बिहार
एक घंटा पहले
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विचारों
हमारे देश में खेती-बाड़ी की परंपरा सदियों पुरानी है। आज भी बड़ी संख्या में किसान पारंपरिक तरीकों से खेती कर अपना जीवन-यापन कर रहे हैं। हालांकि समय के साथ खेती के तौर-तरीकों में बदलाव आया है और इसके नतीजे भी सामने आ रहे हैं। बदले हुए कृषि पैटर्न की वजह से अब कई फसलें बेहद कम समय में तैयार हो रही हैं और एक ही खेत में अलग-अलग किस्म की फसलें भी उगाई जा रही हैं। बिहार के किसान भी इस दिशा में लगातार नए प्रयोग कर रहे हैं।
14 साल से खेती से जुड़े हैं अवधेश प्रसाद
नालंदा जिले के इस्लामपुर प्रखंड के किसान अवधेश प्रसाद बीते 14 साल से खेती के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे कुछ न कुछ नया आजमाते रहते हैं। फिलहाल वे इस्लामपुर स्थित मगही पान अनुसंधान केंद्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जहां उन्होंने नई-नई तकनीकें सीखीं। अब वे खुद भी तरह-तरह के प्रयोग करने लगे हैं। इसी क्रम में उन्होंने नींबू के पेड़ से ग्राफ्टिंग के जरिए एक नया पौधा तैयार किया है।
एक पौधे से तैयार हो रहा नया पौधा
अवधेश प्रसाद ने बताया कि वे 14 साल से इस कृषि केंद्र पर काम कर रहे हैं। यहां वे बहुत कुछ सीखते हैं और बाद में उसे खुद आजमाते भी हैं। इसी कड़ी में वे नींबू के पौधों की टहनियां काटकर और नई टहनी लगाकर नया पौधा तैयार कर रहे हैं। उनके मुताबिक यह बहुत आसान प्रक्रिया है, लेकिन पहले इसकी जानकारी नहीं थी; किसी और ने यह तरीका सिखाया। जब उन्होंने इसे आजमाया तो अब सफलतापूर्वक नए पौधे तैयार कर रहे हैं। फिलहाल कागजी नींबू में फलन हो रहा है।
ग्राफ्टिंग की पूरी प्रक्रिया
उन्होंने बताया कि बरसात के मौसम में जब टहनी से नई कलियां निकलती हैं तो वे काफी नाजुक होती हैं। इसी दौरान उस टहनी को चाकू की मदद से काट दिया जाता है। इसके बाद उसी जगह एक छोटी-सी नई टहनी लगा दी जाती है। फिर उस पर मिट्टी रखकर प्लास्टिक से लपेटकर बांध दिया जाता है। इस तरह नया पौधा आकार लेने लगता है।
महंगे दाम पर बिकता है यह पौधा
किसान ने बताया कि इस तरीके से पौधा तैयार करने का मकसद यह है कि नया पौधा जल्दी तैयार हो और जल्दी फल देना भी शुरू कर दे। सामान्य तरीके से पौधा उगाने में काफी समय लगता है, जबकि इस विधि से तैयार पौधा सिर्फ 6 महीने में ही फल देना शुरू कर देता है। साथ ही ऐसे पौधे की कीमत भी बाजार में ज्यादा मिलती है। यही वजह है कि वे इस तरह के प्रयोग लगातार करते रहते हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल वे कागजी नींबू के कई पेड़ों पर इसी तरह का प्रयोग कर रहे हैं, जिससे उन्हें अच्छा-खासा फायदा हो रहा है।
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