S-400 का खौफ ऐसा कि पाकिस्तान को सीमा से हटाना पड़ा अपना सबसे ताकतवर निगरानी विमान भारत 2 दिन पहले 7
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के S-400 एयर डिफेंस सिस्टम और उसकी 40N6 मिसाइलों के डर से पाकिस्तान अपने साब-2000 एरीआई AEW&C विमानों को सिंध के भोलारी एयरबेस से हटाकर बलूचिस्तान के समुंगली एयरबेस पर ले जा रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद दक्षिण एशिया में हवाई युद्ध की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पिछले साल के सैन्य टकराव में जीत का दावा करने वाले पाकिस्तान की हकीकत अब धीरे-धीरे सामने आ रही है। एक के बाद एक उठाए जा रहे कदम इस बात का सबूत हैं कि भारत ने इस अभियान में पड़ोसी देश को कितनी गहरी चोट पहुंचाई थी।

सीमा से पीछे हट रहे निगरानी विमान

भारत के S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की मारक क्षमता के आगे झुकते हुए पाकिस्तान ने सीमा के पास तैनात अपने साब-2000 एरीआई (Erieye) एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) विमानों को वहां से हटाना शुरू कर दिया है। मई में हुए सैन्य टकराव के दौरान S-400 की लॉन्ग रेंज मिसाइल ने राजस्थान से सटे पाकिस्तान के सिंध प्रांत में मौजूद एक एयरबेस को निशाना बनाया था। इस हमले में पाकिस्तान का बेहद कीमती सैन्य संसाधन माने जाने वाला साब-2000 एरीआई AEW&C विमान तबाह हो गया था, जिससे उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा।

इसी सटीक हमले से सहमे पाकिस्तान ने अब अपने AEW&C विमानों को सिंध से बलूचिस्तान भेजना शुरू कर दिया है, ताकि उन्हें S-400 की पहुंच से दूर रखा जा सके। इससे पहले पाकिस्तान ने किराना हिल्स की सुरक्षा बढ़ाते हुए वहां अमेरिकी रडार सिस्टम तैनात किया था। बताया जाता है कि किराना हिल्स के ठिकाने में ही उसका परमाणु समेत दूसरे संवेदनशील हथियार सिस्टम सुरक्षित रखे गए हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने ब्रह्मोस से इस क्षेत्र पर भी हमला किया था।

भोलारी से समुंगली एयरबेस तक

भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में पैदा हुए सैन्य तनाव के बाद पाकिस्तान वायुसेना (PAF) ने अपने सबसे अहम हवाई निगरानी प्लेटफॉर्म, साब-2000 एरीआई AEW&C विमानों को सुरक्षित ठिकानों पर तैनात करने की रणनीति अपनानी शुरू कर दी है। 'इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग' की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान वायुसेना अपनी नंबर-53 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग स्क्वाड्रन के बचे हुए एरीआई विमानों को सिंध स्थित भोलारी एयरबेस से बलूचिस्तान में क्वेटा के पास समुंगली एयरबेस ट्रांसफर करने की तैयारी कर रही है।

बताया जा रहा है कि यह फैसला भारतीय वायुसेना के S-400 एयर डिफेंस सिस्टम और खासतौर पर उसकी लंबी दूरी तक मार करने वाली 40N6 मिसाइलों से पैदा हुए खतरे को देखते हुए लिया गया है। इन मिसाइलों के बारे में कहा जाता है कि ये 300 किलोमीटर से अधिक दूरी पर मौजूद हाई-वैल्यू हवाई ठिकानों को निशाना बना सकती हैं। ऐसे में पाकिस्तान अपने संवेदनशील निगरानी विमानों को भारत की वायु रक्षा प्रणालियों की संभावित पहुंच से दूर रखना चाहता है। सिंध प्रांत का भोलारी एयरबेस S-400 की लॉन्ग रेंज मिसाइल की जद में आता है और भारत के हमले के बाद से पाकिस्तान इसे लेकर बेहद डरा हुआ है।

भारतीय वायुसेना के पराक्रम ने किया मजबूर

सिंध प्रांत में स्थित भोलारी एयरबेस लंबे समय से पाकिस्तान की एयरबोर्न अर्ली वार्निंग स्क्वाड्रन का प्रमुख ऑपरेशनल सेंटर रहा है। हालांकि मई 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव के दौरान यह एयरबेस चर्चा में आ गया। 10 मई को हुए कथित भारतीय हमले में एयरबेस के एक हैंगर को नुकसान पहुंचने और वहां मौजूद कम से कम एक एरीआई विमान के क्षतिग्रस्त या नष्ट होने की खबरें सामने आई थीं। इस घटना ने सीमा के करीब तैनात हाई-वैल्यू डिफेंस एसेट्स की कमजोरी को उजागर कर दिया।

एरीआई AEW&C सिस्टम पाकिस्तान के एयर डिफेंस ढांचे का अहम हिस्सा माना जाता है। ये विमान लंबी दूरी तक रडार निगरानी, कमांड एंड कंट्रोल और लड़ाकू विमानों को रियल टाइम सूचनाएं देने में अहम भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि सीमित बेड़े की सुरक्षा अब पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है। उल्लेखनीय है कि भारत को हाल ही में S-400 का चौथा स्क्वाड्रन मिला है।

राहत के साथ नई मुश्किलें

सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय वायुसेना द्वारा S-400 सिस्टम के 40N6 मिसाइल वेरिएंट के प्रभावी इस्तेमाल ने क्षेत्रीय हवाई युद्ध की रणनीतियों को ही बदल दिया है। इन मिसाइलों की लंबी दूरी और ऊंचाई पर लक्ष्य भेदने की क्षमता के कारण पाकिस्तान को अपने एयरबोर्न निगरानी प्लेटफॉर्मों की तैनाती पर दोबारा सोचना पड़ रहा है। माना जा रहा है कि समुंगली एयरबेस, भोलारी की तुलना में भारतीय सीमा से काफी अंदर स्थित है और बलूचिस्तान का पहाड़ी इलाका भी अतिरिक्त सुरक्षा देता है।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि विमानों को क्वेटा क्षेत्र में ले जाने से पाकिस्तान को सामरिक सुरक्षा तो मिलेगी, लेकिन पूर्वी सीमा पर निगरानी मिशन के लिए फ्लाइट टाइम और ऑपरेशनल चुनौतियां बढ़ सकती हैं। इसके लिए उसे अतिरिक्त ईंधन सहायता और नए ऑपरेशनल ढांचे की जरूरत पड़ सकती है।

एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम से बदले हालात

रक्षा मामलों के जानकारों के अनुसार, यह कदम महज एक एयरबेस बदलने भर की बात नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया में बदलते हवाई युद्ध का संकेत है। लंबी दूरी की मिसाइलों, सटीक हमलों और एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम के इस दौर में दोनों देशों की सेनाएं अब अपने अहम सैन्य संसाधनों की सुरक्षा के लिए उन्हें अधिक गहराई वाले इलाकों में तैनात करने, बिखरी हुई तैनाती अपनाने और दूसरी रणनीतियों पर जोर दे रही हैं। पाकिस्तान का अपने एरीआई बेड़े की सुरक्षा को प्राथमिकता देना इसी बदलती सैन्य सोच का हिस्सा माना जा रहा है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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