मंगल के रहस्य उजागर करने वाला NASA का अंतरिक्ष यान MAVEN हुआ खामोश, लाल ग्रह के पीछे गया और गायब विश्व एक घंटा पहले 2
मंगल के वातावरण का अध्ययन करने वाले अपने ऐतिहासिक MAVEN मिशन को नासा ने औपचारिक रूप से समाप्त घोषित कर दिया है। दिसंबर 2025 में लाल ग्रह के पीछे से गुजरते समय यान से संपर्क टूट गया था।

लाल ग्रह मंगल की एक-एक परत खोलकर रख देने वाला नासा का एक ऐतिहासिक अभियान अब हमेशा के लिए शांत हो गया है। मंगल के वातावरण को समझने के मकसद से भेजे गए MAVEN (Mars Atmosphere and Volatile Evolution) अंतरिक्ष यान का अब पृथ्वी से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है, और नासा ने इस मिशन को आधिकारिक रूप से समाप्त करने का निर्णय ले लिया है। करीब 11 साल तक निरंतर काम करते रहे इस अभियान को मंगल ग्रह को समझने की दिशा में नासा की सबसे बड़ी कामयाबियों में गिना जाता है।

मंगल के पीछे जाते ही टूटा संपर्क

नासा के अनुसार, MAVEN से आखिरी बार 6 दिसंबर 2025 को संपर्क हो पाया था। उस वक्त यह अंतरिक्ष यान मंगल ग्रह के पीछे से गुजर रहा था। इसके तुरंत बाद उसका सिग्नल अचानक गायब हो गया और दोबारा कोई संपर्क स्थापित नहीं हो सका। इस गड़बड़ी की पड़ताल के लिए फरवरी 2026 में एक विशेष जांच बोर्ड गठित किया गया। कई महीनों की छानबीन के बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे कि अब इस यान को फिर से सक्रिय कर पाना मुमकिन नहीं है।

एक साल के लिए बना था, चला 11 साल से भी ज्यादा

MAVEN को 18 नवंबर 2013 को लॉन्च किया गया था और 21 सितंबर 2014 को यह मंगल की कक्षा में दाखिल हुआ था। खास बात यह है कि शुरुआत में इस मिशन को सिर्फ एक साल के लिए ही डिजाइन किया गया था। मगर इसने अपनी तय अवधि से करीब 10 गुना ज्यादा समय तक काम किया और लगातार वैज्ञानिक आंकड़े धरती पर भेजता रहा।

आखिर मिशन का अंत कैसे हुआ?

शुरुआती जांच में सामने आया है कि मंगल के पीछे से गुजरने के बाद यह अंतरिक्ष यान बेकाबू होकर तेज रफ्तार से घूमने लगा। इसका असर उसकी दिशा और कक्षा, दोनों पर पड़ा। धीरे-धीरे बैटरियों की ऊर्जा समाप्त हो गई और बिजली आपूर्ति बंद होते ही उसकी संचार प्रणाली भी ठप पड़ गई। इसके चलते यान पृथ्वी से कोई संपर्क नहीं कर सका। नासा का कहना है कि असल तकनीकी वजहों की जांच अब भी जारी है और विस्तृत रिपोर्ट इस साल के अंत तक सामने आ सकती है।

मंगल को समझने में अहम योगदान

MAVEN नासा का पहला ऐसा मिशन था जिसका मुख्य उद्देश्य मंगल के वातावरण और समय के साथ उसमें आए बदलावों को समझना था। इस अभियान की बदौलत वैज्ञानिकों को यह समझ पाने में मदद मिली कि अरबों साल पहले मंगल पर मौजूद घना वातावरण और पानी आखिर कैसे खत्म हो गया और यह ग्रह आज इतना सूखा और ठंडा क्यों बन गया।

भविष्य के मानव मिशनों के लिए क्यों अहम

नासा मुख्यालय में प्लैनेटरी साइंस डिवीजन की निदेशक लुईस प्रॉक्टर ने कहा कि MAVEN से जुटाई गई जानकारी आने वाले मानव मिशनों के लिए बेहद कीमती है। उनके मुताबिक, इस अभियान ने वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद की है कि मंगल पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को किस तरह के रेडिएशन से जुड़े खतरों का सामना करना पड़ सकता है और उनकी सुरक्षा के लिए कौन-से उपाय जरूरी होंगे।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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