मुजफ्फरपुर अग्निकांड: धुएं से भरे ICU में घुसकर 7 लोगों की जान बचाने वाले युवक ने सुनाई खौफनाक दास्तां बिहार 3 महीने पहले 58
मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल में गुरुवार तड़के लगी भीषण आग के दौरान धीरज गिरी ने अपनी जान जोखिम में डालकर आईसीयू में फंसे सात मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस दौरान खिड़की का शीशा तोड़ते समय उनका हाथ बुरी तरह कट गया।

बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में गुरुवार तड़के भड़की भीषण आग ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। चारों ओर चीख-पुकार और भगदड़ का माहौल था, लेकिन इसी अफरा-तफरी के बीच एक युवक ने अपनी जान की परवाह किए बिना सात लोगों को मौत के मुंह से खींच निकाला। यह युवक हैं धीरज गिरी, जो अस्पताल के बगल में मौजूद एक मिठाई की दुकान में काम करते हैं।

नींद टूटी तो कानों में पड़ीं चीखें

धीरज ने बताया कि गुरुवार सुबह करीब तीन बजे वह दुकान में सो रहे थे। तभी अचानक लोगों के चीखने-चिल्लाने और भागने की आवाजें उनके कानों में पड़ीं। बाहर निकलकर देखा तो प्रसाद हॉस्पिटल की चौथी मंजिल पर बने आईसीयू से आग की ऊंची लपटें और काला धुआं उठ रहा था। मरीज और उनके परिजन जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे।

जब किसी की हिम्मत नहीं हुई अंदर जाने की

धीरज के मुताबिक उस वक्त कोई भी आईसीयू के भीतर कदम रखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। उन्होंने कहा, ‘मैं तुरंत चौथी मंजिल पर पहुंच गया। अंदर का नजारा बेहद डरावना था। पूरा वार्ड धुएं से भरा हुआ था और कुछ भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था। मरीज अपनी जान बचाने के लिए छटपटा रहे थे।’

एक-एक कर निकाले सात लोग

उन्होंने बताया कि दम घोंट देने वाले धुएं और आग की लपटों के बीच वह आईसीयू में घुस गए और एक-एक करके सात लोगों को बाहर निकाला। किसी को चादर में लपेटकर, किसी को गोद में उठाकर तो किसी को बेड समेत सुरक्षित जगह तक पहुंचाया।

शीशा तोड़ा तो कट गया हाथ

धीरज ने उस पल को याद करते हुए कहा, ‘जब मेरा भी दम घुटने लगा और लगा कि शायद मैं बाहर नहीं निकल पाऊंगा, तब मैंने खिड़की का शीशा तोड़ दिया ताकि धुआं बाहर निकल सके। इस दौरान मेरा हाथ बुरी तरह कट गया, लेकिन उस समय लोगों की जान बचाना सबसे जरूरी था।’

आईसीयू के भीतर दिल दहला देने वाला मंजर

धीरज के अनुसार आईसीयू के अंदर हालात बेहद भयावह थे। कुछ मरीज ऑक्सीजन लगी अवस्था में ही बेड से उतरकर बाहर भागने की कोशिश कर रहे थे। कई मरीज जमीन पर पड़े मदद के लिए गुहार लगा रहे थे, जबकि कुछ के चेहरे आग और धुएं की वजह से झुलस चुके थे।

आंखों के सामने अब भी घूमता है वही दृश्य

घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी धीरज उस खौफनाक मंजर को भुला नहीं पा रहे हैं। उनकी आंखों के सामने आज भी वही दृश्य घूम रहा है। उस रात जब ज्यादातर लोग खुद को बचाने में जुटे थे, तब धीरज गिरी कई परिवारों के लिए फरिश्ता बनकर सामने आए। उनके चेहरे पर अब भी धुएं के निशान साफ देखे जा सकते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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