सर्दियों में रेल सफर होगा और भी सुरक्षित, पटरियों की दरारों पर अब तकनीक रखेगी पैनी नजर उत्तर प्रदेश 4 घंटे पहले 7
रेलवे ने कड़ाके की ठंड के दौरान पटरियों में आने वाली दरारों से निपटने के लिए एक नई सुरक्षा योजना लागू की है, जिसमें जीपीएस और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा।

सर्दियों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए रेलवे का बड़ा कदम

सर्दियों के मौसम में कड़ाके की ठंड के कारण रेल पटरियों के सिकुड़ने और उनमें सूक्ष्म दरारें आने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इन तकनीकी खामियों के कारण रेल हादसों की आशंका बनी रहती है, जिसे देखते हुए रेलवे बोर्ड ने एनसीआर समेत देशभर में ट्रैक की सुरक्षा को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। अब यात्री बेफिक्र होकर सफर कर सकें, इसके लिए रेलवे ने अपनी निगरानी व्यवस्था को पूरी तरह से आधुनिक बनाने का फैसला किया है।

पेट्रोलमैन अब रहेंगे GPS से लैस

रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव पेट्रोलमैन की ड्यूटी में किया जा रहा है। अब पटरियों की निगरानी करने वाले सभी पेट्रोलमैन को GPS ट्रैकर दिए जाएंगे। इसकी मदद से कंट्रोल रूम से उनकी लाइव लोकेशन और गतिविधियों पर सीधे नजर रखी जा सकेगी। पुरानी व्यवस्था में पेट्रोलमैन को गश्त और तापमान की जानकारी मैन्युअल रूप से दर्ज करनी पड़ती थी, जिसमें अपडेट मिलने में काफी देरी हो जाती थी। नई व्यवस्था के तहत यह पूरा काम रियल-टाइम में होगा, जिससे सुरक्षा के प्रति तत्काल प्रतिक्रिया देना संभव होगा।

ट्रैक मैनेजमेंट सिस्टम का होगा इस्तेमाल

पटरियों के तापमान को मापने के लिए अब कंटीन्यूअस रेल थर्मामीटर को हर समय चालू रखा जाएगा। इन थर्मामीटर से मिलने वाली सटीक जानकारी सीधे ट्रैक मैनेजमेंट सिस्टम में दर्ज होती रहेगी। इसके अलावा, सर्दियों में भोर के समय यानी सुबह 3 बजे से 6 बजे के बीच विशेष सतर्कता बरती जाएगी, क्योंकि इस समय तापमान में गिरावट के कारण पटरियों के टूटने का जोखिम सबसे ज्यादा होता है। पेट्रोलमैन और कीमैन की तैनाती भी मौसम और संभावित जोखिम के आधार पर तय की जाएगी। इसके साथ ही, अनुभवी कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा और उन्हें ठंड से बचने के लिए जरूरी सुरक्षा किट और गर्म कपड़े उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि वे अपना काम मुस्तैदी से कर सकें।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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