मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड में टूटा परिवार, इलाज के बाद घर ले जाने आए भाई का मिला शव बिहार 3 महीने पहले 53
मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल में लगी भीषण आग ने रतनपुर निवासी अमित कुमार का परिवार उजाड़ दिया, जो आईसीयू में भर्ती अपने छोटे भाई शशांक को स्वस्थ होने के बाद घर ले जाने की तैयारी में थे। आग के बाद उन्हें भाई का शव लेकर लौटना पड़ा।

बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में हुए भयावह अग्निकांड ने एक साथ कई परिवारों की खुशियों पर ग्रहण लगा दिया। ऐसे ही परिवारों में रतनपुर निवासी अमित कुमार का परिवार भी है, जो अपने छोटे भाई शशांक को इलाज पूरा होने के बाद घर ले जाने की तैयारी कर रहा था। मगर नियति ने कुछ और ही लिख रखा था। जिस अस्पताल से शशांक को ठीक होकर घर लौटना था, वहीं इतनी भीषण आग भड़की कि परिजनों को उनका शव लेकर घर लौटना पड़ा।

दुर्घटना में घायल होकर भर्ती हुए थे शशांक

अमित कुमार के अनुसार, उनके छोटे भाई शशांक कुछ दिन पहले एक सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे और प्रसाद हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा था। वह आईसीयू में भर्ती थे और उनकी हालत में लगातार सुधार हो रहा था। शशांक पटना में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (MR) के रूप में काम करते थे और 29 मई को सड़क हादसे में घायल होने के बाद से उनका उपचार जारी था।

अमित बताते हैं, “भाई अब ठीक होने लगा था। रोज हमसे पूछता था कि घर कब चलेंगे। उसे घर लौटने की जल्दी थी। हमें भी लग रहा था कि कुछ दिनों में पूरी तरह स्वस्थ होने पर उसे लेकर घर लौट जाएंगे, लेकिन गुरुवार की सुबह सब कुछ बदल गया।”

आधी रात के बाद मची चीख-पुकार

अमित ने बताया कि बुधवार रात करीब 11 बजे वह भाई से मिलकर आईसीयू के बाहर बने वेटिंग एरिया में आराम करने चले गए थे। सुबह करीब तीन बजे अचानक अस्पताल परिसर में चीख-पुकार और भगदड़ मच गई। लोगों को भागते देख उन्होंने जब पूछताछ की तो पता चला कि आईसीयू में आग लग गई है। यह जानकारी मिलते ही उन्होंने एक पल भी गंवाए बिना चौथे तल्ले की ओर दौड़ लगा दी।

वहां पहुंचने पर पूरा आईसीयू काले धुएं से भरा हुआ था। कुछ भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था और सांस लेना तक दूभर हो रहा था। इसके बावजूद अमित ने अपने चेहरे पर गमछा बांधा और छोटे भाई को खोजने के लिए अंदर घुस गए।

अमित की जुबानी आखिरी कोशिश

“मैं अंदाज से बेड की तरफ बढ़ रहा था तभी देखा कि मेरा भाई अपने बेड के दाहिनी ओर नीचे गिरा हुआ है। मैंने उसे किसी तरह उठाया और गमछे के सहारे बांधकर बाहर निकालने लगा। मैं उसे बचाने की पूरी कोशिश कर रहा था। उसे लेकर सीढ़ियों से नीचे उतर रहा था, लेकिन शायद बहुत देर हो गई थी। बाहर निकालकर जब मैंने उसकी धड़कन देखी तो कोई हरकत नहीं हो रही थी। मैंने अपने भाई के साथ-साथ उसके आसपास के 4 से 5 लोगों को भी बाहर निकाला था, लेकिन कोई जीवित नहीं था।”

परिजन ने अस्पताल पर लगाया गंभीर आरोप

अमित का आरोप है कि आग लगने के बाद अस्पताल के कई कर्मी मरीजों को उनके हाल पर छोड़कर खुद बाहर निकल गए। उनका कहना है कि यदि समय रहते लोगों को सचेत किया जाता और मरीजों को बाहर निकालने का प्रयास होता, तो कई जानें बचाई जा सकती थीं।

अब अमित के मन में सिर्फ एक सवाल बार-बार उठ रहा है—जिस भाई को स्वस्थ कर घर ले जाने आए थे, उसे इस तरह खोना आखिर क्यों पड़ा?

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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