मध्य प्रदेश
2 घंटे पहले
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मानसून की पहली बारिश बनी आफत
मध्य प्रदेश के मंडला जिले में मानसून की पहली तेज बारिश ने शहर की सूरत बदल कर रख दी। गर्मी और उमस से जूझ रहे लोगों को भले ही राहत मिली हो, लेकिन महज एक घंटे तक हुई झमाझम बारिश ने जल निकासी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। नगर पालिका के तमाम दावों के बावजूद शहर के कई इलाके जलमग्न हो गए और सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया।
सड़कें बनीं तालाब, यातायात हुआ ठप
बारिश का आलम यह था कि सड़कें देखते ही देखते तालाब में तब्दील हो गईं। स्थिति इतनी गंभीर थी कि शहर के प्रमुख स्थानों जैसे सुभाष वार्ड, सराफा बाजार और रेडक्रॉस भवन के सामने वाली सड़कों पर भारी जलभराव देखने को मिला। पानी का बहाव इतना तेज था कि सड़क और नालियों के बीच का अंतर मिट गया, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों की जान जोखिम में पड़ गई। कई स्थानों पर तो सड़क पर खड़ी दोपहिया गाड़ियां पानी में डूबी नजर आईं और यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। जगह-जगह लगे बैरिकेड भी पानी के तेज बहाव में बहते दिखाई दिए, जिससे अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया।
दुकानदारों को हुआ भारी आर्थिक नुकसान
इस बारिश की मार सबसे ज्यादा उन छोटे दुकानदारों और सब्जी विक्रेताओं पर पड़ी जो फुटपाथों पर अपना व्यवसाय चलाते हैं। पानी का बहाव इतना तेज था कि दुकानदारों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। देखते ही देखते उनकी सब्जियां और अन्य कीमती सामान पानी के तेज बहाव में बह गए। इस अचानक आई जलभराव की स्थिति ने न केवल दुकानदारों को आर्थिक क्षति पहुंचाई, बल्कि कई घरों में भी पानी घुसने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
शहर के निवासियों ने नगर पालिका की जल निकासी व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। लोगों का कहना है कि हर साल मानसून से पहले नालियों की सफाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली ही बारिश में हकीकत सामने आ गई। सड़कों पर जमा पानी से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे स्थानीय प्रशासन की तैयारियों की पोल खुल गई है। यदि समय रहते जलनिकासी के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में और भी गंभीर स्थिति बन सकती है।
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