एनसीआर का बदलेगा नक्शा: 8 नए शहर, पंचग्राम और 30 मिनट में एक से दूसरे शहर का सफर, जानें नए मास्टर प्लान की खास बातें राष्ट्रीय राजनीति 3 घंटे पहले 2
एनसीआर मास्टर प्लान 2041 के तहत 5-8 नए ग्रीनफील्ड शहर बसाने, हाई-स्पीड रेल नेटवर्क और हर शहर तक 30 मिनट की कनेक्टिविटी की योजना तैयार की गई है। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड 16 जून की बैठक से पहले इस रीजनल प्लान को राज्यों के साथ साझा कर चुका है।

जाम में फंसे घंटों के थकाऊ सफर, घनी आबादी और सड़कों की भीड़—आज दिल्ली-एनसीआर के लोग इन्हीं परेशानियों से जूझ रहे हैं। लेकिन कल्पना कीजिए कि एनसीआर ऐसा हो जाए जहां मिनटों में एक शहर से दूसरे शहर पहुंचा जा सके, कंक्रीट की भीड़ की जगह पेड़ों से भरी हरी-भरी टाउनशिप हों और साफ-सुथरे हाईटेक गांव हों। यह तस्वीर भले ही किसी सपने जैसी लगे, पर आने वाले वर्षों में यह हकीकत बन सकती है। एनसीआर का अगला मास्टर प्लान इन्हीं संभावनाओं को धरातल पर उतारने की तैयारी कर रहा है।

अगले 15 साल की रूपरेखा

एनसीआर का यह नया खाका सिर्फ एक योजना भर नहीं, बल्कि अगले 15 वर्षों का रोडमैप है। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड अगले हफ्ते से रीजनल प्लान 2041 को अपनाने जा रहा है। इस मास्टर प्लान में उन तमाम समस्याओं का हल सुझाया गया है, जिनसे आज क्षेत्र के निवासी रोज़ाना दो-चार होते हैं, साथ ही यह तरक्की का एक नया चेहरा भी सामने रखता है।

5-8 नए शहर बसाने का प्रस्ताव

मास्टर प्लान 2041 के अनुसार एनसीआर रीजन में 5-8 नए शहर बसाए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इन शहरों तक पहुंचने की रफ्तार इतनी तेज़ रखने की योजना है कि किसी भी शहर से दिल्ली महज़ 30 मिनट में पहुंचा जा सके। 30 मिनट कनेक्टिविटी की यह अवधारणा अपने आप में बेहद दिलचस्प है।

एनसीआर प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) दिल्ली समेत एनसीआर के विभिन्न शहरों के बीच हाई-स्पीड ट्रेन नेटवर्क के ज़रिए यात्रा का समय आधे घंटे तक सीमित रखने की तैयारी कर रहा है।

16 जून की बैठक से पहले राज्यों से साझा

इस योजना को बोर्ड की 16 जून को होने वाली बैठक से पहले संबंधित राज्यों के साथ साझा किया जा चुका है। प्लान में दिल्ली को अतिक्रमण से मुक्त करने के लिए पुरानी बस्तियों यानी ब्राउनफील्ड क्षेत्रों के पुनर्विकास और नए हरे-भरे ग्रीनफील्ड इलाकों में नए शहर बसाने का सुझाव दिया गया है।

UP, हरियाणा और राजस्थान में ग्रीनफील्ड टाउनशिप

योजना में उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के एनसीआर सब-रीजन में 5-8 नई ग्रीनफील्ड टाउनशिप बनाने की संभावना जताई गई है। कहा गया है कि चाहे ब्राउनफील्ड हों या ग्रीनफील्ड, सभी नई बस्तियों में महाराष्ट्र के स्मार्ट सिटी ऑरिक की तर्ज़ पर आधुनिक स्मार्ट सिविक सुविधाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किए जाएंगे।

एक्सप्रेसवे के किनारे बसेंगे शहर और पंचग्राम

प्लान में एनसीआर राज्यों को एक्सप्रेसवे और ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर जैसे प्रमुख परिवहन गलियारों के किनारे टाउनशिप बसाने की सलाह दी गई है। इसमें उत्तर प्रदेश सरकार के यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एरिया—जो 20 लाख आबादी वाला ग्रीनफील्ड शहर होगा—और हरियाणा सरकार के KMP एक्सप्रेसवे/WPE के आसपास ‘पंचग्राम्स’ विकसित करने की योजनाओं का ज़िक्र किया गया है।

हर शहर तक 30 मिनट की कनेक्टिविटी

पूरी योजना की सबसे अहम बात हर शहर तक 30 मिनट की कनेक्टिविटी है। प्लान में समूचे एनसीआर क्षेत्र में हाई-स्पीड कनेक्टिविटी पर ज़ोर देते हुए कहा गया है कि एनसीआर के भीतर यात्रा का समय 30 मिनट से कम रखा जाए। यह सफर सुपरफास्ट ट्रेन और हेली-टैक्सी के ज़रिए पूरा हो, जबकि अन्य ट्रेनों से 60 मिनट में और कार से 2-3 घंटे के भीतर गंतव्य तक पहुंचा जा सके, ऐसी व्यवस्था बनाई जाए।

मास्टर प्लान के मुताबिक दिल्ली को एनसीआर के प्रमुख शहरों से 30 मिनट की सुपरफास्ट ट्रेन कनेक्टिविटी मिलनी चाहिए। इसमें एनसीआर की सीमा से दिल्ली तक “30 मिनट फास्ट हाई क्वालिटी लिमिटेड-स्टॉप मास ट्रांजिट रेल सिस्टम” की संभावना तलाशने का सुझाव दिया गया है।

संस्थानों के लिए आवासीय व्यवस्था

इसके साथ ही एनसीआर के संस्थानों को अपने ही प्लॉट पर अपार्टमेंट, हॉस्टल और ट्रांजिट हाउसिंग जैसी आवासीय सुविधाएं विकसित करने की सलाह दी गई है। प्लान के अनुसार संस्थानों को आवंटित भूमि का 15-20% हिस्सा आवासीय उपयोग के लिए दिया जा सकता है।

2030 तक दुनिया का सबसे बड़ा शहरी क्षेत्र

इस पूरी योजना में अनुमान लगाया गया है कि 2030 तक दिल्ली-एनसीआर टोक्यो को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला शहरी क्षेत्र बन जाएगा। अगले 15 वर्षों में 3 करोड़ से ज़्यादा अतिरिक्त आबादी को समायोजित करने और मौजूदा बुनियादी ढांचे को उन्नत बनाने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की ज़रूरत होगी।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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