कारगिल युद्ध की निर्णायक कड़ी: ऑपरेशन सफेद सागर की अनकही गाथा भारत एक दिन पहले 19
1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय वायुसेना के 'ऑपरेशन सफेद सागर' ने दुर्गम पहाड़ियों पर छिपे दुश्मनों की कमर तोड़ दी थी, जिसने युद्ध का पासा पूरी तरह भारत के पक्ष में पलट दिया।

कारगिल विजय में वायुसेना का दम

कारगिल की जंग में भारतीय थल सेना के पराक्रम के साथ ही भारतीय वायुसेना के ऑपरेशन सफेद सागर ने भी एक अत्यंत निर्णायक भूमिका निभाई थी। इस अभियान की शुरुआत 26 मई 1999 को हुई थी। उस समय दुर्गम और बर्फीली चोटियों पर जमे पाकिस्तानी घुसपैठियों की रणनीति को ध्वस्त करने के लिए भारतीय वायुसेना ने जिस तरह से मोर्चा संभाला, उसने भारतीय थल सेना को युद्ध के मैदान में बढ़त दिला दी थी।

क्यों चुनौतीपूर्ण था यह मिशन

कारगिल के उस कठिन दौर में पाकिस्तानी घुसपैठियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग NH-1A पर नजर रखने वाली कई रणनीतिक चोटियों पर अवैध कब्जा कर लिया था। भारतीय सेना के ऑपरेशन विजय को हवाई सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से वायुसेना को मैदान में उतारा गया। यह मिशन किसी भी लिहाज से आसान नहीं था। 18 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर काम करना, ऑक्सीजन की बेहद कमी होना, खराब मौसम की चुनौतियां और LoC यानी नियंत्रण रेखा को पार न करने के सख्त निर्देश के बीच भारतीय वायुसेना के जांबाजों को अत्यधिक सटीक हमले करने थे। इस अभियान को सफेद सागर का नाम इसलिए दिया गया क्योंकि पूरा क्षेत्र बर्फ की मोटी चादर से ढका हुआ था।

दुश्मन के ठिकानों पर सटीक प्रहार

ऑपरेशन के शुरुआती चरण में भारतीय सेना को कुछ शुरुआती मुश्किलों का सामना करना पड़ा था, लेकिन उसके बाद रणनीति में बदलाव किया गया। खास तौर पर जून 1999 में वायुसेना ने मिराज-2000 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल करते हुए दुश्मन के बंकरों, कमांड पोस्ट और उनके गोला-बारूद के ठिकानों पर अचूक बमबारी की। टाइगर हिल, Tololing और अन्य महत्वपूर्ण चोटियों पर किए गए इन घातक हमलों ने पाकिस्तानी अड्डों को भारी क्षति पहुंचाई और भारतीय थल सेना के लिए जीत का मार्ग प्रशस्त किया।

हाई-एल्टीट्यूड युद्ध का नया अध्याय

ऑपरेशन सफेद सागर ने पूरी दुनिया के सामने यह साबित कर दिया कि भारतीय वायुसेना बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण हालातों में भी प्रभावी तरीके से अपने अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है। इस ऑपरेशन ने न सिर्फ कारगिल युद्ध में भारत की जीत सुनिश्चित की, बल्कि भारतीय सैन्य रणनीति, प्रिसिजन स्ट्राइक क्षमता और हाई-एल्टीट्यूड एयर वॉरफेयर को एक नई पहचान दी। आज भी यह अभियान वायुसेना के इतिहास के सबसे सफल और महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक माना जाता है।

कारगिल विजय दिवस की यादें

भारत हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाता है। यह दिन 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय सेना की ऐतिहासिक जीत और देश के वीर सपूतों के बलिदान का प्रतीक है। वर्ष 1999 में लगभग 60 दिनों तक चले इस युद्ध के बाद आज के ही दिन भारत ने पाकिस्तान को हराकर तिरंगा फहराया था। कारगिल विजय दिवस के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीर सैनिकों के अदम्य साहस को नमन किया है। वहीं द्रास में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कारगिल युद्ध के अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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