बिहार का ये 'सुपर फूड' अब देश भर में बढ़ाएगा किसानों की कमाई, सरकार ने बनाई खास योजना बिहार एक महीने पहले 88
मिथिला के मशहूर मखाने की बढ़ती मांग को देखते हुए अब सरकार इसका दायरा देश के अन्य राज्यों में बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इससे किसानों को पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना अधिक मुनाफा मिलने की उम्मीद है।

मिथिला के मखाने की बढ़ती धमक

बिहार की पहचान में शामिल कई उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है, जिनमें से एक है मिथिला का मखाना। अपने स्वाद और सेहत के गुणों के कारण इसे 'सुपर फूड' के रूप में जाना जाता है। अब तक केवल बिहार के कुछ इलाकों तक सीमित रहने वाला यह उत्पाद जल्द ही पूरे देश के किसानों के लिए समृद्धि का रास्ता बनेगा। इसकी लोकप्रियता न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते सरकार ने इसकी खेती को अन्य राज्यों तक फैलाने का निर्णय लिया है।

इन राज्यों में शुरू होगी खेती

भारत सरकार की एक विशेष योजना के तहत अब मखाने की खेती का विस्तार किया जा रहा है। पहले चरण में उत्तर प्रदेश, ओडिशा, असम, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के किसानों को इससे जोड़ा जाएगा। बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ डी आर सिंह ने इस पहल के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य के साथ सरकार अब उन फसलों पर ध्यान केंद्रित कर रही है जो बाजार में अधिक मूल्य दिलाती हैं।

खेती की बदली हुई तकनीक

पहले मखाने की खेती के लिए बड़े तालाबों या गहरे पानी की आवश्यकता मानी जाती थी, लेकिन अब कृषि वैज्ञानिकों ने इसे और अधिक सुलभ बना दिया है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने ऐसी तकनीक विकसित की है जिसमें बड़े तालाब की अनिवार्यता खत्म हो गई है। अब किसान अपने खेतों की मेड़ को थोड़ा ऊंचा करके और उसमें पानी जमा कर आसानी से मखाने की फसल तैयार कर सकते हैं। यह तकनीक कम पानी में भी उच्च उत्पादकता सुनिश्चित करती है, जिससे उन राज्यों के किसान भी लाभान्वित हो सकेंगे जहां जल संसाधन सीमित हैं।

मुनाफे का गणित

मखाने की खेती किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही है। कृषि जानकारों के मुताबिक, इसमें लागत की तुलना में करीब तीन गुना तक मुनाफा कमाना संभव है। बाजार में मखाना एक हजार रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक की दर से बिकता है, जिससे इसकी मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर किसानों के लिए कमाई का जरिया बन रहा है।

भागलपुर में बदलाव की शुरुआत

खेती के इस मॉडल का असर अब भागलपुर जैसे क्षेत्रों में भी दिखने लगा है। परंपरागत रूप से जहां किसान गन्ना और केला जैसी फसलों पर निर्भर थे, वहां अब वे मखाने की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी व्यापक स्तर पर इंतजाम किए जा रहे हैं। सरकारी सहयोग और नई तकनीक के तालमेल से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में भारत मखाने के उत्पादन में एक नया कीर्तिमान स्थापित करेगा और किसानों की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आएगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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