मध्य प्रदेश
2 घंटे पहले
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विचारों
भारत एक कृषि प्रधान देश है और आज भी यहां बड़े पैमाने पर खेती होती है। हालांकि बीते कुछ वर्षों से किसानों को खेती में भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। कभी अतिवृष्टि, कभी सूखा तो कभी फसलों पर रोगों का प्रकोप उनकी मेहनत पर पानी फेर देता है। इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए युवा किसान अब खेती में नए-नए प्रयोग कर रहे हैं और इनमें उन्हें काफी हद तक कामयाबी भी मिल रही है।
दिलचस्प बात यह है कि कई लोग रिटायरमेंट के बाद या प्राइवेट कंपनियों के मोटे पैकेज छोड़कर खेती की ओर रुख कर रहे हैं। इन्हीं नए तरीकों में मल्टी लेयर फार्मिंग का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें किसान एक ही खेत में एक ही समय पर दो या तीन फसलें लेकर अच्छा उत्पादन हासिल कर रहे हैं और आर्थिक रूप से मजबूत बन रहे हैं।
क्या है मल्टी लेयर फार्मिंग
मध्य प्रदेश के सागर की कपूरिया में खेती करने वाले युवा किसान आकाश चौरसिया बताते हैं कि जमीन की उर्वरता बनाए रखने और ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए अब मल्टी लेयर तकनीक अपनाई जाने लगी है। इस तकनीक से किसान खुले खेत (ओपन फॉर्म) में भी बड़ी आसानी से एक साथ तीन फसलें ले सकते हैं। इसके लिए खेत की तैयारी के बाद बेड बनाए जाते हैं।
तीनों लेयर में कौन-सी फसलें लगाएं
पहली लेयर में जमीन के अंदर उगने वाली फसलें होती हैं, जिनमें हल्दी, अदरक, मूली और गाजर जैसी फसलें ली जा सकती हैं।
दूसरी लेयर में ऐसी फसलें होती हैं जिनकी जड़ मिट्टी में कम फैलती है और जो नीचे की फसल को प्रभावित नहीं करतीं। इसमें पालक, मेथी और धनिया जैसी फसलें लगाई जा सकती हैं।
तीसरी लेयर में लता वाली फसलें होती हैं, जैसे कुंदरू, करेला, कद्दू और लौकी। इनके लिए मचान बनाने की जरूरत पड़ती है। अगर मचान बनाना संभव न हो, तो 6/6 की दूरी पर फलदार पेड़ लगाए जा सकते हैं।
पहली लेयर में लगाएं काली हल्दी
आकाश चौरसिया आगे बताते हैं कि कम खर्च में तीन फसलों के सबसे बेहतरीन कॉम्बिनेशन में जमीन के अंदर पहली लेयर में काली हल्दी लगाई जा सकती है। दूसरी लेयर में लता वाली फसल के रूप में कुंदरु या परमल और तीसरी फसल के रूप में फलदार वृक्ष यानी पपीता या मोरिंगा लगाया जा सकता है। उनके मुताबिक इन फसलों का यह कॉम्बिनेशन सबसे अच्छा माना जाता है।
लागत और मुनाफा
इस तरह की खेती में किसानों को करीब एक से डेढ़ लाख रुपये का खर्च आता है, जबकि मुनाफा तीन से चार गुना तक होने की संभावना रहती है। चौरसिया का कहना है कि अगर किसान अपनी फसलों की प्रोसेसिंग भी कर लें, तो यह मुनाफा और भी ज्यादा बढ़ जाता है।
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