उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
2
विचारों
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले का गोपालपुर गांव एक अनोखी मुश्किल से जूझ रहा है। यहां पिछले 12 वर्षों से जमीन की रजिस्ट्री के साथ-साथ उसकी खरीद और बिक्री पूरी तरह रुकी हुई है। नतीजतन गांव के लोग जमीन से जुड़े जरूरी कामकाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से थमी रजिस्ट्री
गांव की जमीन को लेकर खड़े हुए विवाद और कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति कायम रखने का निर्देश दिया था। इसी आदेश का असर यह हुआ कि पूरे गांव में जमीन से जुड़ा लेन-देन ठहर गया और इसका खामियाजा हर ग्रामीण को भुगतना पड़ रहा है।
खेती की जमीन होने पर भी अटके काम
ग्रामीणों का कहना है कि गांव की 90 प्रतिशत जमीन कृषि योग्य है, इसके बावजूद न तो जमीन की खरीद-बिक्री संभव हो पा रही है और न ही नामांतरण तथा वरासत जैसी आवश्यक कार्यवाही पूरी हो पा रही है। इससे आम लोगों के कई जरूरी काम लंबे समय से लटके पड़े हैं।
ग्रामीणों की प्रशासन से मांग
अब गांववाले प्रशासन के सामने यह मांग रख रहे हैं कि जो जमीन विवाद के दायरे में है, उसे अलग रखते हुए बाकी जमीनों की रजिस्ट्री दोबारा शुरू कराई जाए, ताकि सालों से रुके पड़े काम पटरी पर लौट सकें।
Comments
0 comment