

जांच एजेंसियों का आरोप है कि कांग्रेस शासनकाल के दौरान सक्रिय इस सिंडिकेट ने चार बड़े घोटालों के जरिए करीब 4000 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा शराब घोटाले का बताया गया है, जिसमें सरकारी दुकानों के माध्यम से कच्ची शराब बेचकर 3200 करोड़ रुपये से अधिक का काला धन जुटाया गया। ढेबर और टुटेजा को इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड माना जा रहा है।

ED की पड़ताल में सामने आया कि सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया गया, कमीशन वसूला गया और नकली होलोग्राम का इस्तेमाल हुआ। इसके अलावा प्लेसमेंट एजेंसी ओवरटाइम और कस्टम मिलिंग जैसे कई घोटालों के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई। अब जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है और कई और लोगों की भूमिका सामने आने की संभावना है।

ED का शिकंजा और सिंडिकेट पर बड़ी कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय ने पीएमएलए के तहत दोनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस मामले में अब तक 85 लोगों को आरोपी बनाया जा चुका है। जांच एजेंसियां पूरे सिंडिकेट की गहराई तक पहुंचने में जुटी हैं और संपत्ति कुर्की के बाद विशेष अदालत में सुनवाई तेज होने के आसार हैं।

1400 करोड़ की संपत्ति का ब्योरा

ED ने अब तक कुल 1400 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां जब्त की हैं। इनमें बेनामी संपत्तियां, प्लॉट, शेल कंपनियां, होटल, बैंक खाते, शेयर और फिक्स्ड डिपॉजिट शामिल हैं।

चार घोटालों का जाल और 4000 करोड़ की कमाई

जांच के मुताबिक अकेले शराब घोटाले में 3200 करोड़ रुपये से ज्यादा का काला धन कमाया गया। इसके साथ ही डीएमएफ फंड में 25-40% कमीशन, नकली होलोग्राम, प्लेसमेंट एजेंसी ओवरटाइम (183 करोड़) और कस्टम मिलिंग में गड़बड़ियां उजागर हुई हैं। टुटेजा और ढेबर को इस पूरे खेल का नीति निर्धारक और संचालक बताया गया है।

कौन हैं मास्टरमाइंड

रिटायर्ड आईएएस अनिल टुटेजा और कारोबारी अनवर ढेबर को इस पूरे नेटवर्क का केंद्र माना जा रहा है। जांच में पद के दुरुपयोग, अवैध टेंडर और सरकारी आबकारी व्यवस्था में हेराफेरी के सबूत मिले हैं। दोनों पर मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप लगे हैं।

भ्रष्टाचार का जाल और बढ़ता दायरा

ED अब सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों, ठेकेदारों और अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है। 2019 से 2023 के बीच की अवधि में आबकारी विभाग में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पाई गई हैं। यह मामला छत्तीसगढ़ में व्यापक स्तर पर फैले भ्रष्टाचार की पोल खोल रहा है।

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के घोटाले न सिर्फ सरकारी खजाने को चोट पहुंचाते हैं, बल्कि विकास कार्यों को भी प्रभावित करते हैं। डीएमएफ फंड आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए तय था, लेकिन उसका दुरुपयोग किया गया। माना जा रहा है कि कुर्क की गई संपत्तियां आगे की सरकारी कार्रवाई में उपयोगी साबित हो सकती हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप