5300 साल पुरानी ममी की आंत से निकले खमीर से बनी ब्रेड, स्वाद लाजवाब पर रेसिपी सुनकर आ जाए उबकाई विश्व एक घंटा पहले 2
वैज्ञानिकों ने आइसमैन ओत्जी की हजारों साल पुरानी ममी की आंतों में मिले खमीर को दोबारा जीवित कर उससे सॉरडो ब्रेड तैयार की है। यह खोज सिर्फ खाने तक सीमित नहीं, बल्कि प्रदूषण की सफाई जैसी नई संभावनाओं के रास्ते भी खोल सकती है।

अगर कोई स्वादिष्ट खाना सामने आ जाए, तो हर किसी के मन में उसकी रेसिपी जानने की इच्छा होती है। ऐसी ही एक बेहद स्वादिष्ट ब्रेड वैज्ञानिकों ने कड़ी मेहनत से तैयार की है। लेकिन जैसे ही आप इसकी रेसिपी सुनेंगे, मुमकिन है कि आपको उबकाई आने लगे।

हजारों साल पुराने रहस्य से जुड़ी कहानी

करीब 5,300 साल पहले आल्प्स पर्वत में रहने वाला एक व्यक्ति आज भी वैज्ञानिकों के लिए एक पहेली बना हुआ है। दुनिया उसे आइसमैन ओत्जी (Otzi the Iceman) के नाम से जानती है। अब शोधकर्ताओं ने उसकी ममी में एक ऐसा सूक्ष्म जीव खोज निकाला है, जिसने सबको चौंका दिया है। इससे भी ज्यादा दिलचस्प यह है कि वैज्ञानिकों ने इस जीव के साथ किया क्या। उन्होंने हजारों साल से ममी के भीतर पड़े इस यीस्ट को मानो नींद से जगाया और फिर इसका ऐसा इस्तेमाल किया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी।

शोधकर्ताओं को ओत्जी की ममी की आंतों में एक खास प्रकार का यीस्ट यानी खमीर मिला था। जब इस ममी को बर्फ में रखा गया, तभी से यह जीव हजारों साल की यात्रा उसके साथ करता रहा। हैरान करने वाली बात यह है कि यह यीस्ट इतने लंबे समय तक ममी के साथ मौजूद रहा और वैज्ञानिक इसे दोबारा जीवित करने में भी कामयाब रहे। प्रयोगशाला में इस प्राचीन यीस्ट को विकसित करने के बाद उनके मन में सबसे पहले एक रोचक सवाल आया—क्या इससे ब्रेड बनाई जा सकती है?

आंत के खमीर से तैयार हुई सॉरडो ब्रेड

शोधकर्ता अली सरहान ने मजाकिया अंदाज में बताया कि जब भी किसी को यीस्ट के बारे में बताया जाता है, तो पहला सवाल यही होता है कि क्या इससे रोटी बनाई जा सकती है। इसके बाद वैज्ञानिकों ने इस यीस्ट से सॉरडो ब्रेड बनाने की कोशिश शुरू की। शुरुआत में उन्हें सफलता नहीं मिली, मगर लगातार तीन महीने तक प्रयोग करते रहने के बाद आखिरकार वे अच्छी गुणवत्ता वाली सॉरडो ब्रेड बनाने में सफल रहे।

सरहान ने हंसते हुए कहा कि अंततः उन्हें बहुत बढ़िया ब्रेड मिल गई। जब उनसे पूछा गया कि क्या इस यीस्ट का इस्तेमाल बीयर बनाने में भी किया जाएगा, तो उन्होंने जवाब दिया कि यह भी उनकी सूची में शामिल है।

खाने से आगे की संभावनाएं

हालांकि यह खोज सिर्फ खाने-पीने तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिकों ने पाया कि यह विशेष यीस्ट फिनॉल नामक रसायन को भी तोड़ सकता है। फिनॉल का इस्तेमाल 1991 में ओत्जी की ममी मिलने के बाद उसे फफूंद से बचाने के लिए किया गया था। अगर भविष्य में यह क्षमता और बेहतर तरीके से साबित हो जाती है, तो इस यीस्ट का उपयोग प्रदूषित इलाकों की सफाई में भी किया जा सकता है।

आंतों के सूक्ष्मजीवों ने दिए पुराने संकेत

शोध के दौरान वैज्ञानिकों को एक और दिलचस्प तथ्य हाथ लगा। ओत्जी की आंतों में मिला एक बैक्टीरिया ऑस्ट्रिया के हालस्टाट क्षेत्र की नमक खदान में सुरक्षित रखे गए 3,000 साल पुराने मानव मल में भी पाया गया है। इससे संकेत मिलता है कि प्राचीन लोगों की आंतों में कुछ एक जैसे सूक्ष्मजीव मौजूद थे।

वैज्ञानिकों का मानना है कि ओत्जी और कांस्य युग के खनिकों का भोजन फाइबर तथा साबुत अनाज से भरपूर था, जो आज के आधुनिक आहार से काफी अलग था।

जीवंत सूक्ष्म संसार है ओत्जी की ममी

इस अध्ययन का सबसे बड़ा निष्कर्ष यह है कि ओत्जी को सिर्फ एक जमी हुई टाइम कैप्सूल के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वैज्ञानिकों के अनुसार उसकी ममी एक जीवंत सूक्ष्म संसार की तरह है, जिसमें कई प्रकार के सूक्ष्मजीव आज भी मौजूद हैं।

हालांकि शोधकर्ताओं ने चेतावनी भी दी है कि अभी यह साफ नहीं है कि नया खोजा गया यह यीस्ट ममी के संरक्षण के लिए खतरा बन सकता है या नहीं। इसका पता लगाने के लिए आगे और अध्ययन किए जाएंगे। हजारों साल पुरानी इस ममी से निकला यह सूक्ष्म जीव न सिर्फ अतीत की झलक दिखा रहा है, बल्कि भविष्य की नई तकनीकों और वैज्ञानिक संभावनाओं के दरवाजे भी खोल सकता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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