पटना रिंग रोड बनेगी 150 किलोमीटर लंबी, 16,000 करोड़ की परियोजना को मिली हरी झंडी, दिल्ली-NCR की तर्ज पर बदलेगा शहर बिहार 2 घंटे पहले 3
केंद्र सरकार ने पटना रिंग रोड के आठवें और अंतिम चरण को स्वीकृति दे दी है। 21 वर्ष पुरानी यह योजना अब पूरी होने के करीब है और 150 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट पर करीब 16,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

पटना के विकास से जुड़ी एक बड़ी परियोजना को अब अंतिम मंजूरी मिल गई है। केंद्र सरकार ने पटना रिंग रोड के आठवें और आखिरी हिस्से को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस निर्णय के साथ ही 21 साल पुरानी यह योजना पूरी होने की दिशा में आगे बढ़ चुकी है। कुल 150 किलोमीटर लंबे इस मेगा प्रोजेक्ट पर लगभग 16,000 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। उम्मीद की जा रही है कि इसके पूरा होने के बाद पटना का विकास दिल्ली एनसीआर की तर्ज पर होगा और आसपास के जिलों को भी इसका बड़ा लाभ मिलेगा।

दो दशक पुरानी योजना अब अंतिम पड़ाव पर

पटना रिंग रोड की कल्पना वर्ष 2005 में की गई थी। करीब 21 वर्षों तक चली योजना, सर्वेक्षण और तमाम प्रक्रियाओं के बाद अब यह परियोजना अपने अंतिम चरण तक पहुंच गई है। लगभग 150 किलोमीटर लंबी यह रिंग रोड महज एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि इसे पटना, सारण और वैशाली की आर्थिक एवं सामाजिक तस्वीर बदलने वाली परियोजना माना जा रहा है। मंजूरी मिलने के बाद अब पूरी रिंग रोड का निर्माण आठ चरणों में पूरा किया जाएगा।

आठ चरणों में हो रहा है निर्माण

संपूर्ण रिंग रोड का निर्माण आठ अलग-अलग चरणों में किया जा रहा है। इनमें से कई हिस्सों का काम पूरा हो चुका है, जबकि शेष भागों पर तेज गति से काम जारी है। अब केवल अंतिम चरण का निर्माण बाकी रह गया है, जिसे मंजूरी मिलने के बाद पूरी परियोजना को नई रफ्तार मिल गई है।

दीघवारा से सराय के बीच बनेगा आठवां खंड

परियोजना का आठवां और अंतिम हिस्सा दीघवारा से सराय के बीच तैयार किया जाएगा। यह खंड लगभग 30 किलोमीटर लंबा होगा और इसकी अनुमानित लागत करीब 1,500 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह मार्ग गंगा नदी के उत्तर में वैशाली और सारण जिलों को आपस में जोड़ते हुए विकसित किया जाएगा। इस हिस्से के निर्माण के लिए जरूरी भूमि अधिग्रहण का करीब 50 प्रतिशत खर्च बिहार सरकार उठाएगी। परियोजना के पूरा होने पर पटना और उत्तर बिहार के बीच संपर्क पहले से कहीं अधिक मजबूत हो जाएगा।

कई अहम इलाकों को जोड़ेगा प्रस्तावित मार्ग

पटना रिंग रोड का प्रस्तावित मार्ग कन्हौली, शेरपुर, सराय, कच्ची दरगाह, बिदुपुर, चकसिकंदर, दीघवारा और दीदारगंज समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को आपस में जोड़ता है। इससे राजधानी के भीतर और बाहर यातायात का दबाव घटेगा तथा लंबी दूरी तय करने वाले वाहनों को शहर में प्रवेश किए बिना ही अपने गंतव्य तक पहुंचने का विकल्प मिलेगा।

ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत

पटना में वाहनों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण ट्रैफिक जाम एक बड़ी समस्या बन चुका है। रिंग रोड के बन जाने के बाद बाहरी जिलों से आने वाले भारी वाहन सीधे इसी मार्ग का इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे शहर के मुख्य मार्गों पर दबाव कम होगा और यात्रा में लगने वाला समय भी घटेगा।

क्षेत्र में खुलेंगी विकास की नई संभावनाएं

विशेषज्ञों का मानना है कि रिंग रोड बनने के बाद पटना, वैशाली और सारण में औद्योगिक, व्यावसायिक तथा आवासीय विकास के नए रास्ते खुलेंगे। सड़क के किनारे नए औद्योगिक क्षेत्र, लॉजिस्टिक हब और आवासीय परियोजनाएं विकसित हो सकती हैं। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

दिल्ली एनसीआर मॉडल पर होगा पटना का विस्तार

परियोजना के पूरा होने के बाद पटना का विस्तार दिल्ली एनसीआर मॉडल की तरह होने की उम्मीद जताई जा रही है। बेहतर सड़क संपर्क की वजह से राजधानी पटना का सीधा फायदा वैशाली, सारण और आसपास के जिलों को मिलेगा। इसके साथ ही यह रिंग रोड 7 राष्ट्रीय राजमार्गों और 5 प्रमुख राज्य मार्गों को आपस में जोड़ने का काम करेगी, जिससे बिहार की कनेक्टिविटी को एक नया आयाम मिलेगा।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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