हरियाणा
एक घंटा पहले
3
विचारों
अंबाला में रक्षाबंधन का अनूठा उत्सव
हरियाणा के अंबाला स्थित ऑब्जर्वेशन होम में इस बार रक्षाबंधन का त्योहार एक विशेष और भावुक माहौल में मनाया गया। सामान्य तौर पर घरों में मनाए जाने वाले इस पर्व को यहां के बच्चों के साथ साझा करने के लिए समाज के लोग आगे आए। इस अनूठी पहल का उद्देश्य उन बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाना था जो किन्हीं कारणों से अपने परिवार और बहनों से दूर हैं। त्योहार के अवसर पर कलाधारा ग्रुप और ओमकार सेवा वेलफेयर सोसाइटी के सदस्य वहां पहुंचे और करीब 60 बच्चों के साथ रक्षाबंधन की खुशियां बांटीं।
भावुक कर देने वाले पल
ऑब्जर्वेशन होम में जब कार्यक्रम की शुरुआत हुई और बच्चों की कलाई पर राखी बांधी गई, तो वहां का दृश्य काफी भावुक था। कलाई पर रेशम का धागा बंधते ही बच्चों के चेहरों पर खुशी की चमक तो दिखी, लेकिन साथ ही उनकी आंखों में अपने घर और परिवार की यादें भी तैर गईं। रक्षाबंधन एक ऐसा पवित्र त्योहार है, जिसमें भाई अपनी बहनों के पास जाते हैं, लेकिन इन बच्चों के लिए स्थिति अलग थी। स्वयंसेवियों ने उनकी सूनी कलाई पर राखी बांधकर उन्हें यह संदेश दिया कि वे समाज में अकेले नहीं हैं और लोग उनसे लगाव रखते हैं। यह दिन उनके लिए सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि भरोसे का एक प्रतीक बन गया।
सकारात्मक जीवन का संकल्प
कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवी संस्थाओं ने न केवल बच्चों को राखी बांधी और मिठाई खिलाई, बल्कि उन्हें एक बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा भी दी। कलाधारा ग्रुप की सदस्य मानसी ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य ध्येय केवल त्योहार मनाना नहीं था, बल्कि बच्चों के भीतर सकारात्मक सोच को विकसित करना भी था। उन्होंने बताया कि राखी बांधने के बाद बच्चों से एक विशेष वादा लिया गया। बच्चों को समझाया गया कि जब वे ऑब्जर्वेशन होम से बाहर निकलें, तो वे कभी भी गलत रास्ते पर न चलें और न ही किसी भी प्रकार की नकारात्मक गतिविधियों का हिस्सा बनें। उन्हें समाज और देश की भलाई के कार्यों में संलग्न रहने के लिए प्रेरित किया गया है।
रिश्तों की गर्माहट और विश्वास
मानसी ने आगे कहा कि कई बार यहां रहने वाले बच्चे अपनी सगी बहनों से मिल पाने में असमर्थ होते हैं। ऐसे में उनकी कलाई पर राखी बांधकर उन्हें भाई-बहन के रिश्ते की मिठास और गर्माहट महसूस कराने का प्रयास किया गया। उनके अनुसार, यह राखी बच्चों के लिए एक धागा भर नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि समाज का एक बड़ा हिस्सा उन्हें अपना मानता है। संस्था का मानना है कि ऐसे आयोजनों से बच्चों के मन में छिपी नकारात्मकता दूर होती है और वे खुद को मुख्यधारा से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं।
समाज की जिम्मेदारी और सामूहिक भागीदारी
कलाधारा ग्रुप के सदस्य करन ने बताया कि इस दिन का महत्व हर परिवार के लिए विशेष होता है, इसलिए वे इस खुशी को इन बच्चों के साथ बांटने के लिए यहां आए थे। उन्होंने कुल 60 बच्चों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधे। वहीं, समाजसेवी विशाल वर्मा ने अपनी बात रखते हुए कहा कि त्योहारों का असली अर्थ सभी को खुशियों में शामिल करना होता है। समाज की यह जिम्मेदारी है कि वह ऐसे बच्चों को खुद से अलग न समझे और उन्हें अपनेपन का अहसास कराए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन बच्चों को अपने जीवन में बदलाव लाने के लिए समाज की ओर से भरपूर सहयोग और समर्थन मिलना चाहिए।
सीडब्ल्यूसी की सकारात्मक पहल
सीडब्ल्यूसी की अध्यक्ष रंजीता मेहता ने भी इस आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऑब्जर्वेशन होम में रक्षाबंधन का त्योहार मनाना एक सराहनीय प्रयास है। इससे बच्चों को यह स्पष्ट संदेश गया है कि लोग उनके साथ खड़े हैं और उन्हें समाज के किसी भी वर्ग से अलग नहीं माना जाता। लड़कियों द्वारा बच्चों को बेहद प्यार और दुलार के साथ राखी बांधने से वहां के माहौल में एक नई सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ। रंजीता मेहता ने जानकारी दी कि ऑब्जर्वेशन होम में निरंतर विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहता है। सभी प्रमुख त्योहारों को यहां मिल-जुलकर मनाया जाता है, ताकि बच्चे बाहरी दुनिया और समाज के साथ अपना जुड़ाव महसूस कर सकें। कार्यक्रम के समापन पर ग्रुप के सदस्यों ने ऑब्जर्वेशन होम के स्टाफ को भी राखी बांधी, जिससे वहां मौजूद सभी लोग काफी प्रसन्न नजर आए।
Comments
0 comment