एकादशी माता कौन हैं और कैसे हुआ उनका जन्म, जानिए इस व्रत के पीछे की पौराणिक कहानी धर्म एक घंटा पहले 3
सनातन धर्म में एकादशी व्रत का बड़ा महत्व है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसका सीधा संबंध एकादशी माता की उत्पत्ति से है। जानिए भगवान विष्णु के तेज से कैसे प्रकट हुईं एकादशी माता और क्या है इसके पीछे का रहस्य।

एकादशी माता का प्राकट्य

हिंदू धर्म में एकादशी का उपवास पूर्णतः भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। हालांकि, इस व्रत के पीछे एक अद्भुत पौराणिक कथा छिपी है जो एकादशी माता के जन्म से जुड़ी है। मान्यताओं के अनुसार, एकादशी माता का अवतरण साक्षात् भगवान विष्णु के शरीर से हुआ था। श्रीहरि ने उन्हें यह विशेष वरदान दिया था कि जो भी भक्त उनके जन्म की तिथि पर विधि-विधान से व्रत का पालन करेगा, उसके समस्त पाप मिट जाएंगे और मृत्यु के पश्चात उसे भगवान के परमधाम की प्राप्ति होगी।

मुर राक्षस और युद्ध की कहानी

पद्म पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, प्राचीन काल में 'मुर' नामक एक अत्यंत शक्तिशाली राक्षस ने देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अपना आधिपत्य जमा लिया था। घबराए हुए देवता देवराज इंद्र के नेतृत्व में भगवान शिव के पास गए, जिन्होंने उन्हें भगवान विष्णु की शरण में जाने का मार्ग दिखाया। जब सभी देवता वैकुंठ पहुंचे और श्रीहरि से रक्षा की प्रार्थना की, तो भगवान विष्णु ने गरुड़ पर सवार होकर राक्षस मुर की नगरी चंद्रावती की ओर प्रस्थान किया। वहां पहुंचकर उन्होंने मुर की विशाल सेना का विनाश कर दिया, जिसके बाद राक्षस मुर स्वयं युद्ध के मैदान में उतरा।

कैसे हुई एकादशी माता की उत्पत्ति

भगवान विष्णु और राक्षस मुर के बीच एक लंबा और भीषण युद्ध चला। युद्ध के दौरान भगवान विष्णु विश्राम हेतु एक गुफा में गए, जहां मुर ने छिपकर उन पर प्रहार करने का प्रयास किया। ठीक उसी समय भगवान के दिव्य तेज से एक अत्यंत तेजस्वी देवी प्रकट हुईं। उनके हाथों में विभिन्न प्रकार के दिव्य शस्त्र सुसज्जित थे। इन देवी ने युद्ध करते हुए पल भर में ही राक्षस मुर का अंत कर दिया। जब भगवान विष्णु की निद्रा टूटी और उन्होंने देवी के पराक्रम को देखा, तो वे अत्यंत प्रसन्न हुए। देवी के वरदान मांगने पर उन्होंने यही प्रार्थना की कि उनके उत्पन्न होने की तिथि पर जो भी भक्त श्रद्धा से व्रत करेगा, उसे मोक्ष और पुण्य की प्राप्ति हो। भगवान ने यह वरदान स्वीकार किया और तभी से एकादशी व्रत की परंपरा का आरंभ माना जाता है।

प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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