ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध का बिगुल? होर्मुज के पास अमेरिकी विमानों का जमावड़ा और इराक-यमन में धमाकों से दहली दुनिया विश्व 8 घंटे पहले 6
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है, जहां फारस की खाड़ी के पास अमेरिकी सैन्य गतिविधियों में अचानक तेजी आई है और इराक-यमन में धमाके सुने गए हैं। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते इस गतिरोध ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर एक गंभीर खतरा पैदा कर दिया है।

पश्चिम एशिया में गहराता युद्ध का संकट

क्या पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष अब अपने निर्णायक और सबसे विनाशकारी चरण में प्रवेश कर चुका है? यह सवाल इस समय अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में सबसे चर्चा का विषय बना हुआ है। अमेरिका द्वारा ईरान और यमन के खिलाफ किसी बड़े सैन्य हमले की तैयारी की खबरें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बनी हुई हैं। घटनाक्रम की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 20 सितंबर 2026, रविवार को ब्रिटेन से उड़ान भरकर अमेरिकी B-1B लांसर बॉम्बर जेट ने अपनी तैनाती सुनिश्चित की है। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास फारस की खाड़ी में कम से कम 7 अमेरिकी एरियल रीफ्यूलिंग टैंकर देखे जाने का दावा किया जा रहा है, जो किसी बड़े हवाई ऑपरेशन के संकेत माने जा रहे हैं।

होर्मुज की घेराबंदी और वैश्विक ऊर्जा का संकट

दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माने जाने वाले पश्चिम एशिया में हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर सैन्य हमले किए जाने के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली तेल और गैस की आपूर्ति लगभग पूरी तरह ठप हो चुकी है। इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। जब दुनिया भर के देशों ने लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाले बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य की ओर रुख किया, तो वहां भी हूती विद्रोहियों ने अपने हमलों से आग लगा दी है। सऊदी अरब की 1200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हुए हमले ने तो रही-सही कसर भी पूरी कर दी। इस पाइपलाइन के जरिए दुनिया भर की जरूरतों का 5 प्रतिशत तेल सप्लाई किया जाता था, जिसे गंभीर नुकसान के बाद सऊदी अरब को तुरंत बंद करना पड़ा। इसके बाद हूती विद्रोहियों ने जब सऊदी के हवाई अड्डे को अपना निशाना बनाया, तो अमेरिका का रुख और अधिक आक्रामक हो गया है।

अमेरिका का अल्टीमेटम और ईरान की जवाबी कार्रवाई

इन तमाम तनावपूर्ण घटनाक्रमों के बीच ईरान ने युद्ध को समाप्त करने के लिए वॉशिंगटन के सामने 7 शर्तें रखी थीं, लेकिन लगता है कि अमेरिका ने अब बातचीत के बजाय सीधे प्रहार करने का फैसला कर लिया है। ब्रिटिश हवाई अड्डों से अमेरिकी बॉम्बर जेट की उड़ान के बाद अब फारस की खाड़ी में अमेरिकी एयरफोर्स के कम से कम 7 एरियल रीफ्यूलिंग टैंकर्स की मौजूदगी यह दर्शाती है कि युद्ध की रणनीति तैयार है। ये टैंकर हवा में ही लड़ाकू विमानों को ईंधन देने में सक्षम हैं, जिससे लंबी दूरी के हवाई हमले आसान हो जाते हैं। साथ ही, अमेरिकी नौसेना का MQ-4C ट्राइटन निगरानी ड्रोन भी इस क्षेत्र की टोह ले रहा है। ईरानी सरकारी टेलीविजन ने भी बंदर अब्बास के ऊपर अज्ञात लड़ाकू विमानों के देखे जाने का दावा किया है। यद्यपि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन ईरान ने पहले ही चेतावनी दे दी है कि यदि कोई नया हमला हुआ, तो वे क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी ठिकानों को अपना लक्ष्य बनाएंगे।

इराक और यमन में मची हलचल

क्षेत्रीय अशांति का दायरा केवल फारस की खाड़ी तक ही सीमित नहीं है। इराक के इरबिल हवाई अड्डे के पास भी भीषण धमाकों की आवाज सुनी गई है। इरबिल में अमेरिकी सेना का ठिकाना भी स्थित है, जिसके चलते इस हमले को अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन हमलों के पीछे किसका हाथ है और इससे कितना नुकसान हुआ है। वहीं, यमन की राजधानी सना में भी कई शक्तिशाली विस्फोटों की खबर सामने आई है। जानकारों का मानना है कि सना में ये हमले संभवतः सऊदी अरब की ओर से अंसारल्ला (हूती) के खिलाफ की गई जवाबी कार्रवाई हो सकते हैं, क्योंकि दो दिन पहले ही हूतियों ने रियाद के किंग खालिद हवाई अड्डे पर हमला किया था।

होर्मुज जलडमरूमध्य: दुनिया के लिए चिंता का केंद्र

होर्मुज जलडमरूमध्य का सामरिक महत्व इतना अधिक है कि यहां की थोड़ी सी भी अस्थिरता पूरी दुनिया की कमर तोड़ सकती है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। यदि यहां सैन्य गतिविधियों के कारण जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो कच्चे तेल, डीजल, परिवहन और रोजमर्रा की खाद्य वस्तुओं की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। अमेरिका द्वारा जिस तरह से अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया जा रहा है, वह संकेत देता है कि आने वाले दिन बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। खतम-अल-अनबिया सेंट्रल कमांड जैसी ईरानी सैन्य शाखाओं ने भी अपनी तत्परता बढ़ा दी है और अमेरिका को स्पष्ट चेतावनी जारी कर दी है।

निष्कर्ष: क्या हम विश्व युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं?

फिलहाल पश्चिम एशिया में स्थिति बेहद विस्फोटक बनी हुई है। अमेरिका, ईरान, हूती विद्रोही और सऊदी अरब जैसे खिलाड़ी जिस तरह से एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए हैं, उससे युद्ध के और व्यापक होने की आशंका प्रबल हो गई है। इराक में विस्फोटों की आवाज और होर्मुज के आसमान में अमेरिकी टैंकरों की गड़गड़ाहट एक बड़े तूफान के आने की आहट है। भले ही अभी तक किसी भी पक्ष ने पूर्ण युद्ध की घोषणा नहीं की है, लेकिन जिस तरह की सैन्य तैयारियां की जा रही हैं, उससे स्पष्ट है कि कूटनीति के रास्ते अब लगभग बंद हो चुके हैं। आने वाला समय न केवल पश्चिम एशिया के लिए, बल्कि पूरी दुनिया की शांति और आर्थिक स्थिरता के लिए निर्णायक साबित होगा।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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