कोटा चिड़ियाघर में 9 साल बाद गूंजी खुशी, मादा अजगर ने एक साथ दिए 18 अंडे राजस्थान एक घंटा पहले 2
नयापुरा चिड़ियाघर में करीब नौ साल बाद मादा अजगर ने 18 अंडे दिए हैं, जिन्हें सुरक्षित रखने के लिए तापमान और नमी पर खास निगरानी रखी जा रही है। इसके साथ ही मंडाना से कोबरा के 17 अंडे रेस्क्यू कर चिड़ियाघर लाए गए हैं।

कोटा के नयापुरा चिड़ियाघर से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद सुकून भरी खबर सामने आई है। करीब नौ वर्ष के लंबे अंतराल के बाद यहां मादा अजगर (पायथन) ने एक साथ 18 अंडे दिए हैं। वर्ष 2017 के बाद पहली बार घटी इस घटना ने वन विभाग और चिड़ियाघर प्रशासन में उत्साह की लहर दौड़ा दी है। इतने लंबे समय बाद मिली इस कामयाबी को वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक अहम उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। इन अंडों ने अधिकारियों के साथ-साथ प्रकृति और वन्यजीवों से लगाव रखने वाले लोगों की उम्मीदों को भी नई ऊंचाई दी है।

कम सर्वाइवल रेट सबसे बड़ी चुनौती

इस सुखद खबर के साथ एक बड़ी चुनौती भी जुड़ी हुई है। वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, अजगर के अंडों से बच्चों के सुरक्षित बाहर आने की सर्वाइवल रेट आमतौर पर सिर्फ 5 से 10 प्रतिशत तक ही रहती है। ऐसे में इन अंडों की सुरक्षा और सही देखभाल बेहद अहम हो जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए चिड़ियाघर प्रशासन ने खास इंतजाम किए हैं। पायथन के बाड़े में रेत की परत बिछाई गई है और तापमान व नमी को संतुलित बनाए रखने के लिए पानी के दो कुंड तैयार किए गए हैं। जानकारों का मानना है कि अंडों के बेहतर विकास के लिए यह वातावरण बहुत मायने रखता है।

अंडों की पहरेदारी में जुटी मादा पायथन

इन दिनों चिड़ियाघर में मादा पायथन का बर्ताव भी लोगों के लिए दिलचस्पी का विषय बना हुआ है। मादा अजगर अपने अंडों के चारों ओर कुंडली मारकर बैठी है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार यह अंडों की निगरानी रखने और उनके लिए जरूरी प्राकृतिक तापमान बनाए रखने की प्रक्रिया का हिस्सा है। यही वजह है कि प्रशासन ने बाड़े के आसपास अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए गैरजरूरी आवाजाही पूरी तरह सीमित कर दी है। स्टाफ की टीम पूरी मुस्तैदी के साथ अंडों पर नजर बनाए हुए है और हर गतिविधि की बारीकी से निगरानी की जा रही है।

मंडाना से रेस्क्यू किए गए कोबरा के अंडे

इसी बीच कोटा जिले के मंडाना क्षेत्र के उम्मेदपुरा गांव से सर्प संरक्षण से जुड़ी एक और अहम घटना सामने आई। सूचना मिलते ही सर्प रेस्क्यू टीम के सदस्य रॉकी डेनियल, गिरीश श्रृंगी और ललित बौरासी मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान एक कोबरा पत्थर के नीचे मृत अवस्था में मिला और उसके पास 15 से 17 अंडे भी पाए गए। टीम ने तुरंत इन अंडों को सुरक्षित रेस्क्यू कर चिड़ियाघर पहुंचाया, ताकि उनकी हिफाजत और उचित देखरेख सुनिश्चित की जा सके। इसे सर्प संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

प्रशासन और विशेषज्ञों की कोशिश जारी

वाइल्डलाइफ डीएफओ अनुराग भटनागर ने बताया कि वर्ष 2017 के बाद पहली बार चिड़ियाघर में पायथन ने इतनी बड़ी संख्या में अंडे दिए हैं। अंडों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं और विशेषज्ञों की सलाह के मुताबिक इनकी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गर्मी के मौसम को देखते हुए तापमान और नमी के स्तर पर खास ध्यान दिया जा रहा है। वन विभाग को उम्मीद है कि अगर अंडों का सफल विकास होता है तो यह नयापुरा चिड़ियाघर के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित होगी और अजगर संरक्षण के प्रयासों को नई रफ्तार मिलेगी। फिलहाल सभी की निगाहें इन्हीं अंडों पर टिकी हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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