उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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दिल्ली के मालवीय नगर में हुई भीषण आग की घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में करीब दो दर्जन लोगों की जान जाने के बाद आसपास के शहरों में भी आग से सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। नोएडा में बड़ी तादाद में होटल, गेस्ट हाउस और पीजी चल रहे हैं, जहां रोजाना हजारों लोग ठहरते और रहते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या ये प्रतिष्ठान किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इसी फिक्र के मद्देनजर फायर विभाग ने पूरे जिले में विशेष जांच अभियान छेड़ दिया है।
सुरक्षा और फायर फाइटिंग व्यवस्था की पड़ताल जारी
मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) प्रदीप कुमार चौबे के मुताबिक, दिल्ली की घटना के बाद कमिश्नरेट और मुख्यालय स्तर से मिले निर्देशों के तहत जिले में नौ विशेष टीमें बनाई गई हैं। ये टीमें अगले सात दिनों तक अलग-अलग होटलों और दूसरे प्रतिष्ठानों में पहुंचकर अग्नि सुरक्षा इंतजामों को परखेंगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अभियान का मकसद संस्थानों को परेशान करना नहीं है, बल्कि यह पक्का करना है कि वहां लगे फायर सेफ्टी उपकरण चालू हालत में हों और कर्मचारियों को आपातकाल से निपटने का पर्याप्त प्रशिक्षण मिला हो। जहां भी कमियां मिल रही हैं, वहां नोटिस जारी कर जरूरी कार्रवाई की जा रही है।
कई रेस्टोरेंट में मिलीं चौंकाने वाली खामियां
जांच के दौरान कई प्रतिष्ठानों में हैरान करने वाली कमजोरियां सामने आई हैं। कुछ जगहों पर फायर पंप और अन्य सुरक्षा उपकरण तो लगे मिले, मगर उनका रखरखाव सही नहीं था। कहीं उपकरणों में प्रेशर लॉस की दिक्कत पाई गई, तो कहीं कर्मचारियों को उन्हें चलाने का प्रशिक्षण ही नहीं दिया गया था। वहीं कुछ संस्थानों में प्रशिक्षित स्टाफ तो मौजूद था, लेकिन सुरक्षा उपकरण तय मानकों के अनुरूप काम नहीं कर रहे थे।
फायर विभाग का कहना है कि केवल एनओसी हासिल कर लेना काफी नहीं है, बल्कि सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच और कर्मचारियों का प्रशिक्षण संस्थान की लगातार बनी रहने वाली जिम्मेदारी है।
इन गांवों में फैले हैं अवैध पीजी
नोएडा के कई गांवों और घनी आबादी वाले इलाकों में हालात और भी चिंताजनक नजर आते हैं। बरौला, नवादा, अट्टा, नया बांस, हरौला, बिशनपुरा, सदरपुर, रायपुर और निठारी जैसे क्षेत्रों में बेहद पतली गलियों में बड़ी संख्या में पीजी और छोटे होटल चल रहे हैं। इनमें से कई प्रतिष्ठान इतनी संकरी गलियों में हैं कि किसी बड़ी आग के दौरान दमकल वाहनों का वहां तक पहुंचना भी मुश्किल हो सकता है।
हाल ही में नवादा गांव के एक पीजी में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की घटना ने इस खतरे को एक बार फिर उजागर कर दिया। हालांकि समय रहते आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन वहां रह रहीं छात्राओं और महिलाओं के बीच अफरा-तफरी मच गई थी।
नोएडा में भी दिखी दिल्ली जैसी तस्वीर
आज सुबह सेक्टर-75 की एक सोसाइटी की 12वीं मंजिल पर लगी आग और सेक्टर-53 स्थित शताब्दी विहार की घटना ने भी सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए। शताब्दी विहार में नीचे रेस्टोरेंट और ऊपर पीजी चलने के कारण कई लोग इमारत के भीतर फंस गए थे, जिन्हें बाद में दमकल विभाग ने सुरक्षित बाहर निकाला। राहत की बात यह रही कि फायर विभाग का रिस्पांस टाइम बेहतर होने से बड़ा हादसा टल गया। हालांकि इस इमारत में न तो कोई वेंटिलेशन है और न ही आपातकालीन निकास।
सीएफओ प्रदीप कुमार चौबे ने माना कि जिले में बड़ी संख्या में अवैध पीजी संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बारे में नोएडा प्राधिकरण को पत्र भेजकर जरूरी कार्रवाई करने और अवैध प्रतिष्ठानों को बंद कराने की मांग की जाएगी।
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