खान सर पर हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट का मुकदमा, आरोप साबित हुए तो कितनी सजा संभव? बिहार एक घंटा पहले 3
फैसल खान उर्फ खान सर के खिलाफ कोचिंग के बाहर हुए विवाद और फायरिंग को लेकर हत्या की कोशिश और आर्म्स एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज हुई है। सामने आए एक वीडियो में दो सुरक्षा गार्ड फायरिंग करते दिखे, जिसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

खान ग्लोबल स्टडीज (KGS) के संचालक फैसल खान उर्फ खान सर से जुड़ा मामला इन दिनों लगातार चर्चा में बना हुआ है। इस प्रकरण में हर रोज कोई न कोई नया पहलू सामने आ रहा है। ताजा घटनाक्रम में कदमकुआं थाने में खान सर के विरुद्ध हत्या की कोशिश और आर्म्स एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसके बाद यह सवाल जोर पकड़ने लगा है कि क्या उनकी गिरफ्तारी हो सकती है और यदि आरोप अदालत में सिद्ध हो जाते हैं तो उन्हें किस हद तक सजा का सामना करना पड़ सकता है।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद

इस विवाद की जड़ मंगलवार रात की एक घटना है। खान सर की तरफ से यह दावा किया गया कि करीब 15 से 20 लोग उनकी कोचिंग के बाहर पहुंचे और हंगामा खड़ा कर दिया। आरोप है कि इन लोगों ने सुरक्षा गार्डों के साथ मारपीट भी की। खान सर के मुताबिक इसी दौरान फायरिंग की घटना भी हुई।

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और छानबीन शुरू कर दी। जांच के दौरान आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला गया। शुरुआती कार्रवाई में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें कोचिंग संस्थान ‘ज्ञान बिंदू’ के डायरेक्टर रौशन आनंद का नाम भी शामिल रहा।

वीडियो सामने आने से बढ़ी मुश्किल

मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब घटना के कुछ दिनों बाद एक वीडियो सामने आया। इस वीडियो में कथित रूप से खान सर के दो सुरक्षा गार्ड हथियार से फायरिंग करते नजर आ रहे हैं। वीडियो सार्वजनिक होने के बाद पुलिस ने दोनों गार्डों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, उनके हथियार जब्त किए और बाद में दोनों को गिरफ्तार कर लिया। अब यह भी कहा जा रहा है कि गार्डों ने खान सर के निर्देश पर ही गोली चलाई थी।

आरोप साबित हुए तो कितनी सजा

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर खान सर पर लगे आरोप अदालत में प्रमाणित हो जाते हैं तो उन्हें कितनी सजा हो सकती है। हत्या की कोशिश का अपराध भारतीय न्याय संहिता (BNS) के दायरे में आता है। अगर यह साबित हो जाए कि किसी व्यक्ति ने जान लेने की मंशा से हमला किया था, लेकिन पीड़ित की मृत्यु नहीं हुई, तो इसे हत्या की कोशिश माना जाता है।

ऐसे मामलों में अदालत अधिकतम 10 साल तक की जेल के साथ जुर्माने की सजा सुना सकती है। यदि घटना में किसी को गंभीर चोट पहुंची हो या हालात बेहद संगीन हों, तो अदालत आजीवन कारावास तक की सजा भी दे सकती है।

इसके अलावा आर्म्स एक्ट में भी कड़े प्रावधान मौजूद हैं। बिना वैध लाइसेंस के हथियार रखने, उसका इस्तेमाल करने या हथियार के जरिए अपराध करने का आरोप सिद्ध होने पर 3 से 7 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है। कुछ गंभीर परिस्थितियों में यह सजा और भी बढ़ सकती है।

अभी जारी है जांच

हालांकि कानूनी जानकारों का मानना है कि सिर्फ एफआईआर दर्ज हो जाने या आरोप लगने भर से कोई व्यक्ति दोषी नहीं माना जाता। यह तय करना कि आरोप सही हैं या नहीं, पुलिस जांच, फोरेंसिक रिपोर्ट, गवाहों के बयान और अदालत में पेश सबूतों पर निर्भर करता है। अगर अदालत में आरोप साबित नहीं हो पाते, तो आरोपी को राहत भी मिल सकती है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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