पाकिस्तान की कूटनीतिक बिसात: आमना बलोच को तुर्की क्यों भेज रहे शहबाज शरीफ? विश्व 5 घंटे पहले 3
पाकिस्तान की विदेश सचिव आमना बलोच अपनी सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद तुर्की में राजदूत का पद संभालेंगी, जो इस्लामाबाद की तुर्की पर बढ़ती निर्भरता को दर्शाता है।

कूटनीतिक गलियारों में हलचल

पाकिस्तान के राजनयिक तंत्र में इस समय काफी हलचल देखी जा रही है। विदेश मंत्री इशाक डार की एक घोषणा ने इस्लामाबाद से लेकर दुनिया भर में मौजूद पाकिस्तानी दूतावासों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। पाकिस्तान की 33वीं विदेश सचिव आमना बलोच का कार्यकाल 17 सितंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। वह अपनी 33 साल लंबी सेवा के बाद सेवानिवृत्त होने जा रही हैं। हालांकि, सरकारी पद से हटने के साथ ही उनके करियर का एक नया अध्याय शुरू होने वाला है। उन्हें तुर्की में पाकिस्तान का नया राजदूत नियुक्त किया गया है, जो कि इस्लामाबाद की भविष्य की विदेश नीति का एक बड़ा हिस्सा माना जा रहा है।

कौन हैं आमना बलोच?

आमना बलोच पाकिस्तान की सबसे प्रभावशाली महिला राजनयिकों में से एक गिनी जाती हैं। उन्होंने 11 सितंबर 2024 को विदेश सचिव के रूप में अपनी कमान संभाली थी। तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में, उन्होंने वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान के हितों का प्रतिनिधित्व किया है। विदेश सचिव बनने से पहले, उन्होंने बेल्जियम, लक्जमबर्ग और यूरोपीय संघ में राजदूत के तौर पर अपनी भूमिका निभाई थी। इसके अलावा, उन्होंने मलेशिया में उच्चायुक्त और विदेश मंत्रालय के भीतर कई अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण विभागों में अपनी सेवाएं दी हैं। जब पाकिस्तान आर्थिक तंगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छवि सुधारने की चुनौतियों से जूझ रहा था, उस समय उन्हें विदेश मंत्रालय का शीर्ष पद सौंपा गया था। 17 सितंबर 2026 को अपनी 60 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद वह सरकारी सेवा से औपचारिक रूप से कार्यमुक्त हो जाएंगी।

तुर्की को खुश करने की मजबूरी

आमना बलोच को सीधे अंकारा भेजना कोई सामान्य प्रशासनिक तबादला नहीं है। यह कदम तुर्की के साथ पाकिस्तान के संबंधों को और गहरा करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। पाकिस्तान की सुरक्षा जरूरतों, रक्षा सौदों, आधुनिक ड्रोन तकनीक की खरीद और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समर्थन के लिए तुर्की का सहयोग अनिवार्य हो गया है। पहले वहां राजदूत का पद एक सेवानिवृत्त अधिकारी द्वारा संभाला जा रहा था, लेकिन अब शहबाज शरीफ की सरकार ने वहां अपनी सबसे अनुभवी कूटनीतिज्ञ को भेजने का फैसला किया है। यह निर्णय दर्शाता है कि तुर्की को रिझाने और अपनी रक्षा व व्यापारिक प्राथमिकताओं को सुरक्षित रखने के लिए इस्लामाबाद किस हद तक जाने को तैयार है।

इशाक डार का ऐलान और प्रधानमंत्री की सहमति

पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस महत्वपूर्ण बदलाव की जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपनी सेवानिवृत्ति के पश्चात आमना बलोच तुर्की में पाकिस्तान की कमान संभालेंगी। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि इन नियुक्तियों को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने आधिकारिक रूप से अपनी स्वीकृति दे दी है। यह कूटनीतिक बदलाव केवल एक नियुक्ति नहीं, बल्कि तुर्की के प्रति पाकिस्तान के बढ़ते झुकाव का प्रतीक है।

अगले विदेश सचिव और कानूनी पेंच

आमना बलोच के सेवानिवृत्त होने के बाद आसिम इफ्तिखार अहमद पाकिस्तान के 34वें विदेश सचिव का कार्यभार संभालेंगे। वह वर्तमान में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र (UN) में पाकिस्तान के स्थाई प्रतिनिधि के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। 1993 बैच के विदेशी सेवा अधिकारी रहे आसिम, लाहौर यूनिवर्सिटी और पंजाब यूनिवर्सिटी के स्वर्ण पदक विजेता रह चुके हैं। उन्होंने फ्रांस, थाईलैंड और यूनेस्को में भी पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व किया है और वह विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता भी रहे हैं। हालांकि, उनके सामने एक कानूनी चुनौती भी खड़ी है। 27 नवंबर 1966 में जन्मे आसिम इसी साल नवंबर 2026 में 60 साल के हो जाएंगे। पाकिस्तान के सरकारी नियमों के अनुसार, यह सेवानिवृत्ति की आयु है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार उन्हें पद पर बनाए रखने के लिए विशेष विस्तार दे सकती है। वर्तमान में उनके संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में व्यस्त होने के कारण, उनके इस्लामाबाद लौटने तक विशेष सचिव नबील मुनीर को कार्यवाहक विदेश सचिव की जिम्मेदारी दी जा सकती है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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