पुरानी पेंशन योजना बहाली पर केंद्र सरकार का स्पष्ट इनकार, लाखों कर्मचारियों को लगा बड़ा झटका व्यापार एक घंटा पहले 3
केंद्र सरकार ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) को दोबारा लागू करने की किसी भी योजना से साफ इनकार कर दिया है, जिससे देशभर के सरकारी कर्मचारियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।

पुरानी पेंशन योजना पर सरकार का बड़ा बयान

पुरानी पेंशन योजना यानी OPS की बहाली का इंतजार कर रहे लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए एक निराशाजनक खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल उनके पास पुरानी पेंशन व्यवस्था को फिर से लागू करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब के दौरान बताया कि सरकार के लिए पुरानी पेंशन योजना के तहत आने वाले भारी वित्तीय बोझ को लंबे समय तक उठाना संभव नहीं है। सरकार का मानना है कि इस योजना को वापस लाने से सरकारी खजाने पर अत्यधिक दबाव पड़ेगा, जो भविष्य के लिए वित्तीय रूप से सही नहीं है।

राज्य बनाम केंद्र सरकार की स्थिति

वित्त राज्य मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि विभिन्न राज्यों द्वारा पुरानी पेंशन योजना को लागू करने का निर्णय उनकी अपनी नीतियों और अधिकारों के अंतर्गत आता है। वर्तमान में राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों ने केंद्र सरकार और पेंशन फंड नियामक यानी PFRDA को सूचित किया है कि वे NPS से OPS की ओर वापस लौट रहे हैं।

NPS से OPS में वापसी की राह आसान नहीं

सरकार ने इस तकनीकी और वित्तीय बाधा को भी उजागर किया कि नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS में जमा राशि को वापस निकालना कानूनी रूप से काफी जटिल है। नियमों के मुताबिक, NPS में कर्मचारी और सरकार दोनों का हिस्सा जमा होता है और उससे प्राप्त होने वाला रिटर्न भी उसी में जुड़ता है। इसे निकालकर राज्य सरकारों को वापस करने का फिलहाल कोई कानूनी प्रावधान मौजूद नहीं है। इसका सीधा अर्थ यह है कि OPS में लौटना केवल एक राजनीतिक वादा या निर्णय भर नहीं है, बल्कि इसके साथ गंभीर वित्तीय और कानूनी उलझनें भी जुड़ी हुई हैं।

केंद्र सरकार की यूनिफाइड पेंशन स्कीम

OPS के विकल्प के तौर पर केंद्र सरकार ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम यानी UPS को पेश किया है। इसे 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी कर दिया गया है। सरकार का दावा है कि इसका मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन की सुरक्षा देना है। इस नई व्यवस्था में पात्र कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद कम से कम 10,000 रुपये प्रति महीने की निश्चित पेंशन मिलने का प्रावधान तय किया गया है।

पेंशन फंड और वित्तीय स्थिरता

आंकड़ों पर गौर करें तो 7 जुलाई तक केंद्रीय कर्मचारियों के NPS फंड में लगभग 3.65 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति प्रबंधन के तहत जमा थी। सरकार का मानना है कि किसी भी पेंशन व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते समय देश की वित्तीय स्थिरता को सर्वोपरि रखना अनिवार्य है। इसके अलावा, CAG यानी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने भी अपनी रिपोर्टों में चेतावनी दी है कि राज्यों द्वारा OPS में वापसी के गंभीर वित्तीय परिणाम हो सकते हैं। इन सभी तथ्यों को देखते हुए फिलहाल केंद्र की ओर से OPS बहाली की कोई संभावना नहीं दिखाई दे रही है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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