पंजाब
5 घंटे पहले
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विचारों
पंजाब में हड्डियों, जोड़ों और दुर्घटनाओं से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में लगातार इजाफा दर्ज किया जा रहा है। ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के आंकड़े बताते हैं कि ऑर्थोपेडिक इलाज अब राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का एक अहम हिस्सा बन चुका है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक, इस योजना के अंतर्गत अब तक हड्डी, जोड़ और ट्रॉमा से संबंधित उपचारों पर ₹84 करोड़ से अधिक की राशि खर्च की जा चुकी है। यह आंकड़ा सर्जरी की बढ़ती जरूरत और सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ ऑर्थोपेडिक सेवाओं तक बढ़ती पहुंच की ओर इशारा करता है।
45 लाख से अधिक लोगों ने कराया पंजीकरण
आंकड़ों के अनुसार योजना के तहत सबसे ज्यादा घुटना प्रत्यारोपण (नी रिप्लेसमेंट) किए गए हैं। इसके बाद कूल्हे की सर्जरी तथा प्लेट, नेल्स और अन्य इम्प्लांट्स की मदद से फ्रैक्चर फिक्सेशन के मामले बड़ी संख्या में दर्ज हुए हैं। ये सभी प्रक्रियाएं अब जिला और बड़े सरकारी अस्पतालों में कैशलेस इलाज के रूप में नियमित तौर पर की जा रही हैं। मुख्यमंत्री सेहत योजना के अंतर्गत पंजाब में अब तक 45 लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं, जो कैशलेस स्वास्थ्य सुविधाओं के व्यापक उपयोग को दर्शाता है। लुधियाना जिले में 4.8 लाख से अधिक तथा पटियाला में करीब 4.1 लाख लाभार्थी इस योजना के तहत पंजीकृत किए गए हैं।
लगातार बढ़ रही मरीजों की तादाद
ऑर्थोपेडिक मामलों में होती वृद्धि जनस्वास्थ्य में आ रहे बड़े बदलावों को भी सामने ला रही है। खासकर बढ़ती उम्र की आबादी में जोड़ों के घिसने, लगातार बने रहने वाले दर्द और चलने-फिरने में परेशानी जैसी शिकायतें ज्यादा देखी जा रही हैं। सरकारी अस्पतालों में घुटनों और कूल्हों की खराबी, पुराने जोड़ दर्द तथा चलने-फिरने में दिक्कत वाले मरीजों की संख्या निरंतर बढ़ रही है।
गुलशन तनेजा को मिली राहत
ऑर्थोपेडिक इलाज में अक्सर महंगे इम्प्लांट्स, लंबा उपचार और पुनर्वास की जरूरत पड़ती है, जो परिवारों पर पारंपरिक रूप से भारी आर्थिक बोझ डालते रहे हैं। राजपुरा के निकट खेड़ा गज्जू निवासी 43 वर्षीय गुलशन तनेजा के लिए यह स्थिति बेहद कठिन साबित हुई। फैक्ट्री में काम करने के दौरान तनेजा एक हादसे का शिकार हो गए, जिसके बाद उनके लिए चलना मुश्किल होता चला गया। अचानक उठने वाला दर्द उन्हें बीच रास्ते में रोक देता और दीवार का सहारा लेने पर मजबूर कर देता था। घुटने के आसपास लगातार सूजन बनी रहती और जकड़न ने रोजमर्रा के साधारण कामों को भी मुश्किल बना दिया था। कई बार खड़े होने से पहले उन्हें रुककर यह सोचना पड़ता कि उनका पैर शरीर का भार सह पाएगा या नहीं।
उन्हें 6 मई को राजिंदरा अस्पताल, पटियाला में भर्ती कराया गया और अगले दिन उनके लिगामेंट टियर का इलाज किया गया। डॉक्टरों ने गंभीर जोड़ दर्द, सूजन, अस्थिरता और वजन सहने में दिक्कत जैसे लक्षण दर्ज किए। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत उन्हें ₹86,750 का पूरा इलाज पूरी तरह कैशलेस उपलब्ध कराया गया। 12 मई को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वे बिना किसी भारी मेडिकल बिल की चिंता के घर लौटे, जो उनकी बीमारी के बोझ को और बढ़ा सकता था।
गुलशन तनेजा ने कहा, “मैं अब धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहा हूं। सेहत कार्ड का शुक्रिया कि मुझे अपने इलाज के लिए कोई पैसा नहीं देना पड़ा। यह योजना हमारे जैसे परिवारों की जेब से होने वाले खर्च को कम कर रही है और महंगे इलाज को सबके लिए सुलभ बना रही है।”
बड़े बदलाव का संकेत: स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह
इस विषय पर पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “ऑर्थोपेडिक बीमारियों का बोझ लगातार और तेजी से बढ़ रहा है, जिसके चलते पंजाब में सुलभ और किफायती सर्जिकल देखभाल को और मजबूत करने की जरूरत सामने आई है।” उन्होंने आगे बताया कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत सरकार हजारों मरीजों को कैशलेस घुटना, कूल्हा और ट्रॉमा उपचार मुहैया करा रही है, जिससे आर्थिक बोझ कम हो रहा है और मरीजों की गतिशीलता, रिकवरी तथा जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो रही है। उन्होंने कहा कि महज चार महीनों में ₹84 करोड़ से अधिक का खर्च केवल बढ़ते स्वास्थ्य उपयोग को ही नहीं दर्शाता, बल्कि यह राज्य में गतिशीलता बहाल करने, विकलांगता घटाने और मरीजों के जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में एक बड़े बदलाव का संकेत भी है।
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