एक करोड़ का फंड और SIP का गणित: म्यूचुअल फंड निवेशक जरूर समझें यह फॉर्मूला व्यापार 13 घंटे पहले 3
हर महीने कितनी SIP से बनेगा एक करोड़ रुपये का फंड, यह पूरी तरह निवेश की अवधि पर निर्भर करता है। 12 फीसदी सालाना औसत रिटर्न मानें तो 5 साल और 25 साल की SIP रकम में जमीन-आसमान का अंतर है।

मौजूदा दौर में लगभग हर व्यक्ति की ख्वाहिश होती है कि उसके पास कम से कम एक करोड़ रुपये की पूंजी जरूर हो। ज्यादातर लोग यह मान बैठते हैं कि इतनी बड़ी रकम जोड़ने के लिए किसी जादुई स्कीम की तलाश करनी होगी या बहुत ऊंचा रिटर्न देने वाला कोई रास्ता ढूंढना होगा। हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। दरअसल दौलत बनाने का असली राज किसी खास योजना में नहीं, बल्कि समय में छिपा हुआ है।

समय ही है असली ताकत

आप अपने निवेश को जितना अधिक समय देंगे, आपका पैसा उतनी ही रफ्तार से बढ़ता जाएगा। इसके उलट, निवेश शुरू करने में जितनी देरी करेंगे, हर महीने जेब से उतनी ही ज्यादा रकम निकालनी पड़ेगी। बात सीधी-सी है—अगर आप अवधि बढ़ा दें, तो ब्याज पर मिलने वाला ब्याज यानी कंपाउंडिंग आपके लिए सारा भारी काम खुद ही कर देगा।

अगर यह मानकर चलें कि हर साल औसतन 12 फीसदी का रिटर्न मिलेगा, तो एक करोड़ रुपये का फंड बनाने के लिए अलग-अलग अवधि में आपको पूरी तरह अलग रकम लगानी पड़ेगी।

कितनी अवधि में कितनी SIP जरूरी

अगर आपका मकसद महज 5 साल में एक करोड़ रुपये जुटाने का है, तो हर महीने 1,21,232 रुपये की SIP करनी होगी। इसी लक्ष्य की अवधि बढ़ाकर 10 साल कर दें, तो मासिक निवेश घटकर सिर्फ 43,041 रुपये रह जाएगा। वहीं अगर आपके पास 20 साल का लंबा समय है, तो हर महीने महज 10,009 रुपये बचाने भर से काम बन जाएगा।

लंबे समय तक टिके रहना ही कुंजी

स्टॉकटिक कैपिटल के फाउंडर विजय माहेश्वरी इन आंकड़ों को निवेश के एक अहम नियम का सबूत मानते हैं। उनके मुताबिक बाजार में सही वक्त पर दाखिल होने से कहीं ज्यादा मायने यह रखता है कि आप बाजार में कितनी लंबी अवधि तक टिके रहते हैं। आप जितने लंबे समय तक निवेश बनाए रखेंगे, कंपाउंडिंग को अपना असर दिखाने का उतना ही बड़ा मौका मिलेगा।

इसका सबूत आंकड़ों में साफ झलकता है। अगर कोई निवेशक 20 साल के बजाय 25 साल के लिए निवेश करता है, तो एक करोड़ रुपये का फंड बनाने के लिए उसे हर महीने केवल 5,270 रुपये की SIP करनी होगी। यह 20 साल वाली रकम से लगभग आधी है।

जल्दी शुरुआत का फायदा

आनंद राठी वेल्थ लिमिटेड की डायरेक्टर प्रोतिमा धवन बताती हैं कि ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कंपाउंडिंग को अपना काम करने के लिए ज्यादा वक्त मिल जाता है। जब आप जल्दी निवेश शुरू कर देते हैं, तो फंड बढ़ाने का ज्यादातर मुश्किल काम कंपाउंडिंग खुद ही निपटा देती है।

आंकड़े देखकर यकीन नहीं होगा

इस फर्क को एक आसान उदाहरण से समझा जा सकता है। अगर आप 5 साल के लिए निवेश करते हैं, तो आपकी जेब से कुल 72.74 लाख रुपये जमा होंगे और उस पर करीब 27.26 लाख रुपये का रिटर्न मिलेगा। लेकिन अगर आप 25 साल के लिए निवेश करते हैं, तो आपकी जेब से कुल जमा रकम सिर्फ 15.81 लाख रुपये होगी, जबकि उस पर मिलने वाला रिटर्न बढ़कर 84.19 लाख रुपये हो जाएगा।

यानी 25 साल वाले मामले में आपको अपनी जेब से 16 लाख रुपये भी नहीं लगाने पड़े और आपका पैसा बढ़कर एक करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया।

स्टेप-अप SIP से और आसान होगी राह

जैसे-जैसे समय बीतता है, नौकरी या कारोबार में आमदनी भी बढ़ती जाती है। ऐसे में अगर आप हर साल अपने निवेश की रकम में थोड़ा-थोड़ा इजाफा करते रहें, तो आपका लक्ष्य और भी सरल हो जाता है। फाइनेंस की भाषा में इसी तरीके को स्टेप-अप SIP कहा जाता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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