'भारत में शरिया राज लाना चाहता था PFI', NIA अदालत ने 21 आरोपियों पर तय किए आरोप भारत एक घंटा पहले 3
पटियाला हाउस स्थित विशेष NIA अदालत ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से जुड़े 21 आरोपियों के खिलाफ आतंकी साजिश और देश के खिलाफ गंभीर अपराधों के आरोप तय किए हैं। इनमें संगठन के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन भी शामिल हैं।

नई दिल्ली: पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष NIA अदालत ने 'पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया' (PFI) से जुड़े 21 आरोपियों के विरुद्ध औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए हैं। इन आरोपियों की सूची में संगठन के चेयरमैन ओ. एम. ए. सलाम और वाइस चेयरमैन ई.एम. अबूबकर के नाम भी दर्ज हैं। यह पूरा मामला आतंकी साजिश रचने और देश के विरुद्ध संगीन अपराधों से जुड़ा हुआ है। आरोप तय करते हुए अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री से यह गंभीर संदेह उत्पन्न होता है कि आरोपी PFI और इसकी राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद के जरिए मिलकर भारत की लोकतांत्रिक एवं धर्मनिरपेक्ष सरकार को सत्ता से हटाने की साजिश में शामिल थे।

शरिया कानून पर आधारित खिलाफत स्थापित करने की योजना

अदालत ने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा कि वर्ष 2047 तक या उससे पहले भारत में शरिया कानून पर आधारित इस्लामिक खिलाफत कायम करने की योजना बनाई गई थी, और इसे राज्य के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से अंजाम तक पहुंचाने की बात कही गई थी। कोर्ट के अनुसार जांच में यह भी सामने आया कि 'विजन 2047' नाम का दस्तावेज PFI का ही था। अदालत ने बताया कि इस दस्तावेज में हिंदू नेताओं को निशाना बनाने तथा इराक और सीरिया में सक्रिय आतंकी संगठन ISIS को समर्थन देने जैसे फैसले शामिल थे, जो PFI की राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद की बैठकों में लिए गए थे।

संगठित तरीके से रची गई साजिश का आरोप

विशेष NIA अदालत ने स्पष्ट किया कि ये गतिविधियां आरोपियों के निजी कृत्य नहीं थीं, बल्कि यह सब PFI के 'मास्टरमाइंड्स' की अगुवाई में सुनियोजित और संगठित ढंग से किया गया था। इस मामले में ई.एम. अबूबकर समेत 20 अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने, UAPA के तहत आतंकी संगठन के लिए धन जुटाने, आतंकी गतिविधियों की साजिश रचने, टेरर कैंप संचालित करने और सदस्यों की भर्ती करने जैसे गंभीर आरोप तय किए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी, जिसमें सभी आरोपियों को अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा।

2022 में लगा था संगठन पर प्रतिबंध

उल्लेखनीय है कि सितंबर 2022 में NIA ने देश के विभिन्न हिस्सों से इन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। अब यह पूरा मामला ट्रायल के अगले चरण में प्रवेश कर चुका है, जहां अदालत आरोपों और सबूतों की विस्तृत पड़ताल करेगी। PFI एक विवादास्पद संगठन है, जिस पर देश में पाबंदी लगी हुई है। इसका गठन 2006 में हुआ था और इसका मुख्यालय केरल में था। देशभर में इसके खिलाफ कई संगीन आरोप लगे, जिनमें अवैध फंडिंग, हिंसक गतिविधियों की साजिश और देश विरोधी कार्यों में संलिप्तता शामिल हैं। वर्ष 2022 में केंद्र सरकार ने इसे UAPA के तहत प्रतिबंधित कर दिया था।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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