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13 घंटे पहले
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पाकिस्तानी सेना ने क्वेटा में हुए ट्रेन धमाके का बदला लेने के नाम पर दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान में एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। सेना ने इस अभियान में 17 लोगों को मार गिराने का दावा किया है और कहा है कि ये वही लोग थे जो आतंक फैलाने में जुटे हुए थे।
सेना का दावा और अभियान की जानकारी
इस समय पाकिस्तान में आंतरिक सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। देश के भीतर अलग-अलग मोर्चों पर सक्रिय विद्रोहियों ने पाकिस्तानी फौज को लगातार परेशानी में डाल रखा है। ऐसे हालात में सेना ने खुद को साबित करने के लिए फिर से बलूचिस्तान का रुख किया।
पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा आईएसपीआर ने 17 आतंकवादियों को मार गिराने का दावा किया है। सेना के अनुसार खुफिया सूचनाओं के आधार पर बलूचिस्तान के मस्तुंग, नुश्की, केच और खुजदार जिलों में कई अभियान चलाए गए। फौज का कहना है कि इन अभियानों में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया और उनके नेटवर्क को भारी नुकसान पहुंचाया गया। कार्रवाई के दौरान हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किए गए।
सेना ने बलूचिस्तान को आतंकवादी प्रांत बताते हुए कहा कि मारे गए लोग कई आतंकी गतिविधियों में शामिल थे। गौरतलब है कि यह कार्रवाई क्वेटा में हुए ट्रेन ट्रैक धमाके के बाद की गई, जिसमें पाकिस्तानी सैनिकों से भरी ट्रेन को निशाना बनाया गया था। इस हमले की जिम्मेदारी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी की माजिद ब्रिगेड ने ली थी।
बलूचिस्तान से लापता हो रहे नागरिक
बलूचिस्तान में सेना के इन अभियानों और छापेमारी के दौरान कम से कम 10 नागरिकों को कथित तौर पर जबरन हिरासत में लेकर अज्ञात स्थानों पर ले जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में मंगलवार को दावा किया गया कि सोमवार सुबह बलूचिस्तान के नुश्की जिले के किल्ली मेंगल इलाके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार करीब 20 सैन्य वाहनों ने इलाके को घेरकर घर-घर तलाशी ली। इस दौरान सात लोगों को हिरासत में लेकर अज्ञात स्थानों पर ले जाने का आरोप है। एक अन्य घटना में सुराब जिले के हाजिका इलाके में पाकिस्तानी फ्रंटियर कॉर्प्स ने घर पर छापा मारकर दो लोगों को हिरासत में लिया।
आखिर क्यों पाकिस्तान के लिए चुनौती बना है बलूचिस्तान
बलूचिस्तान का इलाका सालों से पाकिस्तान के लिए नासूर बना हुआ है। यहां के लोगों की नाराजगी ने पाकिस्तानी फौज को लगातार मुश्किल में डाल रखा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि बलूच लोगों का आरोप है कि खनिजों से भरपूर इस इलाके का दोहन तो पाकिस्तानी सरकार करती है, लेकिन यहां के लोगों की जिंदगी आज भी गरीबी में बीत रही है।
बलूच राष्ट्रवादी समूहों का दावा है कि 1948 में बलूचिस्तान का पाकिस्तान में विलय उनकी इच्छा के खिलाफ किया गया था और इसी वजह से अलगाववादी आंदोलन दशकों से चला आ रहा है। क्षेत्रफल के हिसाब से पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत होने के बावजूद यहां शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं सीमित हैं।
इसके अलावा ग्वादर पोर्ट और सीपैक जैसी चीनी परियोजनाओं को भी बलूच लोग बाहरी नियंत्रण का प्रतीक मानते हैं। दूसरी ओर चीन को खुश करने के लिए पाकिस्तान यहां के विद्रोह को कुचलने की कार्रवाई करता रहता है।
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