उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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पीलीभीत पुलिस की बड़ी कार्रवाई
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए कुख्यात अपराधी सरबजीत सिंह को एक मुठभेड़ के दौरान मार गिराया है। यह अपराधी एक लाख रुपये का इनामी था और व्यवसायी पप्पू गुप्ता की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी के तौर पर वांछित था। बिलसंडा थाना क्षेत्र के शीतलपुर गांव के पास हुई इस मुठभेड़ में पुलिस को बड़ी मशक्कत का सामना करना पड़ा। इस घटनाक्रम में पुलिस के दो सिपाही भी घायल हुए हैं, जबकि थाना प्रभारी की जान उनके द्वारा पहनी गई बुलेट प्रूफ जैकेट के कारण बाल-बाल बच गई।
कौन था सरबजीत सिंह और क्या थे उस पर आरोप
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक सरबजीत सिंह एक पेशेवर अपराधी था जो सुपारी लेकर अपराध करने के लिए जाना जाता था। उस पर लखीमपुर खीरी समेत आसपास के विभिन्न जिलों में कुल 12 आपराधिक मामले दर्ज थे, जिनमें दो हत्याओं के केस भी शामिल थे। सरबजीत ने अपनी आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए एक संगठित गिरोह तैयार कर रखा था। वह अक्सर विवादों को सुलझाने के नाम पर या निजी रंजिशों के चलते लोगों को निशाना बनाता था।
पप्पू गुप्ता हत्याकांड की पूरी कहानी
इस पूरे मामले की जड़ में बिलसंडा के साइकिल व्यापारी पंकज कटियार और उनके ससुर रमेश चंद्र के बीच चल रहा पारिवारिक विवाद था। खबरों के अनुसार, रमेश चंद्र ने पंकज पर हमला करवाने के लिए लखीमपुर खीरी के उचौलिया निवासी शिवम उर्फ सरबजीत को सुपारी दी थी। योजना के तहत 28 मई को सरबजीत और उसके साथियों ने बिलसंडा बाजार में पंकज कटियार को घेरकर उन पर हमला किया। इस दौरान पास ही दुकान चलाने वाले पप्पू गुप्ता ने जब बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो बदमाशों ने उन्हें गोली मार दी। इस घटना में पप्पू गुप्ता की मौत हो गई, जिसके बाद अपराधी मौके से फरार हो गए।
पुलिस जांच और घेराबंदी का जाल
घटना के अगले ही दिन पुलिस ने रमेश चंद्र, विमल, सीतेश, लकी, संजय, सीताराम राठौर, सुमित और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 24 घंटे के भीतर ही लकी नामक आरोपी को मुठभेड़ में गिरफ्तार कर लिया। लकी से हुई कड़ी पूछताछ के दौरान ही मुख्य आरोपी शिवम उर्फ सरबजीत सिंह का नाम सामने आया। पुलिस ने इसके बाद अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए सरबजीत की तलाश शुरू कर दी थी।
मुठभेड़ की पूरी घटना का ब्योरा
पुलिस अधीक्षक सुकीर्ति माधव मिश्र ने बताया कि शनिवार रात को पुलिस को सूचना मिली कि सरबजीत सिंह बिलसंडा थाना क्षेत्र में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में घूम रहा है। इस सूचना पर पुलिस टीम ने रात 9 बजकर 50 मिनट पर शीतलपुर मरौरी के जंगल के पास घेराबंदी की। पुलिस को देखते ही सरबजीत ने अपनी सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। एक गोली सीधे थाना प्रभारी जगदीप मलिक की बुलेट प्रूफ जैकेट में लगी, जिसने उनकी जान बचा ली। इसके अलावा एसओजी के दारोगा उमेश त्यागी और सिपाही हरेंद्र को भी गोलियां लगीं।
पुलिस की जवाबी कार्रवाई
अपने साथियों को घायल होते देख पुलिस ने मोर्चा संभालते हुए जवाबी फायरिंग की। इस आत्मरक्षा और जवाबी कार्रवाई के दौरान सरबजीत सिंह को 3 गोलियां लगीं, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा। पुलिस ने मौके से एक सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल, एक 315 बोर का तमंचा और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए हैं। घायल सरबजीत को तुरंत इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रात करीब 12 बजे चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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