जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जे की मांग को धार देगी नेशनल कॉन्फ्रेंस, मानसून सत्र में दिल्ली पहुंचेंगे उमर अब्दुल्ला के विधायक जम्मू-कश्मीर 3 महीने पहले 46
नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक संसद के मानसून सत्र के पहले दिन दिल्ली पहुंचकर जम्मू-कश्मीर को दोबारा पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग पर विरोध दर्ज कराएंगे। पार्टी ने इसे अपनी सबसे पहली राजनीतिक प्राथमिकता बताया है।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने जम्मू-कश्मीर को फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मुहिम को और तेज करने का फैसला किया है। पार्टी के विधायक संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन दिल्ली पहुंचेंगे और इस मांग पर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। साथ ही वे प्रदेश के लोगों के लिए संवैधानिक गारंटी की मांग भी रखेंगे। यह निर्णय पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की अध्यक्षता में हुई विधायकों की एक लंबी बैठक में लिया गया।

राज्य के दर्जे के लिए और मजबूत होगा अभियान

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली के लिए अपने राजनीतिक अभियान को और धार देने का संकल्प लिया है। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में पार्टी के मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने कहा कि NC राष्ट्रीय राजधानी में इस मुद्दे को पूरी मजबूती के साथ उठाएगी।

पार्टी इस बात पर जोर देगी कि जम्मू-कश्मीर के लोग अपने लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों की वापसी के हकदार हैं।

राज्य का दर्जा बहाल कराना सबसे बड़ी प्राथमिकता

तनवीर सादिक ने कहा, 'अब वह समय आ गया है कि हम वह सब कुछ वापस हासिल करें, जो हमसे छीन लिया गया है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य का दर्जा दोबारा बहाल कराना पार्टी की सबसे पहली राजनीतिक प्राथमिकता है।

अन्य दलों से भी मांगा जाएगा समर्थन

पार्टी नेताओं ने लोकतांत्रिक और संवैधानिक रास्तों से इस मुद्दे को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बताया कि विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल संसद सत्र के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों से इस मांग के लिए समर्थन जुटाएगा।

सात घंटे चली बैठक में बना अहम फैसला

मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने यह जानकारी NC और उसके सहयोगी दलों के विधायकों तथा सांसदों की करीब 7 घंटे तक चली बैठक के बाद दी। उन्होंने बताया कि बैठक में आरक्षण और शराबबंदी समेत तमाम विवादित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

2019 में समाप्त हुआ था राज्य का दर्जा

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर 2019 को जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया था। इससे पहले 5 अगस्त, 2019 को भारत सरकार ने आर्टिकल 370 को निरस्त किया और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम पारित कर इस क्षेत्र को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप