मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
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विचारों
पुलिस का जिक्र आते ही आमतौर पर लोगों के मन में सख्ती और कानून-व्यवस्था की तस्वीर उभरती है, लेकिन मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर में खाकी वर्दी एक अलग ही नजीर पेश कर रही है। यहां आर्थिक रूप से कमजोर मगर प्रतिभाशाली बच्चों के लिए चलाई जा रही 'एसपी की पाठशाला' ज्ञान का ऐसा केंद्र बन चुकी है, जहां से पढ़कर अब तक सैकड़ों विद्यार्थी सरकारी सेवाओं में अपनी जगह बना चुके हैं। यह कोशिश एक ओर जहां बच्चों के भविष्य को आकार दे रही है, वहीं दूसरी ओर पुलिस और आम जनता के बीच की दूरी को भी पाट रही है।
2020 में पड़ी थी इस सेवा की नींव
'एसपी की पाठशाला' का सूत्रपात तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अमित सिंह ने वर्ष 2020 में किया था। उनके बाद जबलपुर में पदस्थ हुए हर पुलिस अधीक्षक ने इस परंपरा को न सिर्फ आगे बढ़ाया, बल्कि उसे और मजबूत भी किया। आज भी यह पाठशाला पूरी निष्ठा के साथ चल रही है और बीते 6 वर्षों में यहां से पढ़े 339 से ज्यादा छात्रों का सरकारी नौकरी में चयन हो चुका है।
कैसे मिलता है छात्रों को दाखिला
यह पाठशाला खासतौर पर उन होनहार विद्यार्थियों के लिए है, जो प्रतिभा से भरपूर हैं, मगर पैसों की तंगी के चलते महंगे कोचिंग संस्थानों की फीस नहीं चुका सकते। इसमें गरीब परिवारों के बच्चों के साथ-साथ पुलिस परिवार के बच्चों को भी निःशुल्क कोचिंग दी जाती है। यहां सिर्फ किताबी जानकारी ही नहीं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बारीकी भी सिखाई जाती है।
लिखित से लेकर शारीरिक परीक्षा तक की तैयारी
इस पाठशाला की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां छात्रों को लिखित परीक्षा और शारीरिक परीक्षा, दोनों के लिए तैयार किया जाता है। इसकी जिम्मेदारी 10 अनुभवी पुलिस अधिकारी खुद संभाल रहे हैं। अनुभवी प्रशिक्षक विद्यार्थियों को गणित, रीजनिंग, सामान्य ज्ञान, अंग्रेजी और इतिहास जैसे विषय पढ़ाते हैं।
ग्राउंड प्रैक्टिस की शुरुआत सुबह 5:30 बजे शारीरिक प्रशिक्षण से होती है, जबकि दोपहर 12 बजे तक पढ़ाई चलती है। इसके अलावा समय-समय पर वरिष्ठ अधिकारी छात्रों को सफलता के गुर भी सिखाते हैं।
दाखिले के लिए छात्रों में होड़
जबलपुर पुलिस लाइन और दिशा लाइब्रेरी में संचालित इस पाठशाला को लेकर छात्रों का उत्साह देखते ही बनता है। यही वजह है कि न केवल जबलपुर, बल्कि दूसरे जिलों के विद्यार्थी भी यहां दाखिले के लिए उत्सुक रहते हैं। बड़े अधिकारी खुद कक्षा में पहुंचकर छात्रों का मार्गदर्शन करते हैं और उन्हें कामयाबी के 'सक्सेस मंत्र' देते हैं।
कुल मिलाकर, अभावों में पल रहे जिन बच्चों की आंखों में अफसर बनने का सपना है, उनके लिए जबलपुर पुलिस की यह अनूठी पहल किसी मसीहा से कम नहीं है।
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