बच्चा याद किया हुआ भूल जाता है? रोज सुबह कराएं मां सरस्वती की इस वंदना का पाठ धर्म एक घंटा पहले 3
मां सरस्वती को विद्या और ज्ञान की देवी माना गया है। माना जाता है कि बच्चे यदि रोज सुबह नियमित रूप से इस वंदना का पाठ करें तो उनकी याददाश्त, वाणी और आत्मविश्वास तीनों में सुधार आता है।

Saraswati Vandana for Children: हिंदू परंपरा में मां सरस्वती को विद्या और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। मान्यता है कि इनकी उपासना से बुद्धि प्रखर होती है और मन में आत्मविश्वास का संचार होता है। यही वजह है कि बच्चों को विशेष रूप से मां शारदा की आराधना करने की सलाह दी जाती है। कहा जाता है कि जो बालक प्रतिदिन नियमपूर्वक मां सरस्वती की वंदना का पाठ करता है, उसे पढ़ाई-लिखाई में कभी कठिनाई नहीं होती और उसकी स्मरण-शक्ति सुदृढ़ बनी रहती है। यदि आपका बच्चा भी पढ़ने के थोड़ी देर बाद ही सब कुछ भूल जाता है, तो उसके लिए मां सरस्वती की यह दिव्य वंदना अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है।

यदि बच्चों में रोज सुबह स्कूल जाने से पहले इस वंदना का पाठ करने की आदत डाल दी जाए, तो इससे केवल उनकी कक्षा में प्रदर्शन ही बेहतर नहीं होगा, बल्कि उनके आत्मविश्वास में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

सरस्वती वन्दना (Saraswati Vandana)

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥१॥

शुक्लां ब्रह्मविचार सारपरमामाद्यां
जगद्व्यापिनींवीणापुस्तकधारिणीमभयदां।
जाड्यान्धकारापहाम्‌हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं
पद्मासने संस्थिताम्‌वन्दे तां परमेश्वरीं
भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌॥2॥

सरस्वती वंदना का अर्थ

विद्या की देवी भगवती सरस्वती कुन्द के पुष्प, चन्द्रमा, हिमराशि और मोती के हार के समान धवल वर्ण की हैं तथा श्वेत वस्त्र धारण किए हुए हैं। उनके हाथ में वीणा-दण्ड सुशोभित है, उन्होंने श्वेत कमलों पर आसन ग्रहण किया है और ब्रह्मा, विष्णु एवं शंकर आदि देवताओं द्वारा वे सदैव पूजित हैं। समस्त जड़ता और अज्ञान को मिटाने वाली वही मां सरस्वती हमारी रक्षा करें।

शुक्लवर्ण वाली, सम्पूर्ण चराचर जगत् में व्याप्त, आदिशक्ति, परब्रह्म के विषय में किए गए चिन्तन के सार रूप परम उत्कर्ष को धारण करने वाली, समस्त भयों से अभय प्रदान करने वाली, अज्ञान के अंधकार को दूर करने वाली, हाथों में वीणा, पुस्तक और स्फटिक की माला धारण करने वाली, पद्मासन पर विराजमान, बुद्धि प्रदान करने वाली एवं सर्वोच्च ऐश्वर्य से अलंकृत देवी सरस्वती की मैं वन्दना करता हूं या करती हूं।

सरस्वती वंदना के पाठ की विधि

  • सरस्वती वंदना का पाठ प्रातःकाल करना अत्यंत शुभ माना जाता है, इसलिए बच्चों को स्कूल जाने से पहले ही इस वंदना का पाठ कराएं।
  • पाठ आरंभ करने से पूर्व मां सरस्वती की प्रतिमा के सामने दीपक प्रज्वलित करें।
  • इसके बाद बच्चे को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बिठाएं।
  • फिर बच्चे से इस वंदना का कम से कम 3 बार पाठ कराएं।
  • जब बच्चा प्रतिदिन इसका पाठ करने लगेगा, तो कुछ ही दिनों में यह वंदना उसे भली-भांति याद हो जाएगी।

इस वंदना के पाठ के लाभ

  • माना जाता है कि इस वंदना का पाठ करने से बच्चे की स्मरण-शक्ति मजबूत होती है, जिससे पढ़ी हुई बात उसे लंबे समय तक याद रहती है।
  • इस वंदना को पढ़ने से वाणी में भी निखार आता है। जब बच्चा संस्कृत में लिखी इस वंदना का शुद्ध उच्चारण करता है, तो उसकी जुबान साफ होती है।
  • इसके पाठ से बच्चों के आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है।
चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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