विश्व
5 घंटे पहले
2
विचारों
मक्का डिफेंस पैक्ट और पाकिस्तान का दोहरा चरित्र
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के बीच एक रक्षा समझौता हुआ था जिसे मक्का डिफेंस पैक्ट के नाम से जाना जाता है। इस समझौते की मुख्य शर्त यह थी कि यदि पाकिस्तान, सऊदी अरब या तुर्की में से किसी एक पर भी सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर संयुक्त हमला माना जाएगा और तीनों देश मिलकर इसका जवाब देंगे। हालांकि, जब यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के महत्वपूर्ण सैन्य और तेल ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन हमलों का निशाना बनाया, तो पाकिस्तान इस समझौते से अपने कदम पीछे खींचता नजर आया।
रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बदलते सुर
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक बयान में उम्मीद जताई कि ईरान हूती विद्रोहियों पर लगाम लगाएगा। उनका तर्क है कि ईरान एक इस्लामिक मुल्क है और पाकिस्तान की उससे हमदर्दी है, इसलिए फिलहाल उसे हस्तक्षेप करने की आवश्यकता महसूस नहीं होती। वहीं विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने भी साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी सैन्य कार्रवाई पर चर्चा नहीं चल रही है। उन्होंने कहा कि सही समय आने पर ही वे समझौते के अनुसार कदम उठाएंगे, जो एक टालमटोल भरा जवाब माना जा रहा है।
बयानबाजी बनाम जमीनी हकीकत
कुछ समय पहले तक पाकिस्तान का रुख काफी सख्त था और इस्लामाबाद हूती विद्रोहियों को चेतावनी दे रहा था कि सऊदी अरब पर हमला होने की स्थिति में वे चुप नहीं बैठेंगे। लेकिन जब वास्तव में पहला बड़ा इम्तिहान आया, तो पाकिस्तान की नीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। ख्वाजा आसिफ ने हालांकि एक साक्षात्कार में यह दावा किया कि वे समझौते की शर्तों से बंधे हैं और आक्रामकता होने पर इसका सम्मान करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि हूतियों को यह समझना चाहिए कि उनके कदम इस समझौते को सक्रिय कर सकते हैं, लेकिन उनकी यह बातें पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हैं।
रणनीतिक दुविधा या कूटनीतिक विफलता
जानकारों का मानना है कि ख्वाजा आसिफ का बयान गोलमोल है। एक तरफ वे सऊदी अरब के साथ हुए मक्का पैक्ट का राग अलाप रहे हैं, तो दूसरी तरफ ईरान को भी अपना मित्र बता रहे हैं। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि हूती हमले तो पहले भी होते रहे हैं और अभी ऐसे हालात नहीं हैं कि फौज भेजने की जरूरत पड़े। असल में, जनरल आसिम मुनीर ने जनता को गुमराह करने के लिए सऊदी अरब के साथ यह समझौता किया था, जिसमें फौज भेजने की शर्त शामिल थी।
पाकिस्तान का पुराना रिकॉर्ड
पाकिस्तान के लिए यह पहली बार नहीं है जब उसके दावों की पोल खुली है। अतीत में भी, पाकिस्तान ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने यह दावा किया था कि वह ईरान के साथ डील करवा देगा और उसे सरेंडर करने पर मजबूर कर देगा, लेकिन जब बात आई तो उसके दावे खोखले साबित हुए। अब सऊदी अरब पर हमले के बाद पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक्सपोज हो गया है। ईरान के साथ गहरी नजदीकियों के कारण अब पाकिस्तान के लिए हूतियों के खिलाफ फौजी कार्रवाई करना एक बड़ी मुश्किल बन गया है।
Comments
0 comment