लखीमपुर खीरी के किसान श्याम मिश्रा ने बदली खेती की दिशा, गन्ने को छोड़कर केले की खेती से कमा रहे लाखों उत्तर प्रदेश 3 घंटे पहले 7
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में किसान अब पारंपरिक फसलों से हटकर बागवानी की ओर रुख कर रहे हैं। किसान श्याम मिश्रा ने 20 बीघे में केले की खेती शुरू की है और G9 गोल्ड किस्म से बंपर मुनाफा कमा रहे हैं।

लखीमपुर खीरी में बदल रही है खेती की तस्वीर

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में खेती का स्वरूप धीरे-धीरे बदल रहा है। यहां के किसान अब तक पारंपरिक रूप से गन्ने की खेती पर निर्भर थे, लेकिन अब वे केले की खेती की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। विशेषकर तराई क्षेत्र के फूलबेहड़ इलाके में किसान बड़े पैमाने पर केले की व्यावसायिक खेती कर रहे हैं। बाजार में केले की निरंतर बनी रहने वाली मांग और बेहतर लाभ की संभावनाओं के कारण इसे किसानों के लिए अतिरिक्त आय का एक प्रमुख जरिया माना जा रहा है।

श्याम मिश्रा का सफल प्रयोग

फूलबेहड़ क्षेत्र के रहने वाले प्रगतिशील किसान श्याम मिश्रा ने एक साहसी कदम उठाते हुए अपने खेत में केले की फसल लगाई है। श्याम मिश्रा के अनुसार, उन्होंने कुल 20 बीघा जमीन पर केले के पौधे लगाए हैं। उनका अनुभव बताता है कि यदि सही तकनीक और बाजार की समझ के साथ खेती की जाए, तो केले की फसल से भारी मुनाफा कमाया जा सकता है। श्याम मिश्रा ने बताया कि उन्होंने अपने खेतों में केले की G9 गोल्ड वैरायटी को चुना है, जो आजकल किसानों के बीच बेहद लोकप्रिय हो रही है।

खेती की प्रक्रिया और चुनौतियां

केले की खेती के बारे में जानकारी देते हुए श्याम मिश्रा ने बताया कि इसकी रोपाई के बाद फसल को पूरी तरह तैयार होने में लगभग 14 से 15 महीने का समय लगता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हालांकि यह खेती मुनाफे का सौदा है, लेकिन इसमें कुछ चुनौतियां भी शामिल हैं। मुख्य रूप से मौसम का मिजाज फसल पर सीधा असर डालता है। तेज हवाएं, भारी बारिश और अन्य प्रतिकूल मौसमी स्थितियों में फसल को नुकसान होने का खतरा बना रहता है, जिसके लिए किसानों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है।

पौधों का प्रबंधन और बाजार भाव

सफल खेती के लिए सही प्रबंधन अनिवार्य है। श्याम मिश्रा के मुताबिक, प्रति बीघा लगभग 380 पौधे लगाए जा सकते हैं। किसी भी किसान को यह व्यवसाय शुरू करने से पहले मिट्टी की गुणवत्ता, सिंचाई की व्यवस्था, जल निकासी, पौधों के बीच की दूरी और अपने निकटतम बाजार की उपलब्धता की गहन जानकारी रखनी चाहिए। वर्तमान में बाजार भाव की बात करें तो केला ₹800 से लेकर ₹1000 प्रति कुंतल के हिसाब से बिक रहा है, जो किसानों को एक आकर्षक विकल्प प्रदान करता है।

उद्यान विभाग का सहयोग और अनुदान

केले की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से भी मदद की जा रही है। लखीमपुर खीरी के जिला उद्यान अधिकारी मृत्युंजय सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि उद्यान विभाग की योजनाओं के माध्यम से इच्छुक किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। यदि कोई किसान केले की खेती करना चाहता है, तो उसे ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करना होगा। विभाग द्वारा किसानों का चयन पहले आओ पहले पाओ की नीति के आधार पर किया जाता है। सरकार की ओर से केले की खेती करने वाले किसानों को 40% तक का अनुदान दिया जाता है, ताकि किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें और अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकें।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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