हरियाणा
3 घंटे पहले
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लगातार बढ़ती लागत ने धान और गेहूं की खेती करने वाले किसानों के सामने आर्थिक चुनौती खड़ी कर दी है। यही वजह है कि अब कई किसान पारंपरिक फसलों को छोड़कर ऐसे विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिनमें खर्च कम और फायदा ज्यादा हो। अंबाला के मनीष कुमार भी इन्हीं किसानों में से एक हैं, जिन्होंने सोच-समझकर अपनी फसल का चुनाव किया है।
हरी खाद योजना से मिली प्रेरणा
मनीष कुमार ने बताया कि उन्होंने सरकार की हरी खाद योजना से प्रेरणा लेकर अपनी दो एकड़ जमीन पर मूंग की फसल उगाई है। उनके मुताबिक यह फैसला केवल कमाई के नजरिए से नहीं, बल्कि खेत की सेहत को ध्यान में रखकर लिया गया है।
कम समय में तैयार, मिट्टी के लिए फायदेमंद
मनीष का कहना है कि मूंग एक ऐसी फसल है जो थोड़े समय में ही तैयार हो जाती है। इसके साथ ही यह जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाती है, जिससे आने वाली फसलों को भी लाभ मिलता है।
सरकार और कृषि विभाग का सहयोग
किसानों को इस दिशा में प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की ओर से मूंग का बीज उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा कृषि विभाग समय-समय पर मूंग की खेती करने वाले किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और सहायता भी प्रदान करता रहता है, ताकि उन्हें बेहतर पैदावार मिल सके।
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