धान से चाहिए बंपर पैदावार? अपनाएं DSR तकनीक, कम लागत और कम पानी में मिलेगा तगड़ा मुनाफा भारत 50 मिनट पहले 2
धान की पारंपरिक रोपाई के बजाय सीधी बुवाई यानी DSR तकनीक अपनाकर किसान कम पानी और कम लागत में अच्छी पैदावार ले सकते हैं, साथ ही गिरते भूजल स्तर को बचाने में भी मदद मिलती है।

खरीफ का सीजन शुरू हो चुका है और इस मौसम की मुख्य फसल मानी जाने वाली धान की तैयारी में किसान जुट गए हैं। आमतौर पर धान की खेती की शुरुआत नर्सरी तैयार करने से होती है और नर्सरी तैयार हो जाने के बाद फसल की रोपाई की जाती है। लेकिन कई इलाके ऐसे हैं, जहां पानी की भारी किल्लत के कारण धान उगाना किसानों के लिए मुश्किल भरा काम बन जाता है। इसी परेशानी का हल देने के लिए कृषि विशेषज्ञ अब किसानों को पारंपरिक रोपाई के बजाय एक नई तकनीक की ओर प्रेरित कर रहे हैं, जिसमें लागत भी कम लगती है और पानी की जरूरत भी कम पड़ती है। खास बात यह है कि इस तरीके से खेती करने पर गिरते भूजल स्तर को संभालने में भी मदद मिलती है।

किस तकनीक से करें धान की बुवाई

रायबरेली जिले के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के प्रभारी कृषि अधिकारी शिव शंकर वर्मा (बीएससी एग्रीकल्चर, डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद) के मुताबिक, अगर किसान पारंपरिक रोपाई की जगह धान की सीधी बुवाई यानी “DSR (Direct Seeded Rice)” तकनीक अपनाएं तो यह उनके लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी। इस तरीके से किसानों का खर्च भी घटता है और मेहनत भी कम लगती है। यह तकनीक पानी की बचत के साथ-साथ खेती की लागत कम करके किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी मददगार है।

उन्होंने बताया कि DSR विधि से खेती करने पर पारंपरिक रोपाई की तुलना में दो से तीन सिंचाई की बचत होती है। इसके अलावा खेत में पानी भरने की भी जरूरत नहीं रहती। खेत में सिर्फ पर्याप्त नमी होने पर ही इस तकनीक के जरिए बुवाई करके किसान बेहतर उपज हासिल कर सकते हैं।

रोपाई और सीधी बुवाई में फर्क

पारंपरिक तरीके में पहले नर्सरी तैयार करनी पड़ती है और करीब 25 से 30 दिनों बाद रोपाई की जाती है, जिसमें समय, मेहनत और लागत तीनों ज्यादा लगते हैं। इसके उलट सीधी बुवाई में केवल खेत में हल्की नमी की जरूरत होती है। इस विधि में धान के बीज सीधे खेत में बोए जाते हैं, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होती है।

कम सिंचित क्षेत्रों के लिए वरदान

शिव शंकर वर्मा का कहना है कि DSR तकनीक कम सिंचित इलाकों के किसानों के लिए बेहतर विकल्प है और यह भूगर्भ जल संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी तरीका है। यह तकनीक न सिर्फ कम सिंचाई वाले क्षेत्रों के लिए, बल्कि अधिक जल उपलब्धता वाले इलाकों के लिए भी उपयोगी साबित होती है।

कतारबद्ध बुवाई है जरूरी

DSR तकनीक से धान की खेती करने के लिए कतारबद्ध बुवाई करना आवश्यक है। इसके लिए बाजार में DSR मशीनें मौजूद हैं, जिनकी मदद से बीजों की बुवाई की जा सकती है। इन मशीनों से एक ही बार में कई हेक्टेयर भूमि पर बुवाई संभव हो जाती है, जिससे समय, मेहनत और लागत की काफी बचत होती है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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