सफेदा, पॉपुलर और महोगनी समेत ये 5 पेड़ बना सकते हैं किसानों को मालामाल भारत एक घंटा पहले 2
मुरादाबाद की उपजाऊ जलोढ़ और दोमट मिट्टी कृषि वानिकी के लिए बेहद उपयुक्त है, जहां किसान सफेदा, पॉपुलर, शीशम, महोगनी और बांस की खेती कर कम लागत में लाखों से करोड़ों तक का मुनाफा कमा सकते हैं।

मुरादाबाद की उपजाऊ जलोढ़ और दोमट मिट्टी को कृषि वानिकी यानी एग्रोफॉरेस्ट्री के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है। यहां के किसान सफेदा, पॉपुलर, शीशम, महोगनी और बांस जैसे पेड़ों की खेती करके कम लागत और कम देखभाल में लाखों रुपये का मुनाफा कमा सकते हैं। इन पेड़ों की बाजार में लगातार मांग बनी रहती है और कई फसलों पर सरकार की ओर से सब्सिडी का लाभ भी मिलता है। लंबी अवधि की स्थिर आय और कम देखभाल की वजह से ये विकल्प किसानों के लिए आकर्षक साबित हो रहे हैं।

सफेदा: तेजी से बढ़ने वाला फायदेमंद विकल्प

अगर मुरादाबाद के किसान बागवानी से अच्छी कमाई करना चाहते हैं तो सफेदा यानी यूकेलिप्टस की खेती एक बेहतरीन विकल्प है। यह पेड़ बहुत तेजी से बढ़ता है और महज 4-5 साल में काटने लायक हो जाता है। सफेदा कम पानी में भी पनप जाता है और बंजर जमीन पर भी अच्छी पैदावार देता है। इसकी लकड़ी का इस्तेमाल प्लाईवुड, फर्नीचर, पेपर इंडस्ट्री और ईंधन में खूब होता है, जिससे बाजार में इसकी डिमांड हमेशा बनी रहती है।

इस फसल की खासियत यह है कि इसमें लागत और देखभाल कम लगती है, रोग भी कम लगते हैं और एक बार लगाने के बाद कई बार कटाई हो सकती है। एक एकड़ से 4-5 साल में 3-4 लाख रुपये तक की कमाई संभव है। सरकार भी इसकी खेती पर सब्सिडी देती है, इसलिए सफेदा किसानों को कम समय में अच्छा मुनाफा देने वाली फसल साबित होती है।

पॉपुलर: साल भर रहती है मांग

मुरादाबाद के किसान पॉपुलर यानी पॉप्लर की खेती करके भी कम समय में अच्छी कमाई कर सकते हैं। यह तेजी से बढ़ने वाला पेड़ है जो 5-6 साल में पूरी तरह कटाई के लिए तैयार हो जाता है। इसकी लकड़ी प्लाईवुड, माचिस, पेपर मिल, पैकिंग बॉक्स और फर्नीचर इंडस्ट्री में खूब काम आती है, इसलिए मंडियों में इसकी मांग सालभर बनी रहती है। एक एकड़ खेत में 4x4 मीटर की दूरी पर करीब 400-500 पौधे लगाए जाते हैं। पौधे, खाद, सिंचाई और मजदूरी मिलाकर 5-6 साल में कुल खर्च 50-70 हजार रुपये तक आता है।

6 साल बाद एक पेड़ का वजन 3-4 क्विंटल हो जाता है और भाव 1500-2000 रुपये प्रति पेड़ तक मिल जाता है। इस हिसाब से एक एकड़ से 6-8 लाख रुपये तक की शुद्ध कमाई हो जाती है। पॉपुलर को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं पड़ती और इसमें रोग व कीट भी कम लगते हैं। किसान इसे खेत की मेड़ पर या पूरे खेत में लगा सकते हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि शुरुआती 2-3 साल तक पेड़ों के बीच गेहूं, गन्ना, हल्दी और सरसों जैसी फसलें आसानी से ली जा सकती हैं, जिससे अतिरिक्त आमदनी होती रहती है।

शीशम: लंबी अवधि का मुनाफेदार निवेश

शीशम यानी टाली की लकड़ी बहुत कीमती और टिकाऊ होती है। फर्नीचर, दरवाजे और प्लाईवुड में इसकी भारी मांग रहती है। एक एकड़ में 3x3 मीटर की दूरी पर 450-500 पौधे लगते हैं। पौधे, खाद और सिंचाई मिलाकर 10 साल में कुल खर्च 80 हजार से 1 लाख रुपये तक आता है। शीशम का पेड़ 10-12 साल में तैयार होता है और एक पेड़ 15-25 हजार रुपये तक बिक जाता है।

इस तरह एक एकड़ से 10-12 साल बाद 60-80 लाख रुपये तक की कमाई हो सकती है। इस पेड़ को कम पानी चाहिए, यह सूखा सह लेता है और इसमें रोग भी कम लगते हैं। यह लंबी अवधि का निवेश जरूर है, लेकिन मुनाफा बहुत ज्यादा है। सरकार पौधे और सब्सिडी भी मुहैया कराती है।

महोगनी: करोड़ों की कमाई का जरिया

महोगनी की लकड़ी बहुत महंगी और मजबूत होती है। फर्नीचर, जहाज और प्लाईवुड में इसकी भारी मांग है। एक एकड़ में 10x10 फीट की दूरी पर करीब 400 पौधे लगते हैं। पौधे, खाद और सिंचाई मिलाकर 12 साल में कुल खर्च 1.5-2 लाख रुपये आता है। यह पेड़ 10-12 साल में कटाई लायक हो जाता है और 12 साल बाद एक पेड़ 30-40 हजार रुपये तक बिकता है।

इस तरह एक एकड़ से 1-1.5 करोड़ रुपये तक की कमाई हो सकती है। इसे कम पानी की जरूरत होती है, रोग कम लगते हैं और देखभाल भी आसान है। यह लंबी अवधि का निवेश है, लेकिन इसका रिटर्न बहुत ज्यादा है। सरकार इस पर सब्सिडी भी देती है।

बांस: एक बार लगाओ, 40 साल तक कमाओ

मुरादाबाद के किसान बांस की खेती से भी अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। एक एकड़ में 5x4 मीटर की दूरी पर 500 पौधे लगते हैं। बांस 3-4 साल में पहली कटाई लायक हो जाता है और इसके बाद हर साल कटाई होती रहती है। पौधे, खाद और सिंचाई मिलाकर शुरुआती लागत 40-50 हजार रुपये आती है। चौथे साल से हर साल 1.5-2 लाख रुपये की कमाई शुरू हो जाती है और 10 साल में 15-20 लाख रुपये तक कमाए जा सकते हैं।

बांस को कम पानी चाहिए और यह बंजर जमीन पर भी आसानी से उग जाता है। फर्नीचर, कागज, अगरबत्ती और निर्माण कार्यों में इसकी मांग बनी रहती है। सरकार इस पर 50% सब्सिडी देती है। सबसे बड़ी बात यह है कि एक बार लगाने पर इससे 40 साल तक कमाई होती रहती है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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