झारखंड
एक घंटा पहले
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चमोकन बीमारी का बढ़ता खतरा
पलामू क्षेत्र में मानसून के दस्तक देते ही पशुपालकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। बारिश के मौसम में दुधारू पशुओं में चमोकन बीमारी के मामले सामने आ रहे हैं, जो पशु स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती है। पशु विशेषज्ञ डॉ. विकास शर्मा का कहना है कि यह बीमारी मुख्य रूप से जूं और अन्य बाहरी परजीवियों के कारण फैलती है।
कैसे फैलती है यह बीमारी
पशुशालाओं में स्वच्छता की कमी और नमी इस बीमारी को पनपने में मदद करती है। पशु विशेषज्ञ के अनुसार इसके पीछे के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
- पशुशाला के आसपास गंदे पानी का जमाव।
- नमी वाले वातावरण में परजीवियों का तेजी से पनपना।
- साफ-सफाई के अभाव में जूं और किलनी का हमला।
पशुओं पर क्या होता है असर
चमोकन बीमारी से ग्रसित पशुओं में कई तरह की गंभीर समस्याएं देखने को मिलती हैं। ये परजीवी पशुओं का खून चूसते हैं, जिसके कारण पशुओं में खून की कमी (एनीमिया) और भारी कमजोरी आ जाती है। इसका सीधा असर पशुओं के दूध उत्पादन पर पड़ता है, जो अचानक कम हो जाता है। यदि समय रहते उपचार न मिले, तो स्थिति और बिगड़ सकती है। गंभीर मामलों में पशुओं को निमोनिया जैसी जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं और सही देखभाल न मिलने पर पशु की मौत का खतरा भी बना रहता है।
बचाव और सावधानी के तरीके
पशुपालकों को सलाह दी गई है कि वे मानसून के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतें। बीमारी से बचने के लिए इन निर्देशों का पालन करें:
- पशुशाला की नियमित और गहन सफाई सुनिश्चित करें।
- यह ध्यान रखें कि पशुशाला के आसपास कहीं भी गंदा पानी इकट्ठा न हो।
- यदि किसी पशु में संक्रमण के लक्षण दिखें, तो उसे तुरंत स्वस्थ जानवरों से अलग कर दें।
- लक्षण दिखाई देते ही बिना देरी किए नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें और उचित सलाह लें।
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