बरसात के मौसम में पशुओं की सेहत का ऐसे रखें ख्याल, थनेला रोग से बचाना है बेहद जरूरी बिहार एक घंटा पहले 2
मानसून के दौरान पशुपालन में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि किस तरह डेयरी और दुधारू पशुओं को बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सकता है।

पशुपालन और आजीविका का महत्व

भारत में कृषि के साथ-साथ पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मुख्य कड़ी के रूप में स्थापित है। गांव-देहात के लगभग हर परिवार में गाय और भैंस पालने की परंपरा रही है। समय के साथ पशुपालन के प्रति लोगों का रुझान काफी तेजी से बढ़ा है और अब यह छोटे स्तर से निकलकर बड़े व्यावसायिक रूप में सामने आ रहा है।

डेयरी व्यवसाय में बढ़ता रुझान

आज के दौर में कई लोग सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर बड़े पैमाने पर गौ पालन और भैंस पालन कर रहे हैं। इस व्यवसाय से जुड़े लोग केवल दूध ही नहीं बेचते, बल्कि पनीर, खोया, दही, घी और छाछ जैसे उत्पादों का निर्माण कर अपनी कमाई का दायरा बढ़ा रहे हैं। डेयरी का क्षेत्र अब लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है और बड़ी संख्या में युवा इस पेशे में अपना भविष्य तलाश रहे हैं।

बरसात में पशुओं की सुरक्षा के उपाय

बरसात के दिनों में पशुओं के स्वास्थ्य पर अतिरिक्त ध्यान देना अनिवार्य हो जाता है। इन दिनों थनेला रोग का खतरा काफी बढ़ जाता है। पशुपालकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने पशुओं के आवास को पूरी तरह सूखा और साफ रखें। दूध निकालने से पहले और बाद में थनों की स्वच्छता का विशेष ख्याल रखें ताकि संक्रमण से बचा जा सके। समय पर टीकाकरण और संतुलित आहार ही पशुओं को इस मौसम में होने वाली बीमारियों से सुरक्षित रख सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप