इलाहाबाद हाईकोर्ट का कड़ा रुख: नाबालिग की रिहाई का आदेश, मजिस्ट्रेट और पुलिस से जवाब-तलब उत्तर प्रदेश 3 महीने पहले 54
चोरी के एक मामले में नाबालिग को बिना उम्र की जांच किए तीन बार रिमांड पर जेल भेजने को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैर-कानूनी ठहराते हुए तुरंत रिहाई का आदेश दिया है। कोर्ट ने ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट और पुलिस से व्यक्तिगत हलफनामा और जवाब मांगा है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चोरी से जुड़े एक मामले में एक नाबालिग किशोर को जेल भेजे जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। अदालत ने किशोर की हिरासत को पहली नजर में ही पूरी तरह कानून के खिलाफ मानते हुए उसे फौरन रिहा करने का आदेश दिया है।

क्या है पूरा मामला

इस प्रकरण में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट और पुलिस की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। किशोर की उम्र की कोई जांच किए बिना और सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय दिशा-निर्देशों की अनदेखी करते हुए उसे तीन बार रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

कोर्ट की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट के इस रवैये को महज यांत्रिक कार्रवाई करार दिया, जिसमें मामले की हकीकत पर ध्यान दिए बगैर औपचारिक रूप से आदेश पारित कर दिए गए। अदालत ने इसे किशोर के अधिकारों के साथ खिलवाड़ माना।

मजिस्ट्रेट और पुलिस से जवाब-तलब

हाईकोर्ट ने संबंधित ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने और पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देने को कहा है। साथ ही पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए जवाब मांगा गया है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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