ईरान-अमेरिका शांति समझौता: होर्मुज़ खुला रहेगा, परमाणु हथियार पर रोक — जानिए डील की 14 अहम शर्तें विश्व 2 दिन पहले 9
कई दिनों की गोपनीयता के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान के साथ हुए समझौता ज्ञापन (MOU) की शर्तें सार्वजनिक कीं। इसमें युद्ध की समाप्ति, नौसैनिक नाकेबंदी हटाने, प्रतिबंध खत्म करने और परमाणु हथियार न बनाने जैसी 14 शर्तें शामिल हैं।

वॉशिंगटन: ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित शांति समझौते के दस्तावेज़ में क्या लिखा है, इसे कई दिनों तक गुप्त रखने के बाद बुधवार को अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने पत्रकारों के सामने दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MOU) को पढ़कर सुनाया। शुक्रवार को होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर समारोह से पहले अधिकारियों ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर यह जानकारी साझा की। इसके बाद ईरान के सरकारी टेलीविज़न ने भी समझौते का पाठ जारी किया, जो काफी हद तक अमेरिका द्वारा जारी किए गए पाठ से मिलता-जुलता था।

समझौते में क्या-क्या तय हुआ?

  1. अमेरिका, ईरान और मौजूदा युद्ध में उनके सहयोगी इस MOU पर हस्ताक्षर कर लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त करने की घोषणा करते हैं। वे यह भी वचन देते हैं कि आगे से एक-दूसरे के विरुद्ध न कोई युद्ध छेड़ेंगे, न सैन्य कार्रवाई करेंगे, और बल प्रयोग या उसकी धमकी से दूर रहेंगे। अंतिम समझौता लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध की स्थायी समाप्ति तथा इस बिंदु की अन्य शर्तों की पुष्टि करेगा।
  2. दोनों देश एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने तथा परस्पर आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का वचन देते हैं।
  3. अमेरिका और ईरान बातचीत जारी रखने तथा अधिकतम 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौता करने के लिए प्रतिबद्ध हैं; यह अवधि आपसी सहमति से बढ़ाई जा सकती है।
  4. MOU पर हस्ताक्षर होते ही अमेरिका ईरान के विरुद्ध अपनी नौसैनिक नाकेबंदी और हर तरह की रुकावट हटाना शुरू करेगा और 30 दिनों के भीतर इसे पूरी तरह समाप्त कर देगा। इस दौरान जहाजों की आवाजाही उतनी ही होगी जितना युद्ध-पूर्व यातायात ईरान बहाल करेगा। अमेरिका यह भी वचन देता है कि अंतिम समझौते के बाद 30 दिनों के भीतर वह ईरान के आसपास से अपनी सेना हटा लेगा।
  5. हस्ताक्षर के बाद ईरान पूरी कोशिश करेगा कि व्यापारिक जहाज़ फ़ारस की खाड़ी से ओमान सागर तक और वापसी में बिना किसी शुल्क के 60 दिनों तक सुरक्षित आवाजाही कर सकें। यह आवाजाही तुरंत शुरू होगी और तकनीकी व सैन्य बाधाओं को हटाने तथा बारूदी सुरंगों को साफ़ करने की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए ईरान इसे 30 दिनों के भीतर पूरी तरह चालू करेगा। ईरान, ओमान की सल्तनत के साथ मिलकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रशासन और समुद्री सेवाओं पर बातचीत करेगा, जिसमें फ़ारस की खाड़ी से सटे अन्य देश भी शामिल होंगे तथा लागू अंतरराष्ट्रीय कानूनों और तटीय देशों के संप्रभु अधिकारों का ध्यान रखा जाएगा।
  6. अमेरिका, क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर की एक पक्की और आपसी सहमति वाली योजना तैयार करने का वादा करता है। इसे लागू करने का तरीका अंतिम समझौते के तहत 60 दिनों के भीतर तय होगा और इससे जुड़े वित्तीय लेन-देन के लिए ज़रूरी सभी लाइसेंस, छूट व अनुमतियाँ अमेरिका देगा।
  7. अमेरिका, अंतिम समझौते के हिस्से के तौर पर एक तय समय-सीमा में ईरान के विरुद्ध सभी प्रकार के प्रतिबंध हटाने का वादा करता है। इनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव, IAEA बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स के प्रस्ताव तथा अमेरिका के सभी एकतरफा (प्राथमिक और माध्यमिक) प्रतिबंध शामिल हैं। दोनों देश इन प्रतिबंधों को हटाने के मुद्दे की अहमियत स्वीकार करते हैं और बातचीत में इन पर तुरंत चर्चा का इरादा रखते हैं।
  8. ईरान दोबारा पुष्टि करता है कि वह न तो परमाणु हथियार खरीदेगा और न ही विकसित करेगा। दोनों देश संवर्धित सामग्री के भंडार के निपटान के लिए एक ऐसे तरीके पर सहमत हुए हैं जिस पर आपसी सहमति बनेगी। यह तरीका बिंदु 7 में बताई गई समय-सीमा के अनुसार होगा और इसमें IAEA की देखरेख में साइट पर ही सामग्री की सांद्रता घटाने (डाउनब्लेंडिंग) की न्यूनतम प्रक्रिया शामिल होगी। दोनों पक्ष संवर्धन के मुद्दे और ईरान की परमाणु ज़रूरतों से जुड़े अन्य आपसी सहमति वाले मामलों पर भी अंतिम समझौते में तय ढांचे के आधार पर चर्चा करेंगे। अंतिम समझौता इस बिंदु की शर्तों की पुष्टि करेगा।
  9. अंतिम समझौते तक दोनों देश यथास्थिति बनाए रखने पर सहमत हैं। ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम की मौजूदा स्थिति को कायम रखेगा, जबकि अमेरिका न कोई नया प्रतिबंध लगाएगा और न ही इस क्षेत्र में अतिरिक्त सेना तैनात करेगा।
  10. अमेरिका वचन देता है कि MOU पर हस्ताक्षर होते ही और प्रतिबंध खत्म होने तक, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और उनसे बनी वस्तुओं तथा बैंकिंग लेन-देन, बीमा और परिवहन जैसी सभी संबंधित सेवाओं के निर्यात के लिए छूट (वेवर) जारी करेगा।
  11. अमेरिका यह भी वचन देता है कि MOU लागू होते ही ईरान के फ्रीज़ या प्रतिबंधित किए गए फंड और संपत्ति को उपयोग के लिए पूरी तरह उपलब्ध कराएगा। इन फंड को जारी करने की प्रक्रिया पर दोनों देश बातचीत के दौरान सहमति बनाएंगे। ऐसे फंड चाहे मूल खाते में रखे जाएं या स्थानांतरित किए जाएं, उन्हें ईरान के केंद्रीय बैंक द्वारा तय किसी भी अंतिम लाभार्थी को भुगतान के लिए पूरी तरह इस्तेमाल लायक बनाया जाएगा। अमेरिका इसके लिए सभी ज़रूरी लाइसेंस और मंज़ूरी जारी करेगा।
  12. दोनों देश इस बात पर सहमत हैं कि MOU के सफल कार्यान्वयन और अंतिम समझौते के भविष्य में पालन की निगरानी के लिए एक कार्यकारी तंत्र स्थापित किया जाएगा।
  13. MOU पर हस्ताक्षर करने तथा इसके बिंदु 1, 4, 5, 10 और 11 के कार्यान्वयन की शुरुआत और इन उपायों के निरंतर पालन के बाद, अमेरिका और ईरान शेष बिंदुओं पर अंतिम समझौते को लेकर बातचीत शुरू करेंगे।
  14. अंतिम समझौते को एक बाध्यकारी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) प्रस्ताव के ज़रिए मंज़ूरी दी जाएगी।

समझौते के अहम बिंदु

इस समझौते का सबसे बड़ा संदेश यह है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल रहेगी, जबकि ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने और न खरीदने की प्रतिबद्धता दोहराई है। बदले में अमेरिका नौसैनिक नाकेबंदी हटाने, प्रतिबंध समाप्त करने और ईरान के पुनर्निर्माण में बड़े निवेश का वादा करता है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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