अयोध्या राम मंदिर दान घोटाला: मास्टरमाइंड सुभाष श्रीवास्तव का काला अतीत आया सामने, बैंक में पहले भी लग चुके हैं गबन के आरोप उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 2
राम मंदिर दान चोरी मामले में गिरफ्तार पूर्व बैंक कर्मी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव के घर की भव्यता और उसके पुराने विवादित रिकॉर्ड ने सबको चौंका दिया है। अयोध्या के पॉश इलाके में रहने वाला यह आरोपी मंदिर के कैश काउंटर का प्रभारी था और लंबे समय से इस खेल में शामिल था।

राम मंदिर दान घोटाले की परतें खुलीं

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दान में हुई भारी हेरफेर का मामला अब गहराता जा रहा है। इस मामले में पुलिस ने कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें सबसे मुख्य नाम सुभाष चंद्र श्रीवास्तव का है। सुभाष की पहचान एक पूर्व बैंक कर्मचारी के रूप में हुई है, जो वर्तमान में राम मंदिर ट्रस्ट के कैश काउंटर पर प्रभारी के पद पर तैनात था। उस पर गंभीर आरोप है कि उसने अपनी आधिकारिक जिम्मेदारी का फायदा उठाकर मंदिर के चढ़ावे में बड़े स्तर पर चोरी की और चोरों के इस गिरोह को संरक्षण भी दिया।

आलीशान घर पर छाया सन्नाटा

सुभाष चंद्र श्रीवास्तव का घर अयोध्या के बेहद पॉश माने जाने वाले इलाके अंजनीपुरम की बैंक कॉलोनी में स्थित है। जब इस मामले के सामने आने के बाद जांच पड़ताल की गई, तो आरोपी का घर अपनी भव्यता के कारण चर्चा का विषय बन गया। घर के बाहर बाकायदा नाम का बोर्ड भी लगा है। फिलहाल, इस आलीशान मकान के बाहर पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है। स्थानीय स्तर पर की गई पड़ताल में सामने आया है कि गिरफ्तारी के बाद सुभाष का पूरा परिवार घर से गायब है। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि घर के अंदर कोई नहीं है और मुख्य द्वार भी बंद है। घर के एक हिस्से में रहने वाली एक किराएदार महिला ने दूर से बात करते हुए बताया कि वह इस बारे में कोई भी जानकारी देने में असमर्थ है।

पड़ोसियों के खुलासे से स्तब्ध इलाका

इस कॉलोनी में रहने वाले लोग सुभाष चंद्र श्रीवास्तव की गिरफ्तारी के बाद से बेहद हैरान हैं। एक पड़ोसी ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि वे पिछले 26 वर्षों से सुभाष और उनके परिवार के साथ रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि 26 साल के लंबे समय में सुभाष के व्यवहार में कभी ऐसा कुछ नहीं दिखा, जिससे यह अंदेशा हो सके कि वे राम मंदिर जैसे पवित्र स्थान के दान के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं। हालांकि, पड़ोसियों ने बातचीत के दौरान एक बड़ा और संवेदनशील खुलासा भी किया। उन्होंने बताया कि सुभाष का बैंकिंग इतिहास पहले से ही काफी दागदार रहा है।

नौकरी से बर्खास्तगी का पुराना रिकॉर्ड

पड़ोसियों की मानें तो उत्तर प्रदेश के ही किसी दूसरे जिले में बैंक में कार्यरत रहने के दौरान सुभाष चंद्र श्रीवास्तव एक बड़े वित्तीय गबन के मामले में फंस चुके थे। उस गंभीर आरोप के चलते उन्हें बैंक की नौकरी से टर्मिनेट यानी बर्खास्त कर दिया गया था। हालांकि, बाद में कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद उन्होंने वह केस जीत लिया था और उन्हें न्यायालय से क्लीन चिट मिल गई थी। यही वह अनुभव था, जिसके आधार पर उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट के कैश काउंटर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन अब सामने आया है कि वह पुराने काम को नए अंदाज में अंजाम दे रहे थे।

पुलिस की कार्रवाई और छापेमारी

स्थानीय निवासियों का कहना है कि कुछ दिन पहले ही अचानक पुलिस की गाड़ियां सुभाष के घर के सामने आकर रुकी थीं। पुलिस की इस दबिश के बाद पूरे इलाके में हलचल मच गई और तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। बाद में लोगों को पता चला कि राम मंदिर दान में हुई बड़ी वित्तीय गड़बड़ी और चोरी के तार सीधे उनके पड़ोसी सुभाष से जुड़े हैं। पुलिस का आरोप है कि सुभाष ने अपनी ड्यूटी के दौरान जानबूझकर लापरवाही बरती और दान की रकम को हड़पने में अहम भूमिका निभाई।

ट्रस्ट में सुभाष की भूमिका और जांच

सुभाष चंद्र श्रीवास्तव का काम मंदिर में आने वाले दान के कैश मैनेजमेंट को संभालना था। वह कैश काउंटर स्टाफ के इंचार्ज थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि उसने मंदिर के अंदर अपना एक नेटवर्क बना रखा था, जिसके जरिए पैसों की हेराफेरी की जा रही थी। अब पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है ताकि इस गिरोह के अन्य सदस्यों और बरामदगी के बारे में पूरी जानकारी जुटाई जा सके। फिलहाल आरोपी पुलिस की हिरासत में है और मामले के अन्य पहलुओं पर पूछताछ जारी है। इस पूरी घटना ने सुरक्षा और पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसका असर आने वाले समय में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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