बिहार
एक घंटा पहले
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विचारों
खेती में नया प्रयोग
बिहार के सीतामढ़ी जिले के रुन्नीसैदपुर में किसान Umesh Yadav ने बांस की विशेष किस्मों की खेती शुरू की है। यहाँ मुख्य रूप से पिंक बांस, पीला बांस और बेत वाले बांस की पैदावार की जा रही है। इन प्रजातियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें गांठें या कांटे बहुत कम होते हैं। इनसे तैयार फर्नीचर इतना चमकदार होता है कि उसे अलग से पॉलिश या रंग लगाने की जरूरत नहीं पड़ती है।
फर्नीचर कारोबार में डिमांड
विशेषकर बेत वाला बांस फर्नीचर उद्योग के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहा है। इसकी खासियत यह है कि इसे गर्म पानी में डालकर आसानी से किसी भी आकार में मोड़ा जा सकता है। इसी वजह से इसका उपयोग मुख्य रूप से निम्नलिखित चीजें बनाने में हो रहा है:
- आकर्षक कुर्सियां
- सोफा सेट
- टेबल
- टोकरा और डालिया जैसी घरेलू सामग्री
कम लागत और खेती का खर्च
लोगों को अक्सर लगता है कि ऐसी किस्मों को उगाना महंगा होगा, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। उमेश यादव के अनुसार, इन बांस की खेती में होने वाला खर्च सामान्य बांस की खेती जैसा ही है। इसके लिए किसी अतिरिक्त बड़े निवेश या बहुत अधिक देखभाल की आवश्यकता नहीं होती है। किसान कम लागत में ही इस कीमती फसल को तैयार कर सकते हैं।
आधुनिक मशीनों की दरकार
वर्तमान में नई तकनीक और मशीनों की कमी के कारण यह काम केवल स्थानीय बाजारों तक ही सीमित है। अभी यह बांस स्थानीय स्तर पर 125 से 150 रुपये प्रति बांस की दर से बिक रहा है। यदि सरकार की मदद से यहां आधुनिक प्रोसेसिंग मशीनें उपलब्ध हो जाएं, तो चीन की तर्ज पर यहाँ विश्वस्तरीय फर्नीचर का निर्माण किया जा सकता है। मशीनों के आने से उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ेगी, जिससे किसानों को बेहतर मुनाफा मिल सकेगा और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
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