विश्व
4 घंटे पहले
8
विचारों
पाकिस्तान के भीतर इस समय सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बेहद असाधारण और तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। राजधानी इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी और अटक तक की सड़कों पर ऐसी सुरक्षा घेरेबंदी की गई है, जिसे देखकर कोई भी हैरान रह जाए। पहली नजर में ऐसा प्रतीत होता है मानो देश पर कोई बहुत बड़ा सुरक्षा संकट मंडरा रहा हो या किसी बड़े हमले की आशंका हो। लेकिन हकीकत यह है कि यह भारी-भरकम तैयारियां पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) द्वारा आयोजित किए जाने वाले प्रस्तावित मार्च को रोकने के लिए की गई हैं। इस मार्च की घोषणा के बाद से ही सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है और संवेदनशील स्थानों पर भारी मात्रा में रेंजर्स की तैनाती के साथ-साथ बड़े-बड़े कंटेनर लगाकर रास्तों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।
सड़कों की घेरेबंदी और बंद होते हाईवे
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आगामी 27 सितंबर को पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) का एक विशाल मार्च होने जा रहा है। इस प्रदर्शन से पहले ही पूरे प्रशासनिक अमले में खलबली मची हुई है। सरकार किसी भी कीमत पर प्रदर्शनकारियों को देश के मुख्य सत्ता केंद्र यानी राजधानी में दाखिल होने से रोकना चाहती है। इसी रणनीति के तहत राजधानी की ओर आने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं।
बुधवार रात से ही इस्लामाबाद को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण संपर्क मार्गों को अगले आदेश तक के लिए सील किया जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर की गई तैयारियां इतनी सख्त हैं कि आम जनता के बीच भी इसे लेकर भय का माहौल है। यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
- M-1 इस्लामाबाद-पेशावर मोटरवे को इस्लामाबाद टोल प्लाजा से लेकर छाच इंटरचेंज तक दोनों दिशाओं में पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।
- M-14 मोटरवे पर भी हकला से कुंडल तक वाहनों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
- अटक खुर्द के पास स्थित ऐतिहासिक GT रोड को भी दोनों तरफ से बंद कर दिया गया है ताकि कोई भी प्रदर्शनकारी आगे न बढ़ सके।
इन मुख्य मार्गों के अचानक बंद होने के कारण खैबर पख्तूनख्वा, उत्तरी पंजाब, रावलपिंडी और इस्लामाबाद के बीच यात्रा करने वाले आम लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, राहत की बात यह है कि लाहौर-इस्लामाबाद M-2 मोटरवे के खुले रहने की संभावना जताई गई है, जिससे कुछ हद तक यातायात का संचालन हो सकेगा।
इस्लामाबाद बना अभेद्य किला
सरकार द्वारा की जा रही तैयारियों को देखकर ऐसा लग रहा है मानो पूरे इस्लामाबाद को एक अभेद्य सैन्य किले में तब्दील कर दिया गया है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, राजधानी और अटक के प्रमुख प्रवेश द्वारों पर लगभग 2000 कंटेनर तैनात किए जा रहे हैं। इन भारी-भरकम कंटेनर्स को सड़कों के बीचों-बीच खड़ा करके विशाल दीवारें खड़ी की जा रही हैं ताकि प्रदर्शनकारियों के वाहनों और काफिलों को रोका जा सके।
खासतौर पर उन संवेदनशील स्थानों को चिन्हित कर बैरिकेडिंग की जा रही है, जहां से प्रदर्शनकारियों के शहर की सीमा में प्रवेश करने की सबसे अधिक संभावना है। इसके अलावा, इस्लामाबाद के हाई-सिक्योरिटी रेड जोन, एक्सप्रेसवे, श्रीनगर हाईवे, मार्गल्ला रोड और फैसल एवेन्यू जैसे महत्वपूर्ण इलाकों की सुरक्षा को भी अत्यधिक मजबूत कर दिया गया है। इन स्थानों पर सुरक्षा बलों की विशेष गश्त शुरू कर दी गई है।
अटक जिला बना सुरक्षा का मुख्य केंद्र
इस पूरे सुरक्षा चक्र में अटक जिला सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्र बनकर उभरा है। भौगोलिक दृष्टि से अटक वह स्थान है जो खैबर पख्तूनख्वा प्रांत को पंजाब और इस्लामाबाद-रावलपिंडी क्षेत्र से जोड़ता है। इसी महत्व को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने यहां अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अकेले अटक जिले में ही लगभग 30000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जा रही है। सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले अटक ब्रिज और हारून ब्रिज पर बड़े पैमाने पर कंटेनर लगाए गए हैं और कंटीले तारों की मदद से बैरिकेडिंग की गई है।
इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर ले जाने के लिए पंजाब और सिंध प्रांतों से भी अतिरिक्त पुलिस बल को विशेष रूप से बुलाया गया है। आंकड़ों के अनुसार:
- पंजाब प्रांत से लगभग 19000 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात किया गया है।
- सिंध प्रांत से भी लगभग 1950 पुलिसकर्मियों के दस्ते को इस्लामाबाद बुलाया गया है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटा जा सके।
सुरक्षा के साए में आम जनजीवन
सुरक्षा के इन कड़े उपायों का सीधा असर स्थानीय नागरिकों के दैनिक जीवन पर भी पड़ने लगा है। इस्लामाबाद का बेहद संवेदनशील रेड जोन इलाका पूरी तरह से पुलिस और अर्धसैनिक बलों के घेरे में है। आम नागरिकों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए डी-चौक और नादरा चौक जैसे महत्वपूर्ण प्रवेश द्वारों पर बड़े-बड़े बैरिकेड और कंटेनर लगा दिए गए हैं।
प्रशासन ने आम जनता के लिए विशेष परामर्श जारी किया है, जिसमें लोगों से अपील की गई है कि वे बहुत जरूरी न होने पर इन प्रभावित रास्तों पर यात्रा करने से बचें। इसके साथ ही, सड़कों पर निकलने से पहले ट्रैफिक पुलिस द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करने को कहा गया है।
इस तनावपूर्ण माहौल का सबसे बड़ा असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ा है। राजधानी इस्लामाबाद के कई प्रमुख स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों को सुरक्षा कारणों से अस्थायी रूप से बंद रखने या ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके विपरीत, रावलपिंडी के प्रशासन ने फिलहाल अपने क्षेत्र में स्कूलों को सामान्य रूप से चालू रखने का फैसला किया है।
आखिर क्यों मचा है यह बवाल?
इस अभूतपूर्व किलेबंदी और तनाव के पीछे का मुख्य कारण इमरान खान की पार्टी पीटीआई द्वारा घोषित किया गया 27 सितंबर का मार्च है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि उनके इस देशव्यापी प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य जेल में बंद उनके पार्टी संस्थापक और देश के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की ससम्मान रिहाई की मांग करना है। पीटीआई के नेताओं का साफ तौर पर कहना है कि वे किसी भी दवाब के आगे नहीं झुकेंगे और उनका मार्च अपने तय समय पर आगे बढ़ेगा।
दूसरी तरफ, सरकार और स्थानीय प्रशासन का रुख भी बेहद सख्त है। सरकार का स्पष्ट स्टैंड है कि किसी भी गैर-कानूनी प्रदर्शन या रैली को राजधानी की शांति भंग करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। प्रशासन का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को राजधानी में प्रवेश करके अनिश्चितकाल के लिए शहर को ठप करने की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जा सकती।
अब जैसे-जैसे 27 सितंबर की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे इस्लामाबाद और इसके आसपास के क्षेत्रों में प्रतिबंध और अधिक कड़े होने की पूरी संभावना है। पूरे देश की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या पीटीआई का यह काफिला तमाम बाधाओं को पार करके राजधानी तक पहुंच पाएगा, या फिर सरकार द्वारा खड़े किए गए कंटेनर्स और भारी सुरक्षा घेरा उन्हें रास्ते में ही रोकने में सफल रहेगा। आने वाले 72 घंटे पाकिस्तान की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं।
Comments
0 comment