मुंगेर के सिपाही ने दिन-रात एक कर पास की BPSC परीक्षा, संघर्ष भरी कहानी बनी मिसाल बिहार 2 महीने पहले 71
बिहार पुलिस में सिपाही के पद पर तैनात अमृत कुमार ने ड्यूटी के साथ पढ़ाई करते हुए 70वीं बीपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल की है। उन्होंने ओबीसी श्रेणी में 350वीं रैंक प्राप्त कर साबित कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

सपनों को सच करने की दास्तान

बिहार पुलिस के एक सिपाही ने अपनी मेहनत और जज्बे से एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मुंगेर डीआईजी कार्यालय में तैनात सिपाही अमृत कुमार ने अपनी व्यस्त ड्यूटी के बीच पढ़ाई जारी रखी और 70वीं बीपीएससी परीक्षा में सफलता का परचम लहराया है। उन्होंने ओबीसी श्रेणी में 350वीं रैंक प्राप्त कर अपने विभाग और परिवार का मान बढ़ाया है।

किसान परिवार से निकलकर सफलता तक

सहरसा जिले के कहरा प्रखंड के बरियाही गांव के रहने वाले अमृत कुमार एक सामान्य किसान परिवार से आते हैं। उनके पिता सुरेंद्र प्रसाद यादव ने तंगहाली के बावजूद उनकी शिक्षा को प्राथमिकता दी। अमृत कुमार वर्ष 2013 में बिहार पुलिस में सिपाही के रूप में भर्ती हुए थे। उन्होंने गया और शेखपुरा जैसे जिलों में अपनी सेवाएं देने के बाद वर्तमान में मुंगेर में डीआईजी कार्यालय की गोपनीय शाखा में कार्यभार संभाला है।

पत्नी और परिवार का मिला साथ

अपनी सफलता का श्रेय अमृत कुमार ने अपनी पत्नी को दिया है, जो खुद भी बिहार पुलिस में सिपाही हैं। उन्होंने बताया कि घर और तीन बच्चों की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ उनकी पत्नी ने उन्हें पढ़ाई के लिए पूरा सहयोग और समय दिया। अमृत ने कहा कि ड्यूटी की थकान के बाद भी उनका लक्ष्य स्पष्ट था, जिसकी वजह से वे निरंतरता बनाए रख सके।

अधिकारियों ने सराहा

मुंगेर रेंज के डीआईजी राकेश कुमार ने अमृत कुमार की इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी है। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग के लिए यह गर्व की बात है कि एक सिपाही ने नौकरी के साथ स्व-अध्ययन के जरिए इतनी बड़ी परीक्षा उत्तीर्ण की है। यह उन तमाम युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जो नौकरी के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। अमृत की कहानी सिखाती है कि अनुशासन और कठिन परिश्रम से किसी भी कठिन परिस्थिति में सफलता प्राप्त की जा सकती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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