हरतालिका तीज विशेष: व्रत में गणेश जी की कथा सुनना क्यों है जरूरी, जानें इसका महत्व धर्म एक घंटा पहले 6
हरतालिका तीज के दिन शिव-पार्वती की पूजा के साथ भगवान गणेश की पौराणिक कथा सुनने का विशेष महत्व है, जिसे सुनने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

हरतालिका तीज और गणेश कथा की परंपरा

हरतालिका तीज का पर्व महिलाओं के लिए अत्यंत पावन माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के दौरान तीज की कथा का श्रवण करना अनिवार्य होता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस दिन भगवान गणेश की कथा का पाठ करना भी उतना ही आवश्यक और शुभ फलदायी माना गया है। लोक धारणा है कि गणेश जी की इस कथा को सुनने से भक्त को अपने द्वारा किए गए व्रत और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है और उनके सभी विघ्न दूर हो जाते हैं।

गणेश जी की चमत्कारी कहानी

प्राचीन काल की बात है, एक गांव में एक वृद्ध महिला रहती थी। वह अत्यंत धर्मपरायण थी और प्रतिदिन मिट्टी से भगवान गणेश की प्रतिमा बनाकर उनकी भक्ति में लीन रहती थी। हालांकि, कच्ची मिट्टी की प्रतिमा होने के कारण वह अधिक समय तक सुरक्षित नहीं रह पाती थी और उसे हर दिन नई मूर्ति बनानी पड़ती थी। उस महिला की हार्दिक इच्छा थी कि उसके पास एक पत्थर की स्थाई प्रतिमा हो। उसी समय उसके घर के समीप एक सेठ अपना भव्य मकान बनवा रहा था।

वृद्धा ने निर्माण कार्य कर रहे कारीगरों से आग्रह किया कि वे उसके लिए पत्थर के गणेश बना दें। मिस्त्रियों ने यह कहकर मना कर दिया कि उनके पास इतना समय नहीं है और दीवार बनाने का काम प्राथमिकता पर है। इस पर वृद्धा ने हताशा में कहा कि यदि वे उसका काम नहीं करेंगे, तो उनकी दीवार कभी सीधी नहीं बन पाएगी। इसके बाद चमत्कार हुआ और कारीगरों की दीवार बार-बार टेढ़ी होने लगी। दिन भर की मशक्कत के बावजूद दीवार सीधी नहीं हुई।

संध्या के समय जब सेठ वहां पहुंचे, तो दीवार न बनी देख अत्यंत क्रोधित हुए। मिस्त्रियों ने पूरी घटना बताई और कहा कि यह सब उस वृद्धा के श्राप के कारण हो रहा है। सेठ ने तुरंत महिला को बुलवाया और अपनी गलती मानते हुए कहा कि वे उसे सोने के गणेश बनवा कर देंगे। सेठ ने अपना वचन पूरा किया और वृद्धा को सोने की गणेश प्रतिमा भेंट की, जिसके उपरांत दीवार भी सीधी बन गई। मान्यता है कि जो भी भक्त इस कथा का श्रवण करता है, भगवान गणेश उसकी सभी उलझनें सुलझा देते हैं।

हरतालिका तीज 2026 पूजा का समय

हरतालिका तीज के पर्व पर पूजा के लिए शुभ समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए। वर्ष 2026 में प्रदोष काल पूजा का मुहूर्त शाम 5:54 बजे से शुरू होकर रात 8:22 बजे तक रहेगा। इस निर्धारित समय अंतराल में महिलाओं को शिव-पार्वती की विशेष पूजा करनी चाहिए और गणेश जी की इस प्रेरणादायक कथा को अवश्य सुनना चाहिए।

प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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