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3 घंटे पहले
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पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में एक बार फिर बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) का बड़ा हमला देखने को मिला है। इस बार विद्रोही संगठन ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत राज्य की कनेक्टिविटी यानी संपर्क व्यवस्था को चोट पहुंचाई है। कई महत्वपूर्ण पुलों को धमाकों से उड़ाए जाने के बाद बलूचिस्तान की जीवनरेखा कहे जाने वाले क्वेटा-कराची नेशनल हाईवे के ठप होने की नौबत आ गई है। इस बड़े हमले के बाद जनरल मुनीर की सेना में घबराहट साफ देखी जा रही है और पूरे इलाके में चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं।
रास्तों को काटकर अलग करने की साजिश: मस्तंग में धमाके
बलूचिस्तान के मस्तंग इलाके में BLA के सशस्त्र सदस्यों ने एक संगठित हमले को अंजाम दिया। इस हमले के दौरान इलाके के कई छोटे पुलों को शक्तिशाली धमाकों के जरिए पूरी तरह से नष्ट या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया गया। इन पुलों के टूटने की वजह से अलग-अलग शहरों के बीच का आपसी सड़क संपर्क टूट गया है और कई स्थानीय रास्ते बंद हो गए हैं।
धीरे-धीरे इस हमले का असर बलूचिस्तान की सबसे महत्वपूर्ण सड़क यानी क्वेटा-कराची नेशनल हाईवे पर भी दिखने लगा। सुरक्षा बलों और BLA के लड़ाकों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ के कारण इस बेहद महत्वपूर्ण मार्ग को कई घंटों के लिए बंद करना पड़ा। इस मार्ग के बंद होने के कारण हाईवे पर यात्री वाहनों और जरूरी सामानों से लदे ट्रकों की मीलों लंबी कतारें लग गईं, जिससे सैकड़ों यात्री और चालक बीच रास्ते में ही फंस गए।
इलाके में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू और सेना का कड़ा पहरा
बिगड़ते हालात को देखते हुए पाकिस्तानी प्रशासन ने खादकोचा और मस्तंग के कुछ संवेदनशील हिस्सों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया है। अधिकारियों ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए स्थानीय नागरिकों को अपने-अपने घरों के अंदर ही रहने की सख्त हिदायत दी है।
इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। सेना के जवान न केवल सड़कों को दोबारा खोलने के काम में जुटे हैं, बल्कि वे क्षेत्र में नए हमलों को रोकने और विद्रोहियों को पकड़ने के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान भी चला रहे हैं। हालांकि, जैसे-जैसे सेना अपना पहरा और गश्त बढ़ा रही है, वैसे-वैसे विद्रोहियों के हमलों में भी तेजी देखी जा रही है।
पुलों और बुनियादी ढांचों को ही क्यों निशाना बनाता है BLA?
बलूचिस्तान में चल रहे इस पूरे घटनाक्रम में एक बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर विद्रोही संगठन बार-बार पुलों और सड़कों को ही क्यों निशाना बनाते हैं। दरअसल, बलूचिस्तान में विद्रोहियों की यह रणनीति काफी पुरानी और सोची-समझी है, जिसके तहत वे हमेशा परिवहन और संचार व्यवस्था को बाधित करने की कोशिश करते हैं। BLA पहले भी रेलवे लाइनों, हाईवे, पुलों, सुरक्षा चौकियों और अन्य बुनियादी ढांचों पर लगातार हमले करता रहा है।
इसके पीछे विद्रोहियों की मुख्य रणनीतिक वजहें निम्नलिखित हैं:
- इलाके का अलगाव: पुलों को नष्ट करके विद्रोही किसी भी क्षेत्र को अस्थाई तौर पर बाकी हिस्सों से पूरी तरह अलग-थलग कर देते हैं।
- आपूर्ति मार्ग रोकना: इन हमलों से सेना और सुरक्षा बलों की रसद और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति का मार्ग पूरी तरह से बाधित हो जाता है।
- वैकल्पिक रास्तों का दबाव: सुरक्षा बलों और आम नागरिकों को अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए बेहद लंबे और वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे उनका समय और संसाधन नष्ट होते हैं।
- कम बल में बड़ा असर: किसी क्षेत्र पर भौतिक रूप से कब्जा किए बिना भी बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाकर सरकार पर बड़ा दबाव बनाया जा सकता है। विद्रोही सरकार को अपनी बात सुनने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से इन रणनीतियों का इस्तेमाल करते हैं।
क्वेटा-कराची हाईवे का रणनीतिक महत्व और लोगों की मुश्किलें
क्वेटा-कराची हाईवे बलूचिस्तान की जीवनरेखा माना जाता है। यह हाईवे प्रांत की प्रांतीय राजधानी क्वेटा को सीधे सिंध प्रांत के सबसे बड़े शहर कराची से जोड़ता है। यही वह मुख्य रास्ता है जिससे होकर रोजाना यात्री गाड़ियां और आवश्यक खाद्य सामग्री, ईंधन और दवाएं लेकर जाने वाले ट्रक गुजरते हैं।
बलूचिस्तान का भूगोल बेहद कठिन, पथरीला और पहाड़ी है। इस वजह से यहां एक शहर से दूसरे शहर की दूरी बहुत अधिक है और वैकल्पिक मार्ग बहुत ही कम हैं। ऐसे में अगर यह मुख्य हाईवे लंबे समय तक बंद रहता है, तो पूरे प्रांत में भोजन, ईंधन और अन्य आवश्यक चीजों की भारी किल्लत पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है।
संसाधनों के दोहन और उपेक्षा की जंग
बलूचिस्तान में चल रहे इस लंबे संघर्ष के पीछे राजनीतिक और आर्थिक कारण बेहद गहरे हैं। BLA समेत कई बलूच विद्रोही संगठन लंबे समय से पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष कर रहे हैं। इन संगठनों का मुख्य आरोप है कि इस्लामाबाद में बैठी सरकार बलूचिस्तान के समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों का जमकर दोहन करती है।
लेकिन, इसके बदले में इस प्रांत को न तो पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिया जाता है और न ही कोई बड़ा आर्थिक लाभ मिलता है। हालांकि, पाकिस्तान सरकार हमेशा से इन आरोपों को सिरे से खारिज करती आई है और उसका दावा है कि वह प्रांत के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
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